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बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

मै ना बांटूँ श्याम आधा आधा

यूँ तो वो सबके हैं 
मगर केवल मेरे हैं
तभी कहता है इंसान 
जब पूरा उसमे डूब जाता है जैसे गोपियाँ …
तुम केवल मेरे हो ,
आँखों के कोटर मे बंद कर लूंगी श्याम 
पलकों के किवाड लगा दूंगी 
ना खुद कुछ देखूंगी 
ना तोहे देखन दूंगी 
ये मेरी प्रीत निराली है 
मैने भी तुझे बेडियाँ डाली हैं 
जैसे तूने मुझ पर अपना रंग डाला है 
अपनी मोहक छवि मे बांधा है 
अब ना कोई सूरत दिखती है 
सिर्फ़ तेरी मूरत दिखती है 
मेरी ये दशा जब तुमने बनायी है 
तो अब इसमे तुम्हें भी बंधना होगा 
सिर्फ़ मेरा ही बनना होगा ………सिर्फ़ मेरा ही बनना होगा 
अब ना चलेगा कोई बहाना 
ना कोई रुकमन ना कोई बाधा 
मुझे तो भाये श्याम सारा सारा 
मै ना बांटूँ श्याम आधा आधा 

28 टिप्‍पणियां:

RITU ने कहा…

श्याम को कौन बाँट सकता है ..
वो तो पूरे हैं , और सबके पास भी हैं..
सुन्दर मनमोहक कविता..
kalamdaan.blogspot.in

रश्मि प्रभा... ने कहा…

श्याम नहीं हैं आधा
तभी तो सबका मन राधा

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

:):) भक्ति के प्रेम में बसी सुंदर रचना ॥

mridula pradhan ने कहा…

bahut pyara bhaw.......

कुमार राधारमण ने कहा…

जैसे अर्जुन के लिए मछली की आंख,वैसे ही गोपियों के लिए केवल एक कृष्ण। लक्ष्य की प्राप्ति भी तब ही संभव!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 23-02-2012 को यहाँ भी है

..भावनाओं के पंख लगा ... तोड़ लाना चाँद नयी पुरानी हलचल में .

संध्या शर्मा ने कहा…

बहुत सुन्दर भक्ति रस में सराबोर रचना...
मैं ना बांटूं श्याम आधा-आधा...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

मनोहारी कविता... बहुत सुन्दर...
सादर.

shikha varshney ने कहा…

मत बांटिये जी, हम भी नहीं बाँटेंगे :).

इमरान अंसारी (عمران انصاری) ने कहा…

पूरा ही पूरा है वह उसे पा के ही कोई पूरा हो जाता है ।

kshama ने कहा…

Wah! Aur kya kahun?

Kailash Sharma ने कहा…

कौन बांटना चाहेगा प्यारे श्याम को किसी के साथ... बहुत भक्तिमयी प्रस्तुति...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पूरा श्याम हमारा है,
प्रिय संसार सँवारा है।

सदा ने कहा…

आप हमेशा बांटती हैं अपने विचारों से ... श्‍याम को ... अनुपम भाव लिए उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति

मेरे भाव ने कहा…

खूबसूरत कविता...

dheerendra ने कहा…

बहुत बढ़िया,बेहतरीन अनुपम अच्छी प्रस्तुति,.....बंदना जी, बधाई

MY NEW POST...काव्यान्जलि...आज के नेता...

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर
बेहतरीन प्रस्तुति:-)

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति

Gyan Darpan
..

शिवम् मिश्रा ने कहा…

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - आंखों पर हावी न होने पाए ब्लोगिंग - ब्लॉग बुलेटिन

vidya ने कहा…

श्याम की लीला निराली है...जिसने चाहा उसने ही पाया...वो भी पूरा पूरा...

मनभावन चाह...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर ...मन को छूती अभिव्यक्ति

Swati Vallabha Raj ने कहा…

aapne mere man ki baat kah di...bahut hi sundar rachna....

veerubhai ने कहा…

सुन्दर ,मनोहर ...बहुत खूब .श्याम रंग में रंगी चुनरिया ,अब रंग दूजो भावे न ,जिन नैनं में श्याम बसें हैं ,और दूसरो आवे न .तुम राधे बनों श्याम ....बहुत खूब रचना है आपकी समर्पण और अधिकार की मानिनी भाव की .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

श्याम को बांटना कहाँ संभव हुवा है ...
प्रेम की गहरी अनुभूति ...

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

prem ko baantna ashaya hota hai, chahe apne Shyam ko Rukmini se hi kyo na baantna ho...manbhaawan kavita, badhai.

कुश्वंश ने कहा…

खूबसूरत भावपूर्ण रचना, बधाई

Rachana ने कहा…

bhavpurn abhivyakti .prem bata nahi ja sakta
badhai
rachana

संगीता तोमर Sangeeta Tomar ने कहा…

बेहद सुंदर और भक्तिमय रचना.....