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शनिवार, 24 सितंबर 2011

आ मेरी चाँदनी








आ मेरी चाँदनी 

तुझे कौन से 

दामन मे सहेजूँ

कैसे तेरी राहो को
रौशन करूँ
कौन से नव 
पल्लव खिलाऊँ
जो तू मुस्काये तो
मै मुस्काऊँ
ये जग मुस्काये
हर कली खिल जाये
चाँद की चाँदनी भी
तुझसे रश्क खाये

 आ मेरी चांदनी 
तुझे ऐसे संवारूं
जो तू चले तो 
हवाये चले
जो तू रुके तो
वक्त थम जाये
तेरी इक जुम्बिश पर
ये जहाँ हिल जाये
आ मेरी चाँदनी
तुझे सीने मे बसा लूँ
और एक नया जहाँ बसा लूँ
जिसमे तू ऐसे सिमट जाये
कि हर आंगन महक जाये







आ मेरी चाँदनी 

इक दीप जलाऊँ

जिसकी रौशनी में

हर आँगन महक जाये
घर घर गूंजे किलकारी
खिले हर बगिया न्यारी
तू हर घर में महक जाये
तेरी खुशबू यूँ बिखर जाये
हर आँगन में तुझसी 
इक कली खिल जाये 

आ मेरी चाँदनी 
तुझे पलकों में सजाऊँ
तुझे तेरा हक़ दिलाऊँ
और इस जहाँ को 
इक आईना दिखाऊँ
तुझे ऐसे बुलंद करूँ
कि आसमाँ भी छोटा पड़ जाये
और तेरा सितारा 
जहाँ में रोशन हो जाये
आ मेरी चाँदनी
तुझ पर हर ख़ुशी मैं लुटाऊँ 
और तेरी बुलंदियों को 
आसमाँ पे सजाऊँ

34 टिप्‍पणियां:

mridula pradhan ने कहा…

aa meri chandni......swagat hai tumhara......

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चन्दा की चाँदनी।

kshama ने कहा…

Bahut hee sundar rachana!

***Punam*** ने कहा…

चांदनी के साथ नई जिन्दगी का आवाहन....!!

Suresh kumar ने कहा…

वंदना जी बहुत ही सुन्दर कविता लिखी है आपने धन्यवाद् |

Rajesh Kumari ने कहा…

kanya divas par bahut bahut pyaari rachna.bahut pyaari tasveeren.

Unknown ने कहा…

चांदनी में भींगी रचना

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

ZEAL ने कहा…

A great creation on this particular day.

Maheshwari kaneri ने कहा…

वाह ...बहुत ही कोमल भावो को खूबसूरती दी है आपने ...सुन्दर...

रविकर ने कहा…

हर आंगन महक जाये ||

सुन्दर प्रस्तुति पर बधाई ||

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बेटियाँ चांदनी जैसी ही ठंडक देती हैं ..सुन्दर भावपूर्ण रचना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

मनोज कुमार ने कहा…

इस कविता द्वारा प्रेषित भावना मन को भावविह्वल करती हैं।

sushmaa kumarri ने कहा…

हुत ही खुबसूरत भावाभिवय्क्ति.....

sushmaa kumarri ने कहा…

बहुत ही सुन्दर भावाभिवय्क्ति.....

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत सुंदर भावप्रवण रचना. ममतामयी जज़्बात. बहुत बहुत बधाई सुंदर कविता प्रस्तुत करने के लिये.

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

khubsurt chandni ki chamak ....maasum muskaan ...

महेन्‍द्र वर्मा ने कहा…

तुझे ऐसे बुलंद करूं
कि आसमां भी छोटा पड़ जाए

चांदनी के लिए कोमल कामनाओं से युक्त यह कविता भाव विभोर करने वाली है।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत सुन्दर भावमयी रचना....
पुत्री दिवस की सादर बधाईयाँ....

Dr Varsha Singh ने कहा…

बेहतरीन रचना....

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बेहतरीन रचना.

रामराम.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बेहतरीन रचना.

रामराम.

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

बाई गॉड, वेरी क्‍यूट।

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मनुष्‍य के लिए खतरा।
...खींच लो जुबान उसकी।

कुमार राधारमण ने कहा…

बच्चों का सान्निध्य ही बड़ों का स्वर्णकाल है।

संध्या शर्मा ने कहा…

ऐसा लगता है, इस रचना में आपने अपना पूरा प्यार, दुलार, लाड़ और आशीष उड़ेल दिया है.. सुन्दर भावपूर्ण रचना...

अनाम ने कहा…

सुन्दर पोस्ट और तस्वीरे भी बड़ी प्यारी हैं|

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुती।

ashokbajajcg.com ने कहा…

सुन्दर कविता .

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बहुत सुंदर रचना.
आपको नवरात्रि की ढेरों शुभकामनायें.

Dev ने कहा…

behad khoobsoorat rachna