अपनी दुनिया में मस्त हैं सभी
हम ही सबसे विलग हैं
जितनी रात गहरी होगी
अकेलापन अभी और बढेगा
हर काले गहराते साये के साथ
तन्हा सफर कैसे कटेगा
दिन भी गुजरा, साँझ भी गुजर गई
रात का दामन ही क्यूँ गहरा है
रात के बढ़ते पहरों पर अब
वक्त का न कोई पहरा है
जीवन की इस सांझ का
अब न कोई सवेरा है
पल - छिन पंख लगाकर
अब नही उड़ पाते हैं
इक - इक पल में गहराते
अकेलेपन के साये हैं
हम ही सबसे विलग हैं
जितनी रात गहरी होगी
अकेलापन अभी और बढेगा
हर काले गहराते साये के साथ
तन्हा सफर कैसे कटेगा
दिन भी गुजरा, साँझ भी गुजर गई
रात का दामन ही क्यूँ गहरा है
रात के बढ़ते पहरों पर अब
वक्त का न कोई पहरा है
जीवन की इस सांझ का
अब न कोई सवेरा है
पल - छिन पंख लगाकर
अब नही उड़ पाते हैं
इक - इक पल में गहराते
अकेलेपन के साये हैं