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शनिवार, 11 अप्रैल 2009

अविरल प्रेम को जाना होता

तू कृष्ण बनकर जो आया होता
तो मुझमें ही राधा को पाया होता

कभी कृष्ण सी बंसी बजायी होती
तो मैं भी राधा सी दौडी आई होती

कभी कृष्ण सा प्रेमी बना होता
तो तुझमें ही राधा समायी होती

गर तूने कृष्ण को जाना होता
तो कब का राधा को पा लिया होता

इन अनन्य प्रेमियों की फेहरिस्त में
अपना नाम भी सजा लिया होता

अनन्य प्रेम में एक बार पगा होता
तो अविरल प्रेम को पा लिया होता

फिर वहां न मैं होती न तू होता
कृष्ण राधा सा स्वरुप पा लिया होता

12 टिप्‍पणियां:

SWAPN ने कहा…

fir wahan na main hoti na tu hota
krishna radha sa swaroop pa liya hota

wah kitne madhur bhav, vandana ji, aapki abhivyakti ko rachna ko naman.

प्रकाश बादल ने कहा…

बहुत खूब! जारी रहे।

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई स्वीकारें।

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

vandna ji
prem ko lekar likhi gayi ye gazal sundar aur yogeshwar krishn ke prem ko bhi pradarshit karti hai.
- vijay

श्यामल सुमन ने कहा…

प्रेम हमेशा अविरल होता कहते हैं सब लोग।
तभी टूटती डोर प्रेम की जब बनता है रोग।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

कृष्ण-कन्हैया, मजनू-राँझा,
मैं सब कुछ बन सकता हूँ।
युगों-युगों तक साथ तुम्हारे,
मैं सपने बुन सकता हूँ।।
किन्तु तुम्हें भी तो,
राधा-लैला जैसी बनना होगा।
मेरी परछाई बन कर ही,
साथ-साथ चलना होगा।

raj ने कहा…

fir waha na main hoti na tun hota...bohat khub kaha...

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

vandana ji ,

aaj achaak blog khola to dekha ,krushn ji ka naam hai . padha to man bheeg gaya .. krushn mere araadhya hai aur aapne unke aur radha ke prem ko bakhubi varnit kiya hai ..

aapki is kavita me ras hai , prem hai , jeevan hai , bhakti hai , aur ek viswaas bhi hai .

aapki is prastuthi ne bahut trupti di hai ji .. maine ye kavita apne saare pariwaar ko abhi dikhayi hai

sabne khoob pasand ki hai ..

aapko der saari badhai ..

regards
vijay

विनय ने कहा…

कृष्ण और राधा प्रेम की अनुभूति लिए यह रचना बेहद सुखद है

प्रीति टेलर ने कहा…

krishna aur radha ka pyar ek atrupt ant hi rahne ke bavjood amar ho gaya...kyonki pyaar ki paribhasha ko unhone bakhubi samja aur nibhaya bhi ...

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

वाह क्या बात है। सुन्दर भाव। प्रेम का हर भाव और रुप लिखकर ही मानेगी।

Prem Farrukhabadi ने कहा…

dear Vandana ji,
is pyar bhari rachna ki gahrai ko pranaam.aur aapko bhi. un haathon ko bhi ,us manko bhi.us vakt ko bhi jab yah rachna rachi gayi. dil se badhaai.