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मंगलवार, 25 जुलाई 2017

शोकगान

गुस्से के धुएं में जल रही है चिता
अपनी ही आजकल
पंगु जो हो गयी है व्यवस्था
और लाचार हो गयी है जनता

तो क्या हुआ जो न मिले न्याय
दस वर्षीय गर्भवती को
उनके घर नहीं होते ऐसे हादसे
'इतना बड़ा देश है, आखिर किस किस की संभाल करें'
कारण से हो जाओ संतुष्ट
कि तालिबानी देश के वासी हो अब तुम

जहाँ इतिहास को खुरचा जा रहा हो
बदली जा रही हों इबारतें
वहाँ छोटे मोटे हादसों से परेशान करने की जुर्रत ?
मरे हुए देश के मरे हुए लोगों
न्याय वो अबला है
जिसकी मांग में सिन्दूर भर
सुहागिन करने के रिवाज़ बदले जा चुके हैं

आओ शोकगान में सम्मिलित होओ

रविवार, 23 जुलाई 2017

मैं सन्नाटा बुन रही हूँ ...


मैं सन्नाटा बुन रही हूँ ...जाने कब से
न, न अकेलापन या एकांत नहीं है ये
और न ही है ये ख़ामोशी

तेरे शहर के सन्नाटे का एक फंद
मेरी रूह के सन्नाटे से जुड़ कर
बना रहा है तस्वीर-ए-यार

सुनो
तुम ओढ़ लेना
मैं पढ़ लूँगी जुबाँ
हो जायेगी बस गुफ्तगू
काफी है जीने के लिए

इश्क की प्यालियों का नमक है ये
जिसका क़र्ज़ कायनात के अंतिम छोर तक भी चुकता नहीं होता ...

रविवार, 16 जुलाई 2017

एक शाम ब्लॉगिंग के नाम .....

 
 
एक शाम ब्लॉगिंग के नाम ......जी हाँ, हम सबके प्रिय मित्र Mahfooz Ali द्वारा आयोजित ब्लॉगर मीट (ये वो वाला मीट नहीं है जनाब जो गौरक्षकों के हथियार निकल आयें और पेल दें सब पर दे दनादन, लेकिन अगर ऐसा हो भी जाता तो कोई डर नहीं था क्योंकि आयोजन करने वाला भी तो हमारा मोहम्मद अली था :) ) हाँ तो जब महफूज़ बुलाये और कोई न आये ऐसा तो हो ही नहीं सकता. जितने प्यार और सम्मान से महफूज़ बुलाता है उसके बाद अपनी तबियत को भी कहना पड़ता है ठीक हो जा वर्ना महफूज़ आ जायेगा :)

दोस्तों, एक अरसे बाद घर से अकेली निकली और जब अपने ब्लॉगिंग की दुनिया के दोस्तों से मिली तो एक अलग सी ख़ुशी मिली. कुछ नए लोगों से भी मिलना हुआ जो फेसबुक पर तो दोस्त हैं लेकिन अभी तक मिले नहीं थे. ब्लॉगिंग का दौर वो दौर था जिसमे जब बात होती थी तो पोस्ट पर होती थी लेकिन सम्बन्ध ज्यों के त्यों कायम रहते थे और ऐसी ही आत्मीयता आज तक बनी हुई है तभी तो एक बुलावे पर सब दौड़े चले गए. अंजू चौधरी, डॉ दराल, मुकेश कुमार सिन्हा, शाहनवाज़, डॉ दराल, तारकेश्वर गिरी, सुनीता शानू, वंदना गुप्ता, हितेश शर्मा, आलोक खरे, ब्रजभूषण खरे जिनका कल जन्मदिन भी था , संंजय जी जो एनएसडी से जुड़े अभिनेता मॉम, तलवार जैसी कई फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं, उनका पिछली बार जब मिले थे जब जन्मदिन था, रमेश सिंह बिष्ट, शाहनवाज़, खुशदीप सहगल आदि बच्चों सी चपलता के साथ वहाँ मौजूद थे तो फोटो सेशन का भी खूब लाभ उठाया गया.

१ जुलाई से जब से एक बार फिर ब्लॉगिंग की तरफ सबने कदम बढाया तो लगा जैसे वो ही दौर लौट आएगा. कल की मीट में इन्ही बातों पर फोकस किया गया कि कैसे एक बार फिर लेखक को उसके ब्लॉग की तरफ मोड़ा जाए. कैसे अपने कंटेंट को आकर्षक बनाया जाए जो पाठक खुद ढूंढता हुआ आ जाये. कैसे आज ब्लॉगिंग से कमाई की जा सकती है उस के बारे में भी चर्चा की गयी. और सही बात है लेखक लिख रहा है तो चाहता है उसका लेखन सारे संसार तक पहुँचे मगर वो रास्ते नहीं जानता . इस मीटिंग में यही समझाने और बताने की कोशिश की गयी शाहनवाज़ और खुशदीप जी द्वारा. वहीँ एग्रेगेटर की कमी को भी दूर करने की कोशिश पर ध्यान दिलाया गया.
यूँ तो हम सभी एक दूसरे को जानते थे लेकिन जो नए आये थे वो थोड़े संकोच में थे इसलिए कम बोले. हाँ, हितेश एक युवा, जो यात्राओं पर रहता है अक्सर उसका यात्रा पर घुमक्कड़ी डॉट कॉम वेबसाइट है उस पर लिखता है , उसने जरूर थोड़ी बहुत इस बारे में बातचीत की. मगर अभी अभी मेरी बात हुई रमेश सिंह बिष्ट जी से जो कल पहली बार मिले थे तो बोले मैंने आपको पहचाना ही नहीं वर्ना आपके साथ एक अलग से फोटो तो जरूर ही खिंचवाता और आपसे कुछ देर बात भी होती, जिसका उन्हे बहुत अफ़सोस हुआ. कभी कभी संकोच के कारण काफी कुछ छूट जाता है तो आगे से ये ध्यान रखा जाएगा जब सब आ जाएँ तो सबका इंट्रोडक्शन दिया जाए ताकि कोई भी एक दूसरे से अनभिज्ञ न रहे और उसे बाद में कोई अफ़सोस भी न रहे.

