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रविवार, 18 अक्तूबर 2009

बस एक बार ..................

तुम पुकार लो
एक बार
आवाज़ तो दो
मैं वक्त नही
जो वापस आ ना सकूं
मैं ख्वाब नही
जो फिर
देखा जा ना सकूं
तेरी इक आवाज़ पर
रस्मों के बंधन छोड़कर
रिवाजों की जंजीर तोड़कर
नदिया सी
उफनती ,मचलती
अपने सागर में समाने को
दौडी चली आउंगी
तुम एक बार पुकारो तो सही
दिल की कश्ती को
दरिया में उतारो तो सही
मैं वो लहर नही
जो वापस आ न सके
मैं वो डोर नही
जिसे तू सुलझा न सके
तेरे इक इशारे पर
तेरे गीतों के निर्मल धारे पर
पायल छनकाती
प्रीत का गीत गाती
तेरी सरगम की पुकारों पर
प्रेम रस बरसाती
इठलाती,बलखाती
आ जाउंगी
बस तुम एक बार
पुकारो तो सही
मुझे वापस
बुलाओ तो सही

38 टिप्‍पणियां:

Mishra Pankaj ने कहा…

तुम पुकार लो
एक बार
आवाज़ तो दो
मैं वक्त नही
जो वापस आ ना सकूं
मैं ख्वाब नही

sundar

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

PRANAM VANDAN JI.
AAPKO DEEP PARV KI HARDIK SHUBHKAAMNAIYEN !!

Kavita behterin hai par na jaane kyun mujhe prabhavit na kar saki (kshama karein)

haan magar
"प्रेम रस बरसाती
इठलाती,बलखाती
आ जाउंगी
बस तुम एक बार
पुकारो तो सही"
ye part accha ban pada hai...

:)

M VERMA ने कहा…

मैं वक्त नही
जो वापस आ ना सकूं
मैं ख्वाब नही
जो फिर
देखा जा ना सकूं
बहुत सुन्दर भाव -- शायद पगडंडिया फिर से वही आहट सुनना चाहती है.
बहुर खूब लिखा है

MANOJ KUMAR ने कहा…

गहरे संबंधों को उजागर करती अच्छी कविता।

पवन *चंदन* ने कहा…

ये एक बेहतरीन रचना है
शायद शुभमुहूर्त में लिखी गयी है
सच कितनी सहज और शालीन रचना है ये
कहना अतिशयोक्ति नहीं है
दीपावली की आपके पूरे परिवार को शुभकामनाओं की कामना के साथ

नगर धुएं से भरा, सांस हुई दुश्‍वार
बम पटाखे फुलझड़ी, मत फूंको मेरे यार

अबकी बार हमने आतिशबाजी को अलविदा कह दिया ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच में किसी की आवाज़ में, पुकार में बहुत दम होता है .......... सुन्दर रचना

अम्बरीश अम्बुज ने कहा…

आवाज़ तो दो
मैं वक्त नही
जो वापस आ ना सकूं

ham koi waqt nahi hain hamdam,
jab bulaoge chale aayenge...
bahut khoob..

शरद कोकास ने कहा…

पुकार जैसे आदिम विषय पर नये बिम्बों मे यह रचना है । एक गीत याद आता है " तुम पुकार लो तुम्हारा इंतेज़ार है " इस गीत मे जो तड़प थी उसका जवाब नहीं ।

समयचक्र - महेंद्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया रचना . दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये .

Suman ने कहा…

प्रेम रस बरसाती
इठलाती,बलखाती
आ जाउंगी
बस तुम एक बार
पुकारो तो सही
मुझे वापस
बुलाओ तो सही.nice

ढंढोरची ने कहा…

बहुत गहरे उतर कर लिखी गई है।बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

योगेश स्वप्न ने कहा…

wah kya baat hai......... ek purana geet yaad aa gaya.............tum pukaar lo, tumhara intzaar hai.........khwab chun rahi hai raat bejaraar hai.

bahut khoob.

"अर्श" ने कहा…

दिवाली की समस्त शुभकामनाएं पुरे परिवार को ...


अर्श

Dr. Amarjeet Kaunke ने कहा…

kaash koi aisa kahne par pukaar le.....

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

सुंदर.

vikram7 ने कहा…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

mehek ने कहा…

तेरे गीतों के निर्मल धारे पर
पायल छनकाती
प्रीत का गीत गाती
तेरी सरगम की पुकारों पर
प्रेम रस बरसाती
इठलाती,बलखाती
आ जाउंगी
vandana aapne dil khush kar diya,itani khubsurat nazm,waah,iski tunjhun mann mein baj uthi.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

तेरी सरगम की पुकारों पर
प्रेम रस बरसाती
इठलाती,बलखाती
आ जाउंगी
बस तुम एक बार
पुकारो तो सही
मुझे वापस
बुलाओ तो सही

सुन्दर पोस्ट है।

गोवर्धन-पूजा
और भइया-दूज की शुभकामनाएँ!

Udan Tashtari ने कहा…

जबरदस्त रचना.बैठ गई दिल में.

आनन्द वर्धन ओझा ने कहा…

दीप-पर्व की शुभकामनाएं !
'पुकार' की प्रतीक्षा की पीडा हृदय तक पहुंची. सुन्दर भावाभिव्यक्ति !!

Nirmla Kapila ने कहा…

तुम पुकार लो
एक बार
आवाज़ तो दो
मैं वक्त नही
जो वापस आ ना सकूं
मैं ख्वाब नह
वन्दना जी बहुत सुन्दर कविता है शुभकामनायें

Nagarjuna ने कहा…

vandanaa ji .....ati sundar bhaav hai...waah

satish kundan ने कहा…

bahut bhavpurn rachna....jahan samarpan aur sirf samarpan hi jhalakti hai.. bahut bahut badhai!!!!

राकेश कुमार ने कहा…

अद्भुत,अतिसुन्दर.लौकिक और अलौलिक प्यार की पराकाष्ठा को अनुभुत कराती आपके काव्य की हर पन्क्तिया जैसे शब्दहीन सा हो जाने को विवश करती है.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना.

जसबीर कालरवि - हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने कहा…

bandhna
bhut accha keh diya hai aapne
bhadhai

jasbirkalravihwg.blogspot.com

जसबीर कालरवि - हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने कहा…

sunder rachna

jasbirkalravihwg.blogspot.com

आशा ने कहा…

मैं वक्त नहीं जो बापिस आ न सकूं ----
बहुत सुन्दर प्रस्तुति |
आशा

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 22 -12 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज... क्या समझे ? नहीं समझे ? बुद्धू कहीं के ...!!

vidya ने कहा…

बहुत खूब वंदना जी...
बधाई...

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन।


सादर

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

वाह! बड़ी सुन्दर रचना....
सादर बधाई...

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति !!

Reena Maurya ने कहा…

behatarin rachana hai...

kumar ने कहा…

bas isi ek ishare ki hi to jrurat hoti hai.....

saadar

सदा ने कहा…

वाह ...बेहतरीन अभिव्‍यक्‍ित ।

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

बहुत सुन्दर !

दिलीप ने कहा…

sundar..asha hai jaldi bulaaya jaaye...