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शनिवार, 11 दिसंबर 2010

ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में मौसम नहीं बदला करते

ऊष्मा
कभी देह की
कभी साँसों  की
कभी बातों की
कभी नातों की
कभी भावो की
तो कभी 
शुष्क मौसमों की
बंजर भूमि में 
उगते कुछ 
सवालों की.......
झुलसा जाती है
हर नेह को
हर गेह को
हर देह को
और बचे 
रह जाते हैं 
राख़ के ढेर में 
कुछ तड़पते
सिसकते
काँटों की सी 
चुभन लिए
कुछ अल्फाज़ 
कुछ घाव
कुछ बिखरे- बिखरे
से अहसास
अपनी बेबसी पर
लाचार से 
आँसू बहाते
उम्र भर के 
तड़पने के लिए
जो इतना नहीं जानते
ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में 
मौसम नहीं बदला करते

47 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

सही बात है प्यार भरे दिल के मौसम तो कभी नही बदलते । वक्त की टीस दे जाते हैं। दिल को छू गयी रचना। शुभकामनायें।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में
मौसम नहीं बदला करते
bilkul sahi

शारदा अरोरा ने कहा…

उनके मौसम हैं उनके साथ , अपने मौसम भी तो उनके साथ साथ चला करते हैं ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

जो इतना नहीं जानते
ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में
मौसम नहीं बदला करते

बहुत गहन बात .....सुन्दर रचना ..

राजेश उत्‍साही ने कहा…

लेकिन लोग तो बदल जाते हैं।

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

एक भौगोलिक परिस्थिति को जीवन की हकीकत से जोड़ कर बहुत सुन्दर और नवीन बिम्ब की रचना की है आपने.. आपकी रचनात्मकता एक नई ऊंचाई ले रही है..

Apanatva ने कहा…

bahut gahree baat.........
sateek abhivykti .......
aabhar

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

क्रोध और हठ की ऊष्णता से प्रेम की गरमाहट पर आना है।

rafat ने कहा…

बहुत खूब मोहतरमा ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों से नए ख्याल के जरिये सुंदर और गहरी रचना से रूबरू कराने के लिए शुक्रिया .

dev ने कहा…

वंदना जी.......कितनी आसानी से , कितनी सहजता से आप दिल के गूढ़ भावों को व्यक्त कर लेती हैं.

आप मेरी बात कैसे जान लेती हैं.......आप की रचनाओं के बारे मैं कुछ कहना ....सीपियों से सागर को उलचने की बात है.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत ही जोरदार रचना एक नए अंदाज में .... सचमुच आपकी सोच कमाल की है ...आभार

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर रचना कही आप ने, धन्यवाद

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

प्रेम से उपजी ऊष्मा ठंडा नहीं पढ़ना चाहिए .. बहुत सुन्दर !

amit-nivedita ने कहा…

अत्यन्त ऊष्मा भरी रचना, असरदार अभिव्यक्ति

rashmi ravija ने कहा…

सच कहा है,
ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में
मौसम नहीं बदला करते
बढ़िया कविता

'उदय' ने कहा…

... bhaavpoorn rachanaa !!!

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

वंदना जीईईईईइ , इतनी अच्छी कविता कैसे लिख लेती हो .....................................................

बहुत अच्छा backdrop है कविता का ....

१० में से १० मार्क ...

विजय

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

वंदना जी,
आपके लिखने का अंदाज भावनाओं को प्राणवान कर देता है ! कविता पढ़ कर यही लिख सकता हूँ कि कविता बहुत अच्छी लगी मगर वास्तव में कविता कितनी अच्छी लगी इसे शब्दों में नहीं व्यक्त कर सकता! शब्द शायद असमर्थ हैं !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

संजय भास्कर ने कहा…

सच कहा है,
...मौसम नहीं बदला करते
ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बंज़र भूमि में उगते सवालों की ऊष्मा --अनुपम अभिव्यक्ति है दिल के दर्द की । कहाँ से लाती हैं आप ऐसे अहसास ।
सुन्दर रचना ।

shekhar suman ने कहा…

बहुत खूब वंदना जी....
मैंने अपना पुराना ब्लॉग खो दिया है..
कृपया मेरे नए ब्लॉग को फोलो करें... मेरा नया बसेरा.......

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

अत्यंत भावपूर्ण कविता, शुभकामनाएं.

रामराम.

