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सोमवार, 11 मार्च 2013

ओस में नहायी औरतें

ओस में भीगी औरत
औरत नही होती
होती है तो उस वक्त
सिर्फ़ एक नवांगना
तरुणाई मे अलसाई
कोई धवल धवल
चाँदनी की किरण
अपने प्रकाश से प्रकाशित करती
सृष्टि के स्पंदनों का
एक नव उपादानों का
सृजन करती हुयी
मगर क्षण भंगुरता है
उसका ये जीवन
ओस कितनी देर ठहरती है पत्तों पर
बस एक ताप ………और वाष्पित होना
उसकी नियति …………
मगर ओस में नहायी औरतें नहीं होतीं वाष्पित
गंध महकती है उनके पसीने से भी
वाष्पीकरण फ़ैला जाता है हवा में हर कण
ओस मे नहायी औरतों का …………
और बन जाता है इंद्रधनुष
बिना बारिश और बिना धूप के …………
ओस मे नहायी औरतों के इन्द्रधनुष उम्र भर महका करते हैं …………यादों में गुलाब बनकर

25 टिप्‍पणियां:

Shikha Gupta ने कहा…

बहुत सुंदर और कोमल भाव से उकेरी गयी रचना ...दिल हो छू गयी

Amrita Tanmay ने कहा…

जो गुलाब सबको महक से भर देता है..

Rajendra Kumar ने कहा…

बाहर ही सुन्दर भाव लिए बेहतरीन रचना,आभार.

कुश्वंश ने कहा…

स्त्री का कोमल स्वरुप बेहतरीन प्रस्तुत किया वंदना जी बधा

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

शिवनाथ कुमार ने कहा…

बहुत खूब ,,,सुन्दर सत्य

mridula pradhan ने कहा…

komal-komal si kavita......

Manav Mehta 'मन' ने कहा…

बेहतरीन

ज्योति खरे ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

shikha varshney ने कहा…

सुन्दर , बहुत सुन्दर.

Asha Saxena ने कहा…

बहुत गहरा सोच लिए कविता |
आशा

वाणी गीत ने कहा…

बहुत खूब !

दिनेश पारीक ने कहा…

बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
अर्ज सुनिये

आप मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

दिनेश पारीक ने कहा…

बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

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दिनेश पारीक ने कहा…

बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

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प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर और कोमल चित्रण..

दिनेश पारीक ने कहा…

बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

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Kalipad "Prasad" ने कहा…


कोमल भाव -बहुत सुन्दर प्रस्तुति
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दिगम्बर नासवा ने कहा…

ओस में नहाई औरतें ...
कोमल परन्तु आत्मविश्वास लिए इन औरतों को नमन ...

Aditi Poonam ने कहा…

बहुत सुंदर और कोमल भावाभिव्यक्ति ........
बधाई,वन्दना जी.....
साभार............

Aditi Poonam ने कहा…

बहुत सुंदर और कोमल भावाभिव्यक्ति ........
बधाई,वन्दना जी.....
साभार............

MANU PRAKASH TYAGI ने कहा…

भावपूर्ण

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

रचना दीक्षित ने कहा…

गहरी सोच, अनुपम भाव, सुंदर कविता. बढ़िया प्रस्तुति.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

:)