अनुमति जरूरी है

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

बुधवार, 2 दिसंबर 2009

यादों का सन्नाटा

यादों की सूनी
पगडण्डी पर
जो कदम पड़ा
दूर -दूर तक
एक सन्नाटा ही
बिखरा पड़ा था
कहीं सूखे
पत्तों के नीचे
यादों का मलबा
दबा हुआ था
तो कहीं
किसी शाख से लिपटी
कोई अधूरी - सी ,
बिखरी - सी याद
अपनी बेबसी पर
आंसू बहाती मिली
कोई याद वक्त के
शोलों में जलती मिली
तो कोई याद
मन के रसातल में
दबी-सिसकती मिली
मगर फिर भी
उनका सन्नाटा
उनकी सिसकियाँ
भी न तोड़ पायीं
न जाने कैसी
वो यादें थीं
और कैसा
घनघोर सन्नाटा था
शायद यादों के
अंतस का सन्नाटा था
जहाँ कभी कोई
दिया जला न पाया था
किसी चाँद की चांदनी
वहां तक कभी
पहुँच ही ना पाई थी
सिर्फ़ सन्नाटा
यादों को सीने से लगाये
उनके दर्द को,
उनके ज़ख्मों को
अपनी ख़ामोशी से
सहला रहा था

31 टिप्‍पणियां:

रंजू भाटिया ने कहा…

सिर्फ़ सन्नाटा
यादों को सीने से लगाये
उनके दर्द को,
उनके ज़ख्मों को
अपनी ख़ामोशी से
सहला रहा था

भावपूर्ण रचना पसंद आई .शुक्रिया

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

पत्तो के नीचे कही
यादो का मालवा दबा हुआ था
तो कही किसी साख से लिपटी को
कोई बिखरी सी अधूरी सी याद !
बहुत सुन्दर !

संगीता पुरी ने कहा…

सिर्फ़ सन्नाटा
यादों को सीने से लगाये
उनके दर्द को,
उनके ज़ख्मों को
अपनी ख़ामोशी से
सहला रहा था

बहुत सुंदर लगी यह रचना .. अच्‍छी प्रस्‍तुति !!

संजय भास्‍कर ने कहा…

सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

संजय भास्‍कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
Email- sanjay.kumar940@gmail.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सिर्फ़ सन्नाटा
यादों को सीने से लगाये
उनके दर्द को,
उनके ज़ख्मों को
अपनी ख़ामोशी से
सहला रहा था

वाह... बहुत खूव!
सन्नाटों में ही यादों को गले से लगाया जाता है!
बिल्कुल सही दिशा में तीर छोड़ा है!

मनोज कुमार ने कहा…

बेहतरीन। बधाई।

अनिल कान्त ने कहा…

सुन्दर और भावपूर्ण रचना

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

उनका सन्नाटा
उनकी सिसकियाँ
भी न तोड़ पायीं
न जाने कैसी
वो यादें थीं
और कैसा
घनघोर सन्नाटा था
शायद यादों के

यह पंक्तियाँ दिल के अन्दर तक उतर गयीं..... बेहद भावपूर्ण शब्दों के साथ ..... बहुत ही खूबसूरत रचना....

Yogesh Verma Swapn ने कहा…

सिर्फ़ सन्नाटा
यादों को सीने से लगाये
उनके दर्द को,
उनके ज़ख्मों को
अपनी ख़ामोशी से
सहला रहा था

vandana ji , bhavon ko bahut sunder shabdon se abhivyakt kiya hai.

Unknown ने कहा…

सुंदर रचना.

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

यादों के सन्नाटे में झांकना आसान नहीं होता
हर कोई हिमाकत भी नहीं करता।
--ब्लाग में आया तो ज़िन्दगी की राहें फूलों भरी दिखीं
कविताएं पढ़ीं तो दर्द से हैरान रह गया।

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

नि:शब्द अनुभूति

M VERMA ने कहा…

बिखरा पड़ा था
कहीं सूखे
पत्तों के नीचे
यादों का मलबा
दबा हुआ था
तो कहीं
किसी शाख से लिपटी
कोई अधूरी - सी ,
बिखरी - सी याद
बेहतरीन शब्द दिये है आपने अभिव्यक्ति के लिये.
'यादों का मलबा' वाह क्या कहने. और फिर इन यादो के मलबे से सुगन्ध भी तो उठती होगी.

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बेहतरीन भावपूर्ण अभिव्यक्ति!!

Arvind Mishra ने कहा…

ओह ! बहुत गहरी पीड़ा छुपाये एक कविता !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

दूर -दूर तक
एक सन्नाटा ही
बिखरा पड़ा था
कहीं सूखे
पत्तों के नीचे
यादों का मलबा
दबा हुआ था...

सच कहा है यादें अक्सर इंसान को खींच कर ले जाती हैं ..... सन्नाटे में जहा फिर उनके सिवा कोई हमसफ़र नही होता ... अच्छी रचना है ........

रश्मि प्रभा... ने कहा…

sannata......bahut kuch kah gaya,gahre bhawon ko tarasha hai

Dr. Amarjeet Kaunke ने कहा…

bahut hi umda kavita......

निर्मला कपिला ने कहा…

दूर -दूर तक
एक सन्नाटा ही
बिखरा पड़ा था
कहीं सूखे
पत्तों के नीचे
यादों का मलबा
दबा हुआ था...
बहुत भावनात्मक अभिव्यक्ति है शुभकामनायें

Urmi ने कहा…

बहुत ही सुंदर भाव और गहराई के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना सराहनीय है! बधाई!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 02-02 -20 12 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज...गम भुलाने के बहाने कुछ न कुछ पीते हैं सब .

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया।

सादर

vidya ने कहा…

बहुत बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

सस्नेह.

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत ही कोमल अहसासों को अभिव्यक्ति दी है वन्दना जी ! हर पंक्ति मन को छूती है और गहरे तक उतर जाती है ! आभार आपका !

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

vandna ji bahut hi komal aur bhavuk karnewali , marm ko chhuti rachna ki panktiyan .........sukriya

सदा ने कहा…

वाह ..बहुत ही बढि़या।

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

सु्न्दर ,गहरी भावाभिव्यक्ति

dinesh gautam ने कहा…

sundar bhavabhivyakti..

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…


कल 07/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

अनाम ने कहा…

सन्नाटे के भावों को बखूबी बयाँ करती रचना !!