Manav Mehta ने कहा…

vandna ji.......aapki kalam kammal ka likhtee hai....

ashish ने कहा…

अद्भुत अभिव्यक्ति क्षमता है आपके शब्दों में . बेहद प्रभावशाली रचना .

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में
मौसम नहीं बदला करते
खूब ..... बहुत अच्छी लगी रचना

shikha varshney ने कहा…

आखिरी २ पंक्तियाँ जैसे सागर की सी गहराई लिए हुए हैं..
बहुत उम्दा रचना.

Anjana (Gudia) ने कहा…

कितनी दर्द है इस कविता, बड़ी सुन्दरता से गहराई में लें गयीं पाठक को... वंदना जी, जहां का मौसम ना बदले वो जगह तो बदली जा सकती है... दर्द रहे दिल में तो रहा करे... बारिश में तो भीगा जा सकता है? पर अगर हम ही वो ज़मीन हैं तो जगह कैसे बदलेंगे...? क्या उसे नियति समझ स्वीकार लें?
बादल ना भी आये, पर अगर हम ठान लें तो अपने ही अंदर के भूमिगत जल से तो अपना मौसम बदल ही सकते हैं... माफ़ कीजिएगा... छोटी सी टिपण्णी लिखनी थी और आपके साथ आपकी कविता द्वारा प्रेरित ये सारे विचार बाँट लिये... विचारों की एक नयी डगर पे ले चलने के लिये शुक्रिया...

शिवम् मिश्रा ने कहा…


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - देखें - 'मूर्ख' को भारत सरकार सम्मानित करेगी - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

बवाल ने कहा…

एक बहुत ही प्यारी सी मीठी सी कविता लिखी है आपने वन्दना जी। बहुत ही उम्दा रब्त दिखलाया साहित्य से जुगराफ़िया का। बहुत ख़ूब।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

शानदार लेखन है आपका वंदना जी.

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

इसे रहस्यमयी कविता कहने को जी चाहता है| आधुनिक कविता को बखूबी अलंकृत किया है आपने| बधाई|

smshindi ने कहा…

वंदना जी अति सुन्दर रचना|

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

इस साहित्यिक रचना के लिए बहुत-बहुत बधाई!
यह कालजयी रचना है आपकी!

वीना ने कहा…

बहुत सुंदर रचना और दिल को छूने वाले भाव...वाकई मन को छू गई...मन के रिश्ते-नाते मौसम की तरह नहीं बदलते....

http://veenakesur.blogspot.com/

अनुपमा पाठक ने कहा…

सुन्दर कविता... गहन अभिव्यक्ति!

ajit gupta ने कहा…

अभी तो सर्दी का मौसम है, कहाँ है उष्‍मा? हा हा हाह ा। अच्‍छी रचना।

कुमार पलाश ने कहा…

वंदना जी प्रेम और संबंधों, रिश्तों और भावों का नया भूगोल बना रही है आपकी कविता..

मोहसिन ने कहा…

bahut hi sundar rachna.

सत्यम शिवम ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत रचना...मेरा ब्लागः"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com/ मेरी कविताएँ "हिन्दी साहित्य मंच" पर भी हर सोमवार, शुक्रवार प्रकाशित.....आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे......धन्यवाद

Akshita (Pakhi) ने कहा…

यह तो बहुत सुन्दर कविता है.
पाखी की दुनिया में भी आपका स्वागत है.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच कहा है ... उष्म प्रदेश गर्म ही रहता हैं ... जलते हुवे .. गहरे भाव लिए रचना है ...

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

बहुत सुन्दर पोस्ट.....बढ़िया सच बताऊँ तो ७-८ क्लास में पड़ा था ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेश....अब तो याद भी नहीं वो क्या होता था :-)

और हाँ मैंने एक मेल भेजी थी आपको आपने कोई जवाब नहीं दिया.....

Mired Mirage ने कहा…

सुंदर.
घुघूती बासूती

रचना दीक्षित ने कहा…

ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में
मौसम नहीं बदला करते
बहुत सुंदर रचना

Kailash C Sharma ने कहा…

ऊष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में
मौसम नहीं बदला करते..

बहुत सही कहा है...कोमल भावों से सजी बहुत ही मार्मिक रचना...बहुत ही उत्कृष्ट प्रस्तुति...आभार

Ankur jain ने कहा…

kya bat hai...kamal ki prastuti

अरविंद पाण्डेय:Aravind Pandey's blog : परावाणी ने कहा…

sundar rachana