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सोमवार, 14 दिसंबर 2020

इंसान


इंसान
तुम्हारी फुफकार से भयभीत हैं
आज सर्प भी
ढूंढ रहे हैं अपने बिल
क्योंकि जान गए हैं
उनके काटने से बचा भी जा सकता है
मगर तुम्हारे काटे कि काट के अभी नहीं बने हैं कोई मन्त्र
नहीं बनी है कोई वैक्सीन

हे विषधर
तुम्हारे गरल से सुलग रही है धरा
तो ये नाम आज से तुम्हारा हुआ
सर्पों ने त्याग दिया न केवल नाम
अपितु छोड़ दी है केंचुली भी
कि तुम ही उत्तराधिकारी हो
उनके हर कृत्य के

वंशज बनने हेतु स्वीकारो पद
सर्पों ने ग्रहण कर लिया है संन्यास

शनिवार, 5 दिसंबर 2020

आकलन

 सदियों से अपना आकलन करवाती रही मगर कभी ना खुद अपना आकलन किया बस खुद को सिर्फ़ एक गृहिणी का ही दर्जा दिया


जब किसी ने प्रश्न किया
क्या करती हो तुम ?
तब जाकर ये अहसास हुआ
सिर्फ़ "अर्थ" ही कार्यक्षमता का मापदंड हुआ
चाहे आर्थिक रूप से
मैं सक्षम नहीं
लेकिन घर का सबसे कमाऊ सदस्य मैं ही हूँ
रिश्तों की दौलत से बढकर और कौन सी कमाई होती है
मैं नहीं जानती
और ना जानना चाहती हूँ

देखो ………कितनी अमीर हूँ मैं
क्या तुम हो ?