अनुमति जरूरी है

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

गुरुवार, 15 अक्तूबर 2009

भीगा हूँ बहुत
अश्कों के बहते
धारों में
डूबा हूँ बहुत
तेरे दिए
दर्द के
सैलाबों में
भटका हूँ बहुत
तेरी जुल्फों के
गलियारों में
बहका हूँ बहुत
तेरे रेशमी
अहसासों में
बस बहुत हुआ
अब और न
इम्तिहाँ ले
मत मार मुझे
यूँ याद में
तडपा-तडपा कर
सिर्फ़ एक बार आकर
सीने पर खंजर चला दे
दिल के टुकड़े- टुकड़े
कर दे

18 टिप्‍पणियां:

GATHAREE ने कहा…

iska sheershak - 'O Bewafa '
kaisa rahega?

Dr. Amarjeet Kaunke ने कहा…

dil ke tukde tukde kar de
yaa
aaa k sine se laga le.....

Mishra Pankaj ने कहा…

सुन्दर रचना , बधाई

परमजीत बाली ने कहा…

एक अजीब सा एहसास ले हुए है यह रचना।बढिया!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सिर्फ़ एक बार आकर
सीने पर खंजर चला दे
दिल के टुकड़े- टुकड़े
कर दे

ये तो उससे न होगा!मुमकिन ही नही है।
धनतेरस, दीपावली और भइया-दूज पर आपको ढेरों शुभकामनाएँ!

ओम आर्य ने कहा…

बेहद सुन्दर रचना.....

Pramod Kumar Kush 'tanha' ने कहा…

tariif se badhkar likha hai ...jitni tariif karein kam hai...

योगेश स्वप्न ने कहा…

katl, oh.....uffffffffff.......premi ka gussa.....gazab.........

vandana ji, deepawali aur dhanteras ki hardik shubhkaamnayen ishwar apke hriday ko adhyatm ke deepak ke prakash se prakashit karen.

M VERMA ने कहा…

सिर्फ़ एक बार आकर
एहसास बहुत सघन है. आपके द्वारा व्यक्त भाव भावमय कर देते है.

MANOJ KUMAR ने कहा…

कुछ तो मज़बूरियां रही होंगी,
यों कोई बेवफ़ा नहीं होता।

UNBEATABLE ने कहा…

Na Jaane kitane jakhami Diloon ki daastaan ko shabd de diye aapane is kavita ke sahaare ... Bahut khoob

राकेश कुमार ने कहा…

विरह वेदना के अतिरेक और उच्चतम अवस्था को रेखान्कित करती आपकी शीर्षक विहीन इस कविता के शब्द जैसे मन के भावो को अन्दर तक झुलसा गयी.वैसे भी, विरह के कान्टो के बीच खिला प्रणय रूपी गुलाब का पुष्प अत्यन्त सुगन्धित, सम्मोहक और मनोहारी होता है.बिना विरह वेदना के मह्सूस किया गया प्यार सिर्फ कोरे सफेद कागज पर पानी से लिखा गया मजमून है इसे रन्ग तो विरह की वेदनाये देती है.

सुन्दर कविता.

प्रीति टेलर ने कहा…

fir ek baar aapki kalam ka jaadu dekhne ko mila

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

vanadana ji

bahut hi flow liye hue kavita hai .. antim pankhtiyaan ek nayi tasweer pesh karti hai

regards

vijay

संजय भास्कर ने कहा…

vanadana ji

bahut hi flow liye hue kavita hai ..

SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Babli ने कहा…

आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !

योगेश स्वप्न ने कहा…

आपको और आपके परिवार को दीपावली की मंगल कामनाएं.

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

"आओ मिल कर फूल खिलाएं, रंग सजाएं आँगन में

दीवाली के पावन में , एक दीप जलाएं आंगन में "

......दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ |