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सोमवार, 29 नवंबर 2010

मेरे सपनो का शहर

अनंत यात्राओं की 
अंतहीन पगडंडियों
पर चलते चलते 
जब कभी थक जाती हूँ 
तब कुछ पल 
जीना चाहती हूँ
सिर्फ तुम्हारे साथ
तुम्हारी आशाओं 
अपेक्षाओं और 
अपनी चाहतों के साथ
जहाँ मेरी हर चाहत
परवान चढ़ सके 
और तुम्हारे वजूद का
हिस्सा बन सके 
जहाँ तुम्हारे ह्रदय के
हर गली कूचे पर
सिर्फ मेरा नाम लिखा हो 
हर मोड़ पर 
मेरा बुत खड़ा हो
जिसके हर घर में 
तुम्हारी मुस्कराहट 
तैर रही हो और 
मेरे पाँव थिरक रहे हों 
तुम्हारी प्रेममयी झंकार पर
जहाँ एक ऐसा आशियाना हो 
जिसमे सिर्फ तुम्हारा 
और मेरा वजूद
अपना वजूद पा रहा हो 
और कभी हम किसी 
भीड़ के रेले में 
चुपचाप हाथों में हाथ डाले
चल  रहे हों और
इक दूजे की धडकनें
सुन रहे हों
बस कुछ पल 
इसी सुकून के 
जीना चाहती हूँ
जिसे तुमने 
मेरा नाम दिया है
और मेरे अस्तित्व का
प्रमाण दिया है
उसी अपने घर में 
रहना चाहती हूँ
जानते हो ना 
कौन सी है वो जगह
 वो है तुम्हारा ह्रदय
मेरे सपनो का शहर

47 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

sapno ke is shahar ke her mod per tumhara wajood ho , tabhi to wo mera hoga .....
kuch rachnayen mann me ghar bana leti hain

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रेममयी अभिव्यक्ति, पते वाली।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

रचना बहुत ही सुन्दर है ..

रचना दीक्षित ने कहा…

जिस शहर में इतना प्यार बसा हो वहां से कोई निकलना भी चाहें तो नहीं निकल सकता कुछ शक्तियां हैं जो बांध कर रखती हैं

अरविन्द जांगिड ने कहा…

सपनों के घर में खुद का वजूद अर्पित कर दिया है आपने, सुन्दर रचना के लिए आपका धन्यवाद.

Kailash C Sharma ने कहा…

प्रेम से परिपूर्ण एक अप्रतिम प्रस्तुति..भावनाओं का सागर अंतर्मन को पूरी तरह भिगो देता है..आभार

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, शुभकामनाएं.

रामराम.

नरेन्द्र व्यास ने कहा…

wah vandna dee ! sapno ke shahr me bhee 'uske' wajood kee kalpana bina samarpan ke kahaan? aapka 'uske' prati samarpan aur abhivyakti kee tarangon par sawar saptrangee bhavon ka ye shahar..wakai dil ko choo gaya.. badhai aur sadhuwad aapka ! naman !

shikha varshney ने कहा…

वाह क्या लाजबाब घर ढूंढा है .बहुत सुन्दर.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्रेम से परिपूर्ण बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
खूबसूरत लगा आपके सपनो का शहर...जिसे शब्दों से देखा गया ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी इस रचना का लिंक मंगलवार 30 -11-2010
को दिया गया है .
कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

M VERMA ने कहा…

मोहक और भाव अभिरंजित रचना
सुन्दर

केवल राम ने कहा…

तुम्हारी मुस्कराहट
तैर रही हो और
मेरे पाँव थिरक रहे हों
तुम्हारी प्रेममयी झंकार पर
प्रेममय आभिव्यक्ति ...प्रेम का चरम सोपान इन शब्दों में सामने आया है ...शुक्रिया
चलते -चलते पर आपका स्वागत है

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

प्रेम में डूबी एक सुंदर हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति .....

deepak saini ने कहा…

प्रेम से परिपूर्ण रचना
अति सुन्दर

सुमन'मीत' ने कहा…

जानते हो ना
कौन सी है वो जगह
वो है तुम्हारा ह्रदय
मेरे सपनो का शहर

wah wah vandana ji..........bahut hi sundar .very touching

'उदय' ने कहा…

... behatreen ... shaandaar rachanaa !!!

shikha kaushik ने कहा…

bahut bhavbhari prastuti.shukamnaye .kabhi mere blog ''vikhyat ''par bhi aaye .

shikha kaushik ने कहा…

bahut bhavbhari prastuti.shukamnaye .kabhi mere blog ''vikhyat ''par bhi aaye .

