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मंगलवार, 15 सितंबर 2009

मौत भी उसकी मौत पर रोया करे

एक मौत,मर कर मरे , तो क्या मरे
आदमी है वो,जो हर पल, मर-मरकर जिया करे
मौत भी हार जाती है उसके आगे
जो ज़िन्दगी से मौत की ज़ंग लड़ा करे
मौत क्या मारेगी उस जीवट को
जो मौत को सामने देख हंसा करे
हो ज़िन्दगी ऐसी आदमी की
कि मौत भी ,उसकी मौत पर , रोया करे

कृपया मेरा नया ब्लॉग पढ़ें :
http://ekprayas-vandana.blogspot.com

26 टिप्‍पणियां:

STAFF ने कहा…

जेड़े वतन दे इश्क विच होन रंगे
रंग ओनां नूं नहीं कदे होर चढ़े
मौत मारे ना कदे वी बहादरां नूं
ते बुझदिल मौत तो पहला कई वार मरदे।
मैं तां सदके ओना जवानियां दे
जिन्हा मौत लेकर कालरा घलईयां ने
कुखंा विच जिन दे शेख पैंदे
जिता (आजादी) जितीया नाल कुबाZनियां ने।
आपकी कविता ने मंत्रमुगध कर दिया।
अच्छे लगेगा यदि आप ऐसी रचनांए मुझे प्रेशित करते रहो।
आभारी हूं आपका और आपकी लेखनी का।
Ramesh Sachdeva
hpsshergarh@gmail.com

ACHARYAJI KAHI ने कहा…

जेड़े वतन दे इश्क विच होन रंगे
रंग ओनां नूं नहीं कदे होर चढ़े
मौत मारे ना कदे वी बहादरां नूं
ते बुझदिल मौत तो पहला कई वार मरदे।
मैं तां सदके ओना जवानियां दे
जिन्हा मौत लेकर कालरा घलईयां ने
कुखंा विच जिन दे शेख पैंदे
जिता (आजादी) जितीया नाल कुबाZनियां ने।
आपकी कविता ने मंत्रमुगध कर दिया।
अच्छे लगेगा यदि आप ऐसी रचनांए मुझे प्रेशित करते रहो।
आभारी हूं आपका और आपकी लेखनी का।

ओम आर्य ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना....गहरे भाव ....उर्जा देती रचना

ओम आर्य ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना....गहरे भाव ....उर्जा देती रचना

मस्तानों का महक़मा ने कहा…

आपने बहुत ही सुंदर लिखा है....
मौत आपके जीवन के साथ कैसे जुड़ी हुई है इसका एहसास आपकी पंक्तियों में नज़र आता है।

Pankaj Mishra ने कहा…

अच्छा लगा आपका ये लेखनी

विपिन बिहारी गोयल ने कहा…

कविता बहुत ही अच्छा सन्देश देती है.प्रेरणादायक कविता के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें.

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

अच्छी रचना.. हैपी ब्लॉगिंग

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना ..........हार्दिक बधाई

दिगम्बर नासवा ने कहा…

SACH KAHA JO MOUT KO JEETA HAI USE KOUN MAAR SAKTA HAI .... MOUT BHI FEEKI HAI USKE SAAMNE .... AASHAA VAADI RACHNA.... LAJAWAAB LIKHA HAI

योगेश स्वप्न ने कहा…

bahut khoob vandana ji, jeena sikhati sarthak kavita , badhai.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

"एक मौत,मर कर मरे ,
तो क्या मरे
आदमी है वो,जो हर पल,
मर-मरकर जिया करे"

कवि की कल्पना को
तो वो ही भली-भाँति जान सकता है।

विचार तो आपका उत्तम है।

मगर मैं समझता हूँ कि -

मर-मर के जीने से तो
मर जाना ही बेहतर है।


बस लैपटॉप साथ है और सफर का
सदुपयोग कर रहा हूँ!

आपका नया ब्लॉग चिट्ठाजगत और
ब्लॉगवाणी में शामिल हो गया है।
बधाई!

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

kavita accha hai....

...dhanyavaad abki baar apne choti kavita prakashit ki...

...ja raha hoon aapka "Ek prayas" dekhne.

कमलेश शर्मा ने कहा…

Kya khub kha hai aapne. Badhai....Aapko. Lge rho......

M VERMA ने कहा…

सुन्दर रचना
प्रेरक रचना
आदमी है वो,जो हर पल, मर-मरकर जिया करे
वाकई जिन्दगी तो यही है

रश्मि प्रभा... ने कहा…

waah.....

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया !!

MUFLIS ने कहा…

waah !!
bahut hi achhee aur saarthak rachnaa
jivan-darshan ko prativimbit karti hui....sandesh se bharpoor

badhaaee

---MUFLIS---

राकेश कुमार ने कहा…

सुन्दर कल्पना, और सचमुच जब ऐसी मौत किसी इन्सान को मिलती होगी, जिसके अन्दर का हर जज्बा, अदम्य साहस और जीवटता मौत को भी हर कदम पर मात देने के लिये सन्घर्ष करती हो तो निश्चय ही मौत भी उसके हार को किसी विजय पथ पर खडे बहादुर की प्रतिमा की मानिन्द स्वीकारते हुये नमन करती होगी. और उन कायरो को एक प्रेरणा देती होगी जो बुजदिलो की भान्ति परिस्थितियो से लडने की बजाय आत्महत्या का रास्ता अख्तियार कर लेते है.

मौत क्या मारेगी उस जीवट को
जो मौत को सामने देख हंसा करे
हो ज़िन्दगी ऐसी आदमी की
कि मौत भी ,उसकी मौत पर , रोया करे

सचमुच निराशा के विशाल व्रिक्ष को चीर कर जो सतह पर सूरज की रोशनी बिखेरते है समय उन्हे नमन करता है और ऐसे महामानवो के शरीर से आत्मा का हरण करते हुये मौत भी निश्चय ही रूदन करती होगी.

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... bahut khoob !!!!

Babli ने कहा…

बहुत ही ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना दिल को छू गई!

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही सुंदर, भावपूर्ण और प्यारी रचना लिखा है आपने!ahut Barhia...aapka swagat hai...


http://sanjaybhaskar.blogspot.com

शरद कोकास ने कहा…

दुर्दम्य आशावाद है आपकी इस रचना मे

प्रीति टेलर ने कहा…

सही है ...

मानव मेहता ने कहा…

bahut sundar, bahut badiya.......
vandna ji kaafi achha likha hai aapne.......

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

jabardasht rachna , veer ras me oatpret aur sahaj tareeke se maanav ke man ke bheetar ki aag ko jagate hue..

mujhe ye rachna bahut pasand aayi vandana ..