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गुरुवार, 6 अक्तूबर 2011

मोहब्बत जडाऊ नहीं होती

चाहती थी प्रीत बंजारन
के पांव में बिछुए पहनाना 
मोहब्बत के नगों से जड़कर
बनाना चाहती थी
एक नयी इबारत
एक नयी उम्मीद
एक नया अहसास
मोहब्बत के लिबास का
पर मोहब्बत ने कब
लिबास पहना है
कब  नग बन
किसी अहसास में उतरी है
मोहब्बत न तो कभी
बेपर्दा हुयी है
और न ही कभी
लिबास में ढकी है
मोहब्बत ने तो 
हर युग में
हर काल में
एक नयी इबारत गढ़ी है 
और हर रूह को छूती
हवा सी बही है
और बंजारे कब कहीं 
ठहरे हैं
फिर प्रीत बंजारन को
कैसे कोई छाँव मिलती
जो किसी नगीने सी 
किसी जेवर में जड़ी जाती 
शायद तभी
मोहब्बत जडाऊ नहीं होती .........

38 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ा सच।

कुमार राधारमण ने कहा…

बंजारों का जो जीवन है,अगर आम आदमी उसे मानसिक रूप से ही स्वीकार कर ले,तो इस लोक और उस लोक- दोनों के बीच मुहब्बत की कड़ी जुड़ सकती है।

Maheshwari kaneri ने कहा…

सही, सुन्दर...

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट रचना है --
शुक्रवार चर्चा-मंच पर |
शुभ विजया ||
http://charchamanch.blogspot.com/

Swarajya karun ने कहा…

दिल को छू लेने वाली सुंदर कविता. आभार. दशहरा बहुत-बहुत मुबारक .

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

मोहब्बत ने तो हर युग में
हर काल में
एक नयी इबारत गढ़ी है
और हर रूह को छूती
हवा सी बही है...

वाह! सुन्दर रचना....
विजयादशमी की सादर बधाइयां....

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बंजारे कब कहीं ठहरे हैं --सही कहा ।
दशहरे की शुभकामनायें ।

Dr Varsha Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर..हर पंक्ति ख़ूबसूरत..

विजयादशमी पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं।

संध्या शर्मा ने कहा…

शायद तभी
मोहब्बत जडाऊ नहीं होती ...
विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं...
सुन्दर सत्य,
मन को छू गई रचना..

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

हमेशा का बंजारा है मन जो कहीं टिकता नहीं ,
आपकी रचना एकदम खरी है !

NISHA MAHARANA ने कहा…

अतिसुन्दर।विजयादशमी पर आपको सपरिवार शुभकामनायें।

shikha varshney ने कहा…

प्यार को प्यार ही रहने दो......

PRAN SHARMA ने कहा…

UMDA RACHNA KE LIYE AAPKO BADHAAEE
AUR SHUBH KAMNA

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

behad shandaar rachna..aapko hardik badhayee..vijay dashmi ki dher sari shubhkamnaon ke sath

केवल राम : ने कहा…

प्यार को प्यार ही रहने दो तो बेहतर है .....!

Deepak Saini ने कहा…

विजयादशमी पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं।

मनोज कुमार ने कहा…

बड़ा ही नूतन प्रयोग किया है आपने इस कविता में।
विजयदशमी की शुभकामनाएं।

कुश्वंश ने कहा…

बेहतरीन काव्य ,विजय दशमी की शुभकामनाये

***Punam*** ने कहा…

मोहब्बत जडाऊ नहीं होती...
वह खुद ही चमकती है...
किसी गहने की ज़रुरत नहीं होती....!!
खूबसूरत रचना ...!!

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति । धन्यवाद .

Babli ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा है आपने! लाजवाब प्रस्तुती!
आपको एवं आपके परिवार को दशहरे की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा…

सार्थक बहुत खूब बधाई हो आपको वंदना जी
आप सभी को दीपोत्सव(दीपावली) की अग्रिम शुभकामनाएं....
सभी मित्रों से अनुरोध है की अब मेरा ब्लाग फेसबुक पर भी है कृपया जरुर अनुसरण करे अगर आपको मेरा ब्लाग पसंद हो तो जरुर लाइक करें(फालो मी)लिंक नीचे है
मित्र-मधुर परिवार
MADHUR VAANI
MITRA-MADHUR

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

उत्कृष्ट रचना है

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

wakai mohabbat jadau nahi hoti..aapki is behtarin kriti ko naman aaur iske srijankarta ko dher sari badhayiyan,,sadar pranam ke sath

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'और बंजारे कब कहीं ठहरे हैं '
............सुन्दर,भावपूर्ण प्रस्तुति

वाणी गीत ने कहा…

फिर प्रीत बंजारन को कैसे छाँव मिलती , मुहब्बत जो जडाऊ नहीं होती ...
बहुत सुन्दर !

Suman ने कहा…

बहुत सुंदर रचना !

इमरान अंसारी ने कहा…

बहुत खूब शानदार लगी पोस्ट|

Manish Kr. Khedawat " मनसा " ने कहा…

मोहब्बत न तो कभी बेपर्दा हुयी है
और न ही कभी लिबास में ढकी है

बहुत सुंदर ! आकर अच्छा लगा !

____________________________
किसे जलाये - रावण को या राम को ???

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…

सर्वप्रथम विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनायें…भावपूर्ण प्रस्तुति के लिये बहुत बहुत बधाई……

Pallavi ने कहा…

Pyar aatma ki parchhai hai
Ishq ishwar ki ibadat
aur Mohabbat zindagi ka maksad....शायद यह लोग समझ जाएँ तो शायद पूरी दुनिया में सिर्फ प्यार ही प्यार हो तब कहा जासकता है की हर दिल रूपी आभूषण में मोहब्बत जड़ाऊ हो सकती है :)

mridula pradhan ने कहा…

mohbbat jadau nahin hoti.....wah,bahut achchi hai apki soch.

PRIYANKA RATHORE ने कहा…

bahut khoobsurat ahsas....aabhar

Amrita Tanmay ने कहा…

चुभता सा सच ... आह...

रचना दीक्षित ने कहा…

शायद तभी
मोहब्बत जडाऊ नहीं होती ...

बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति.

mahendra verma ने कहा…

मोहब्बत ने एक नई इबारत गढ़ी है...
कविता के भाव बहुत अच्छे लगे।

sidheshwer ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति !

ZEAL ने कहा…

सुन्दर बिम्ब के साथ उत्कृष्ट कविता।