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मंगलवार, 17 नवंबर 2009

ज़िन्दगी के रंग कैसे- कैसे

उजासों की कतरन
सांसों की धड़कन
लम्हों की सिहरन
अरमानों की थिरकन
भोर की गुनगुन
ज़िन्दगी को जीवंत करती
सांझ का पतझड़
रात का खंडहर
अहसासों का अकाल
चेहरों का बांझपन
दिलों का सूनापन
रिश्तों का बेगानापन
प्रतीक्षित लम्हों का खोखलापन
ज़िन्दगी को मृत्युतुल्य बनाता
आह ! ज़िन्दगी
कब , कैसे
भोर की लालिमा से
सांझ की कालिमा बन जाती

15 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

ज़िन्दगी को जीवंत करती
यह लाइन पहले ही होती तो बहुत अच्छा लगता!

ज़िन्दगी की जीवंत करती
उजासों की कतरन
सांसों की धड़कन
लम्हों की सिहरन
अरमानों की थिरकन
भोर की गुनगुन

बहुत ही सुन्दर चित्रगीत लगाया है।
बधाई!

अजय कुमार ने कहा…

रोजमर्रा की जिन्दगी के अनुभवो का सार
प्रस्तुत कर दिया आपने

महफूज़ अली ने कहा…

ज़िन्दगी को मृत्युतुल्य बनाता
आह ! ज़िन्दगी
कब , कैसे
भोर की लालिमा से
सांझ की कालिमा बन जाती

yeh panktiyon...ne dil ko choo liya .....

bahut achchi lagi yeh kavita.....

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

आह ! ज़िन्दगी
कब , कैसे
भोर की लालिमा से
सांझ की कालिमा बन जाती

बहुत खूब !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इसी का नाम तो जीवन है ....
पल पल रंग बदलती है ........
कभी सुबह तो कभी रात होती है .....

अच्छी रचना है .........

Science Bloggers Association ने कहा…

जिंदगी के रंगों को आपने बहुत नजदीक से महसूस किया है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Mired Mirage ने कहा…

सुन्दर!
घुघूती बासूती

"अर्श" ने कहा…

raat ka khandahar./ aur chehare ka banjhaapan... dono ne tod ke rakh diyaa hai mujhe... khubsurat ehsaasaat ke saath rangi hai yah rachanaa... badhaayee


arsh

M VERMA ने कहा…

आह ! ज़िन्दगी
कब , कैसे
भोर की लालिमा से
सांझ की कालिमा बन जाती
ज़िन्दगी को बहुत करीब से निहारती भावपूर्ण रचना.

MANOJ KUMAR ने कहा…

चेहरों का बांझपन
ये प्रतीक बहुत अच्छा लगा। शायद भावहीनता से आपका मतलब है।

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

सच
ज़िंदगी के रंग अजब
और निराले होते हैं
कब , कैसे
भोर की लालिमा से
सांझ की कालिमा बन जाती है.
बहुत खूब लिखा है
वंदना जी आपने
- विजय

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

उजासों की कतरन
सांसों की धड़कन
लम्हों की सिहरन
अरमानों की थिरकन
बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति .

kshama ने कहा…

Ye to rango aur suron ka sansaar hai! Waah!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

aah zindagi.......marm ko gahra banati hai

सुमन“मीत” ने कहा…

COMPLETE PICTURE OF LIFE .
बहुत कुछ जो मन को छू गया