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बुधवार, 9 सितंबर 2009

विदा करो मुझे

किस शून्य में
छिप गए हो
कहाँ कहाँ ढूंढूं
किस अंतस को चीरूँ
जब से गए हो मुहँ मोड़कर
प्रीत की हर रीत तोड़कर
किस पथ को निहारूं मैं
कैसे बाट जोहारूं मैं
तुम तो मुख मोड़ गए
मुझे अकेला छोड़ गए
अंखियन ने बहना छोड़ दिया है
ह्रदय का स्पंदन रुक गया है
तुम्हारे वियोग में प्रीतम
अंतस मेरा सूख चुका है
वो तेरा रूठ कर जाना
फिर बुलाने पर भी ना आना
जीवन को ग्रहण लगा गया है
कैसे भीगी सदायें भेजूं
किन हवाओं से पैगाम भेजूं
कैसे ख़त पर तेरा नाम लिखूं
लहू भी सूख चुका है अब तो
निष्क्रिय तन है अब तो
सिर्फ़ साँसों की डोर है बाकी
विदाई की अन्तिम बेला है
और आस की डोर कहीं बंधी है
तुम्हारे मिलन को तरस रही है
तेरे दीदार की खातिर
ज़िन्दगी मौत से लड़ रही है
हर आती जाती साँस के साथ
अधरों पर
तेरे नाम की माला जप रही है
निश्चेतन तन में कहीं
कोई चेतना बची नही है
इक श्वास ही कहीं
अटकी पड़ी है
तेरे विरह में कहीं
भटक रही है
अब तो आ जा
अब तो आ जा..........
मुझे एक बार फिर से
अपना बना जा
मेरी विदाई को
मेरा इंतज़ार न बना
शायद यही सज़ा है मेरी
आह ! नही आओगे
लो चलती हूँ अब
विदा करो मुझे
मेरे इंतज़ार के साथ
आस भी टूट गई
रूह भी पथरा गई
और साँस थम गई

33 टिप्‍पणियां:

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अंखियन ने बहना छोड़ दिया है
ह्रदय का स्पंदन रुक गया है
तुम्हारे वियोग में प्रीतम
अंतस मेरा सूख चुका है

मार्मिक रचना...शब्द और भाव का अनूठा संगम...वाह
नीरज

Mrs.Bhawna K Pandey ने कहा…

:)

Dr. Amarjeet Kaunke ने कहा…

मन को उदास करने वाली कविता है...कौन है वो
जो ऐसी कविता पढ़ कर भी ना लौटे....

रंजना ने कहा…

भावुक अभिव्यक्ति......

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

जीवन की अंतिम बेला का सटीक चित्रण।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

जीवन की अंतिम बेला का सटीक चित्रण।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

जीवन की अंतिम बेला का सटीक चित्रण।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Pankaj Mishra ने कहा…

सुन्दर रचना
आभार आपका
पंकज

ओम आर्य ने कहा…

बहुत ही दर्द समेटे हुये रचना...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

"लो चलती हूँ अब
विदा करो मुझे
मेरे इंतज़ार के साथ
आस भी टूट गई
रूह भी पथरा गई
और साँस थम गई"

अत्यन्त मार्मिक....
निशब्द हो गया हूँ।
बस यही कह सकता हूँ,
बेहतरीन..........
बहुत-बहुत बधाई!

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

बहुत ही मार्मिक रचना। वियोग से भरी हुई। शुरु से लेकर अंत तक एक ही धागे में लिपटी हुई।

ह्रदय का स्पंदन रुक गया है
तुम्हारे वियोग में प्रीतम
अंतस मेरा सूख चुका है
वो तेरा रूठ कर जाना
फिर बुलाने पर भी ना आना
जीवन को ग्रहण लगा गया है
कैसे भीगी सदायें भेजूं
किन हवाओं से पैगाम भेजूं
कैसे ख़त पर तेरा नाम लिखूं

बहुत बेहतरीन।

M VERMA ने कहा…

विरह की वेदना का अद्भुत चित्रण -
वो तेरा रूठ कर जाना
फिर बुलाने पर भी ना आना
बहुत ही मार्मिक और भावो की सघन अनुभूति

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत ही दिल को छु लेने वाली मार्मिक रचना है यह ..भाव विभोर कर दिया इस ने शुक्रिया

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... behad prabhaavashaali abhivyakti !!!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

dil ko gahre chhu gai yah rachna

Priya ने कहा…

virah ka umda varnan

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

अच्छा लिखा है जी आपने

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

"लो चलती हूँ अब
विदा करो मुझे
मेरे इंतज़ार के साथ
आस भी टूट गई
रूह भी पथरा गई
और साँस थम गई "
मार्मिक रचना...बहुत ही अच्छी लगी ये रचना...

vikram7 ने कहा…

लो चलती हूँ अब
विदा करो मुझे
मेरे इंतज़ार के साथ
आस भी टूट गई
रूह भी पथरा गई
और साँस थम गई
मार्मिक रचना

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत गहन भाव..मार्मिक..दिल को छू गई.

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

मेरे इंतज़ार के साथ
आस भी टूट गई
रूह भी पथरा गई
और साँस थम गई

wah vandana ji....

...hamesha ki tarah badhiya.

meri niji rai: Mujhe aapki choti poems zayada acchi lagti hain.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इक श्वास ही कहीं
अटकी पड़ी है
तेरे विरह में कहीं
भटक रही है
अब तो आ जा
अब तो आ जा..........
मुझे एक बार फिर से
अपना बना जा

MAARMIK .... BHAVON KO SHABDON MEIN PIRO KAR EK SHASHAKT RACHNA KA SRIJAN KIYA HAI APNE .... SAJEEV CHITRAN ...

Nirmla Kapila ने कहा…

लो चलती हूँ अब
विदा करो मुझे
मेरे इंतज़ार के साथ
आस भी टूट गई
रूह भी पथरा गई
और साँस थम गई"
vवन्दना तुम्हारी रवना पढ कर मन और उदास हो गया पता नहीं क्यों आज अपनी भी सास टूटती सी लग रही है इतनी वेदना सच मे कभी कभी िन्सान कितना मजबूर सा हो जाता हैबहुत बडिया रचना है शुभकामनायें

RAJESHWAR VASHISTHA ने कहा…

आपकी कविताओं में वेदना है......महादेवी की कविताओं सी........कुछ नए मुहावरे में भी लिखें...

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

आपकी सभी कृतियाँ सुन्दर है
---
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Babli ने कहा…

वाह वाह क्या बात है! बहुत ही ख़ूबसूरत और शानदार रचना लिखा है आपने! दिल को छू गई आपकी ये रचना जो पूरे भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लिखा है! इस बेहतरीन रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ !

प्रीति टेलर ने कहा…

एक सुन्दर रचना ...

Harsh ने कहा…

nice post...........

Harsh ने कहा…

nice post sir ji...........

महफूज़ अली ने कहा…

लो चलती हूँ अब
विदा करो मुझे
मेरे इंतज़ार के साथ
आस भी टूट गई
रूह भी पथरा गई
और साँस थम गई .........

hmmm...... bahut hi maarmik rachna..... aisa chitran pehli baar hi dekha....... bahut achcha laga .....

विपिन बिहारी गोयल ने कहा…

बहुत सुंदर भावपूर्ण कविता

शरद कोकास ने कहा…

छायावादी युग की कवितायें याद आ गईं ।

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

just suparb .. mere paas shabd nahi hai is anmol rachna ke liye .. bahut hi dil ko choo lene waali rachna .. main kya kahun ji .. lekhan ab aur saarthak ho gaya hai ..