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शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

सोच समझ तू कर व्यवहार

धर्म और जाति दो हथियार 
वो चलाएंगे बार बार 

उनका सिक्का यहाँ चलेगा 
ऐसे ही उनका शासन बढेगा 

क्यों मचाते तुम चीख पुकार 
करो अपना कर्म बारम्बार 

ऊँगली से उन्हें जिताते रहो 
खुद को मझधार में डुबाते रहो 

देश न आगे बढे, चलेगा 
मगर उनका दबदबा बना रहेगा 

कत्लोगारत उनकी पहचान 
बस उनसे ही है हिन्दुस्तान 

तुम कौन हो क्या हो नहीं जानते 
हुजूर सत्ताधारी तुम्हें नहीं पहचानते 

बस इक दिन ही तुम्हारा जोर चलेगा 
फिर तो बेटा तू ही कोल्हू में पिसेगा 

बस इतना ही है आचार विचार 
सोच समझ तू कर व्यवहार 






सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

मैंने चिंताओं को पकते देखा है 
वक्त की डाल पर 
किसी खराश सा 
जो परिवर्तित हो 
बन जाती है अंततः 
चिता की लकड़ी 
और 
धूं धूं कर जलना जिनकी नियति