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शनिवार, 17 सितंबर 2011

बताओ तो अब सुलगने को क्या बचा ?

एक हसरत के पाँव में
जैसे किसी ने आरजुओं के
घुंघरुओं को बांधा हो
उम्र के लिहाज को
जैसे किसी ने
उच्छंखरल नदी में डाला हो
रिश्ते की करवट ने
जैसे चाँद दिन में निकाला हो
मोहब्बत के चेनाब में
जैसे पक्का घड़ा उतारा हो
कुछ ऐसे मोहब्बत का धुआँ
मेरी रूह में पैबस्त हो गया है
बताओ तो अब सुलगने को क्या बचा ?

34 टिप्‍पणियां:

सदा ने कहा…

नि:शब्‍द करती अभिव्‍यक्ति ...बहुत खूब ।

Roshi ने कहा…

bahut sunder bhav ............

Roshi ने कहा…

bahut sunder bhav ...........

pragya ने कहा…

बहुत ही ख़ूबसूरत...मुस्कान आ गई पंक्तियाँ पढ़कर...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

फिर भी जीवन में कुछ तो है, हम थकने से रह जाते हैं।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये आंच उम्र भर सुलगती रहेगी ...
गहरा लिखा है बहुत ही ...

इमरान अंसारी ने कहा…

बहुत सुन्दर......कुछ नए लफ्ज़ .......मुहब्बत का धुंआ.......वाह .........हमारे ब्लॉग पर भी तशरीफ़ लाये वंदना जी |

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्रवीण जी की बात से सहमत ..कुछ तो है अभी :):) सुन्दर अभिव्यक्ति

डॉ टी एस दराल ने कहा…

मोहब्बत का धुआं रूह में बसा रहे , और क्या चाहिए ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना.

रामराम.

दर्शन कौर ने कहा…

चंद आंसू नहीं रहे खुद पे बहाने के लिए .....वाह !

सागर ने कहा…

behtreen rachna....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Kailash C Sharma ने कहा…

मोहब्बत के चेनाब में
जैसे पक्का घड़ा उतारा हो

....जब पक्का घड़ा साथ हो तो मोहब्बत का चेनाब पार हो ही जाएगा...बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

रविकर ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||

आपको हमारी ओर से

सादर बधाई ||

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर ..

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन।


सादर

कुश्वंश ने कहा…

बेहतरीन..बेहतरीन निःसंदेह बेहतरीन कविता से नवाज़ा है आपने इस ब्लॉगजगत को आपकी काव्यधारा को निरंतर प्रवाह मिले शुभकामनाये

सुनीता शानू ने कहा…

चर्चा में आज नई पुरानी हलचल

रचना दीक्षित ने कहा…

बताओ तो अब सुलगाने को बचा क्या है?

बहुत सुंदर रचना. सुंदर अभिव्यक्ति. इस जीवन के रहस्य को समझना आसान नहीं.

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

गज़ब की आग दिख रही है..!

mahendra verma ने कहा…

@बताओ तो अब सुलगने को क्या बचा

अनुपम भावों की उत्कृष्ट प्रस्तुति।

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत ही ख़ूबसूरत..

मनोज कुमार ने कहा…

रचना में कुछ ऐसा है जो सोचने को विवश करता है।

Dr Varsha Singh ने कहा…

मोहब्बत के चेनाब में
जैसे पक्का घड़ा उतारा हो
कुछ ऐसे मोहब्बत का धुआँ
मेरी रूह में पैबस्त हो गया है

बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

शब्दों और भावों का बेजोड़ संगम.

अरूण साथी ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति,भावपूर्ण.

आभार

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

.....मोहब्बत के चेनाब में
जैसे पक्का घड़ा उतारा हो
कुछ ऐसे मोहब्बत का धुआँ....

जाने कैसी कशिश है इस नज़्म में....
जाने क्यूँ पढ़ते हुए अमृता प्रीतम जी याद आती रहीं....
बहुत प्रभावी, बाँध ले रही है पंक्तियाँ...
सादर बधाई....

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) ने कहा…

मन को छू गई आपकी रचना.

Suman ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ! आती रहूंगी
आभार आपका ....

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बेहतरीन कविता ... सुन्दर भावाभिव्यक्ति !

Pallavi ने कहा…

बेहतरीन रचना..... सभी ने इतना कुछ लिख दिया है आपकी इस पोस्ट पर की अब नया कुछ कहने को रहा ही नहीं... :)

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सहज अभिव्यक्ति प्रवाहमय सुन्दर रचना....

Anil Avtaar ने कहा…

आपको मेरी तरफ से नवरात्री की ढेरों शुभकामनाएं.. माता सबों को खुश और आबाद रखे..
जय माता दी..