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रविवार, 12 अप्रैल 2009

मत ढूंढो कविता इसमें

दिल से निकले उदगारों का नाम कविता है
मत बंधो इसे गद्य या पद्य में
मत ढूंढो इसमें छंदों को
जो भी दिल की हो आवाज़
उसी का नाम कविता है
क्यूँ ढूंढें हम छंदों को
जब छंद बसे हों दिल में
क्यूँ जाने हम गद्य को
जब हर लफ्ज़ में हों भाव भरे
मत रोको इन हवाओं को
जो किसी के मन में बह रही हैं
चाहे हों कविता रूपी
चाहे हों ग़ज़लों रूपी
या न भी हों मगर
साँस साँस की आवाज़ को
मत बांधो तुम पद्यों में
मत ढूंढो साहित्य इसमें
मत ढूंढो काव्य इसमें
ये तो दिलों की धड़कन हैं
जो भाव रूप में उभरी हैं
भावों में जीने वाले
क्या जाने काव्यात्मकता को
वो तो भावों को ही पीते हैं
और भावों में ही जीते हैं
बस भावाव्यक्ति के सहारे ही
दिल के दर्द को लिखते हैं
कभी पास जाओ उनके
तो जानोगे उनके दर्द को
कभी कुछ पल ठहरो
तो जानोगे उनकी गहराई को
वो तो इस महासमुद्र की
तलहटी में दबे वो रत्न हैं
जिन्हें न किसी ने देखा है
जिन्हें न किसी ने जाना है
अभी तुम क्या जानो
सागर की गहराई को
एक बार उतरो तो सही
फिर जानोगे इस आशनाई को
किसी के दिल के भावों को
मत तोड़ो व्यंग्य बाणों से
ये तो दिल की बातें हैं
दिलवाले ही समझते हैं
तुम मत ढूंढो कविता इसमें
तुम मत ढूंढो कविता इसमें............................

16 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा ने कहा…

बहुत सही,दिल की बातें दिलवाले ही समझते हैं
वाह ............

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

मत ढूढों दर्पण लेकर, कविता अन्तस् में रहती है,
अविरल धारा तो आँसू बन कर नयनों में बहती है।
भाव-भाव हैं, छन्द-शास्त्र के कभी रहे मुहताज नही,
सभी बादशाहों के दिल में, रह सकती मुमताज नही।
सागर की गहराई में जाकर ही मोती मिलते हैं,
काँटों की पहरेदारी में ही गुलाब खिलते हैं।
व्यंग बाण से घायल होकर, आह निकल जाती है,
गजल-गीत की रचना को, लेखनी फिसल जाती है।
दिलवालों की बाते दिलवाले ही जानें,
बेदिलवाले दिल का दर्द नही पहचानें।

SWAPN ने कहा…

kya baat hai!!!!! vandana ji main aapse 100% sahmat hun.bahut sahi aur spasht likha hai aapne.

raj ने कहा…

kabhi pass jao to janoge unke dardko.kabhi kuchh pal thahro..bohat badiya.

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

बहुत बेहतरीन कविता लिखी है आपने

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

तुम मत ढूंढो कविता इसमें.
वाकई शब्दों के साथ भावो का मिश्रण अर्थो के सागर में किसी सीप सा मालूम होता है. जो आपकी रचना को सार्थक करता है.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर ने कहा…

सुन्दर जी।
आभार्

हे प्रभु

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

कविता तो यूँ ही बहती है ..सुन्दर सही बात कही आपने इस कविता में ..

hempandey ने कहा…

'जो भी दिल की हो आवाज़
उसी का नाम कविता है '
-सुन्दर.

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

रचना बहुत अच्छी लगी,बधाई।
मैनें आप का ब्लाग देखा। बहुत अच्छा
लगा।आप मेरे ब्लाग पर आयें,यकीनन अच्छा
लगेगा और अपने विचार जरूर दें। प्लीज.....
हर रविवार को नई ग़ज़ल,गीत अपने तीनों
ब्लाग पर डालता हूँ। मुझे यकीन है कि आप
को जरूर पसंद आयेंगे....
- प्रसन्न वदन चतुर्वेदी

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

रचना बहुत अच्छी लगी,बधाई।
मैनें आप का ब्लाग देखा। बहुत अच्छा
लगा।आप मेरे ब्लाग पर आयें,यकीनन अच्छा
लगेगा और अपने विचार जरूर दें। प्लीज.....
हर रविवार को नई ग़ज़ल,गीत अपने तीनों
ब्लाग पर डालता हूँ। मुझे यकीन है कि आप
को जरूर पसंद आयेंगे....
- प्रसन्न वदन चतुर्वेदी

Navnit Nirav ने कहा…

aaj ka sunane walon ki sankhya kam ho rahi hai.Sabhi apni hi sunana chahte hai.Ab yah baat hum par nibhar karti hai ki hum un chand logon mein se kitne sahi logon ko chunte hain to hamari bhavnayein samajh sakein.
Navnit Nirav

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

मेरे दिल की बात कह दी।

Prem Farrukhabadi ने कहा…

Dear Vandana ji
bahut kuchh kah diya aapne, aapka andaaze bayan
kaabile tareef hai. badhai.

Science Bloggers Association ने कहा…

सही कहा आपने, इसमें तो धडकता हुआ जीवन है।

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खुशियों का विज्ञान-3
एक साइंटिस्‍ट का दुखद अंत

Roney ने कहा…

First few lines are impressive