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शनिवार, 25 अप्रैल 2009

किसका दोष ?

पता नही चेहरे में दोष था या आईने में
सूरत बदली ही नज़र आई
रुख आईने का बदल बदल कर देखा
हर बार सूरत में भी फर्क पाया
ऐ यार , दोष किसका था , कैसे जानें
यहाँ तो रोज आईने भी बदल जाते हैं
और सूरत भी
कभी आइना सूरत सा लगा
और
कभी सूरत आईने सी लगी
हर सूरत आईने का ही प्रतिबिम्ब लगी
फिर कैसे ढूंढें वो अक्स
जो आईने सा न लगे
या फिर
कैसे ढूंढें वो आईना
जो सूरत सा न लगे

8 टिप्‍पणियां:

श्यामल सुमन ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति है।

हो आईने में सूरत या सूरत ही आईना हो।
पर आईना तो सच को सच ही कहा करेगा।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

ajay kumar jha ने कहा…

vandana jee, aaj pehlee baar hee aapko padhaa aur aapne kaafee prabhaavit kiya, bahut umdaa shailee aur lekhan hai, ab aataa rahungaa..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

कुछ सोना खोटा होता है, कुछ उसको गढ़ने वाला।
कुछ दर्पण झूठा होता है, सूरत को पढ़ने वाला।।
सच्चाई पाना चाहो तो, सच्चे दर्पण को लाओ।
ढूँढ भाल कर,देख परख कर,अच्छे दर्पण को लाओ।।
मन के जज्बातों को प्रकट करती सुन्दर रचना के लिए,
बधाई।

अनिल कान्त : ने कहा…

बहुत गहरी बात कर दी आपने

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

mehek ने कहा…

kiska dosh shayad samay ka jise aaine aur surat badalne ka shauk hai,gehre hav vyakti karti ek sunder rachana ke liye badhai.

SWAPN ने कहा…

vandana ji , dosh to waqt ka hi tha, varna
surat , surat si lagti, aaina , aaina sa.

sarahniya rachna.

raj ने कहा…

ayene me hai chehra ya chehre me ayena....pata nahi kon kise dekh raha hai....

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

बात तो तार्किक है !!!
- विजय