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

ह्रदय में सपनो का घर.. अदभुद सोच.. अदभुद अभिव्यक्ति.. बहुत सुन्दर.. मैं तो सोचता रह जाता हूँ प्रेम की उंचाई को..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

जी हाँ!
आपने बहुत सुन्दर रचनाकारी की है!
--
हृदय ही तो है जो रोजृरोज नई पोस्ट लिखवा देता है♥

निर्मला कपिला ने कहा…

आना मेरी रूह के शहर--- मेरी भी कविता है। सुन्दर रचना बधाई।

singhsdm ने कहा…

पूरी कविता प्रेम के शाश्वत रूप को अभिव्यक्त करती है ...... ऐसी रचना के लिए आप निश्चित ही बधाई की पात्र हैं...!!!!

abhi ने कहा…

ऐसे सपनो के शहर कितनो ने बसाने का सोचा होगा, लेकिन सपने सच होते भी है या नहीं, किसे पता..
बहुत बहुत खूबसूरत..प्यारी सी कविता..

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

प्रेम को मखमली अंदाज में परिभाषित करती हुई आपकी कविता हृदय-स्पंदन को झंकृत करती है !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

बहुत सुन्दर अहसास हैं आपके....सपनो की नगरी में तो सब कुछ मिलता है जो आपको पसंद हो.....बहुत खूब|

धीरेन्द्र सिंह ने कहा…

कविता की अंतिम पंक्ति पर आकर तंद्रा टूटी। आरम्भ में ही कविता मुझे एक दूसरी दुनिया में उठा ले गई तथा अंतिम पंक्ति ने यथार्थ में ला खड़ा किया। कुछ स्वप्निल, कुछ यथार्थ के बयार में एक सुखद यात्रा का अनुभव कराने के लिए धन्यवाद।

क्षितिजा .... ने कहा…

बहुत खूब वंदना जी ... आखरी पंक्तियाँ कमाल की हैं ...

शोभना चौरे ने कहा…

achi abhivykti

S.M.HABIB ने कहा…

सुन्दर रचना... गहरे एहसासात.... आभार.

अर्चना तिवारी ने कहा…

बहुत सुंदर रचना...प्रेम को समर्पित भाव

शिक्षामित्र ने कहा…

प्रेम स्वतः समर्पण का नाम है। जिसने यह किया,वह स्वयं ही प्रेममय है। कुछ अन्य महिला ब्लॉगरों की हताशा,निराशा,परपीड़क प्रवृत्ति और कुंठा के बीच,राहत देने वाली कविता।

zindagi-uniquewoman.blogspot.com ने कहा…

bahut hi sundar manobhavo se rachit kavita...very nice...

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

प्रेम में एक अकेला/अकेली हृदय संपूर्ण नगर सदृश्‍य लगे, वाह, इस बिम्‍ब के लिये आभार.

तदात्मानं सृजाम्यहम् ने कहा…

वंदना जी, आप तो लिखती ही संगीत की तरह हो। यह संगीत भी आपकी मोहक मुस्कान से उतरा चला आता है। हर रचना बेहतरीन है। बस कारवां बनाते रहिए।

POOJA... ने कहा…

ह्रदय... सपनों का शहर... वाह... कितनी प्यारी कल्पना है...
कितना प्यार है...

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, शुभकामनाएं.

"अभियान भारतीय" ने कहा…

वाह...
लाजवाब...
हमेशा की तरह बेहद सुन्दर प्रस्तुति...
बधाई स्वीकार करें |

ZEAL ने कहा…

प्रेम से ओत-प्रोत , मनभावन प्रस्तुति ।

अनुपमा पाठक ने कहा…

प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति!

dev ने कहा…

तुम ही तुम, तुम ही तुम , तुम ही तुम , तुम ही तुम

जिधर देखूं, जहाँ जाऊं....

आप अपनी रचनाओं को प्रकाशित करवाइए....बहुत लोग इस प्रेम दीवानी से वंचित हैं. सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई....

संजय भास्कर ने कहा…

......बहुत खूब लिखा है
प्रेम से परिपूर्ण रचना

वाणी गीत ने कहा…

तुम्हारा ह्रदय ...मेरा सपनों का शहर ...
एहसासों से लबरेज खूबसूरत कविता !

Babli ने कहा…

ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना जिसके बारे में जितना भी कहा जाए कम है! लाजवाब प्रस्तुती!

Harshad mehta ने कहा…

Deep rooted feelings expressed so well!

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

.............उसी अपने घर में
रहना चाहती हूँ
जानते हो ना
कौन सी है वो जगह
वो है तुम्हारा ह्रदय
मेरे सपनो का शहर...........

itna accha accha likhongi to kaisa honga ji .... hamko dukaan band karni hongi apni kavitao ki ...

badhai dil se . aur likho behtar likho isse bhi accha likho , yahi dua hai meri

vijay