गज़ाला जी का घर हो और उनकी मेहमान नवाजी हो तो कौन होगा जो उससे वंचित रहना चाहेगा. सबसे पहले ड्राइंग रूम में बैठे तो वहाँ कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स चलते रहे फिर बाहर लॉन में बैठे तो वहाँ इडली सांभर, समोसे चटनी के साथ, खांडवी, दो तरह की बर्फी और साथ में कोल्ड ड्रिंक और चाय भी .......एक शानदार शाम के लिए महफूज़ और गज़ाला जी का जितना शुक्रिया अदा किया जाए कम ही है . ऐसे आयोजन न केवल संबंधों को प्रगाढ़ करते हैं बल्कि एक नयी दिशा भी देते हैं .

हिंदी ब्लॉगिंग का नया दौर एक बार फिर ब्लॉगर्स की सक्रियता की ओर देख रहा है तो आइये ब्लॉगिंग को उसका नया स्वरुप देकर अपना योगदान दें ताकि जिंदा रहे हिंदी और आपका लेखन ...
#हिन्दी_ब्लॉगिंग
 











 

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

चल अकेला

साथ कब किसी का होता है 
सब अकेले ही चलते हैं 
ये तो मन के भरम होते हैं 
वो मेरा है 
वो मेरा अपना है 
वो मेरा प्रियतम है 
जब भीड़ में भी तन्हाई डंसती है 
तब पता लगता है 
किस साथ के भरम में 
उम्र के शहतूत गिर गए 
वो जो चिने थे सदियों ने 
सारे पर्वत पिघल गए 
फिर इक नया सफ़र शुरू होता है 
चल अकेला चल अकेला चल अकेला का सिद्धांत मुखर होता है 

क्योंकि 
अंतिम सत्य तो यही है 
अकेले आगमन होता है 
और अकेले ही गमन 
तो कैसे सम्भव है 
बीच में काफिलों का बनना 
बस इस सबब को समझते समझते 
टूट जाती हैं सारी शाखें वक्त के वृक्ष से 
और उस पल का अकेलापन 
काफी होता है उम्र भर को तोड़ने को 
और दूसरे की थाली से रोटी खाने से कब किसी का पेट भरा है 
जब तक कोई खुद न उस दोज़ख से गुजरा है 
अपने हिस्से के आस्माँ को जिसने खुद ना निरखा है 
कैसे सम्भव है 
रेगिस्तान की रेत से पानी उलीचना ?

खुद के मरे बिना कब स्वर्ग मिला करता है 
आश्वासनों की तहरीरों पर ना जीवन गुजरा करता है 
जब समझ आता है तब तक 
देर की देहरियों पर सांझ उतर आती है 
और रात्रि के अंतिम पड़ाव से पहले 
अकेलेपन के जंगलों में फिर कोई सूरजमुखी नहीं खिला करती 
जानना जरूरी है ............
अकेलेपन की त्रासदी को भोगने से पहले 
जानना जरूरी है …………चल अकेला के सिद्धांत को 

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

शनिवार, 1 जुलाई 2017

हम सब जुनैद हैं

मैं मर चुकी हूँ
हाँ , चुक चुकी है
मेरी खोज
मेरी अंतर्वेदना
मेरा मन

नही रही चाह किसी खोजी तत्व की
एक गूंगा मौसम फहरा रहा है
अपना लम्पट आँचल
और मैं हूँ गिरफ्त में

जीने की चाह न बचना
आखिर है क्या ?
मौत ही तो है ये भी
साँस लेना जिंदा होने का सबूत नहीं

राम रोज बरस रहा है धरती पर
कभी बरखा बन कर तो कभी कहर बन कर
मासूमों का क़त्ल
मेरे समय का शून्यकाल है
संवेदनाएं पक्ष विपक्ष कब देखती हैं
शून्य चित्त से नहीं किये जाते आह्वान

समय दरोगा बन कर रहा है शासन
हुक्म उदूली करना पर्याय है विद्रोह का
देश बन गया है कत्लगाह
जुनैद हैं यहाँ सभी
हम सब जुनैद हैं
मारे जा चुके हैं
तो बताओ कैसे कहूँ - जिंदा हूँ मैं ?

मगर "राम" जिंदा हो गया
अपने समय के वीभत्स स्वरुप पर अट्टहास करता हुआ
अल्लाह की सिसकियों से बोझिल है सारी कायनात
जुनैद का मरना जरूरी है शान्ति पाठ के लिए ....

आज मौत मेरा स्वाभाविक अवलंबन है
और विद्रोह मेरा गुनाह ...

#हिंदी_ब्लोगिंग