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गुरुवार, 18 नवंबर 2010

शायद मोहब्बत का भरम टूट जाए

आज तुम
बहुत याद आये
क्युं ?
नहीं जानती 
शायद 
तुमने पुकारा मुझे
तेरी हर सदा 
पहुँच  रही है 
मन के
आँगन तक 
और मैं
भीग रही हूँ 
अपने ही खींचे 
दायरे की 
लक्ष्मण रेखा में 
जानती हूँ
तड़प उधर भी 
कम नहीं
कितना तू भी
बेचैन होगा
बादलों सा 
सावन बरस 
रहा होगा
मगर ना 
जाने क्यूँ
नहीं तोड़
पा रही
मर्यादा के 
पिंजर को 
जिसमे दो रूहें 
कैद हैं 
 तेरी खामोश 
सदायें 
जब भी 
दस्तक देती हैं
दिल के 
बंद दरवाज़े पर
अन्दर सिसकता 
दिल और तड़प
जाता है 
मगर तोड़ 
नहीं पाता
अपने बनाये 
बाँधों को 
ये क्या किया 
तूने
किस पत्थर 
से दिल 
लगा बैठा
चाहे सिसकते 
सिसकते 
दम तोड़ दें
मगर 
कुछ पत्थर 
कभी नहीं
पिघलते
मैं शायद
ऐसा ही 
पत्थर बन 
गयी हूँ
बस तू 
इतना कर
मुझे याद 
करना छोड़ दे
शायद 
मोहब्बत का 
भरम टूट जाए 
और कुछ पल
सुकून के
तू भी जी जाए 

41 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

भ्रम में जीना भी अच्छा , सुंदर रचना

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आपकी रचनाओं में जो व्यक्त-तड़प रहती है, उसे पढ़कर बहुत के मन भाव सम हो जाते होंगे। इस महत कार्य का आभार।

Shekhar Suman ने कहा…

माफ़ कीजिये वंदना जी लेकिन आपकी कविता लिखने का ढंग कभी कभी अजीब लगता है, एक एक शब्द एक पंक्ति में लिखने से कविता थोड़ी बोझिल सी हो जाती है | अगर पूरा एक वाक्य एक पंक्ति में लिखा जाये और " क्यूँ, शायद, और " जैसे शब्द अगर एक पंक्ति में हो तो आपकी कविता निश्चित रूप से और अच्छी लगेगी पढने में ... उम्मीद है आप समझेंगी मेरी बात को...
आपकी कविता के भाव निश्चित रूप से अच्छे होते हैं लेकिन उनकी अभिव्यक्ति और सुन्दर बन सकती है....

अनुभूति ...

Swarajya karun ने कहा…

फूलों की तरह नाज़ुक सम्वेदनाओं की हृदयस्पर्शी कविता.आभार. बहुत-बहुत शुभकामनाएं.

'उदय' ने कहा…

... bahut sundar !!!

deepak saini ने कहा…

मोहब्बत का भरम टूट जाये
बहुत सुन्दर कविता है
मोहब्बत एक भ्रम ही तो है

Sagar ने कहा…

आपकी प्रतिक्रिया के प्रतीक्षा में एक विरह वेदना "मेरी प्यारी सखी तेरे विरह कि पाती"

http://svatantravichar.blogspot.com/2010/11/blog-post_17.html

Sagar ने कहा…

Bahut badhiya..

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

प्रेम के कितने आयाम जानती हैं आप सोच कर विस्मित हो जाता हूँ.. ... विलक्षण कविता!

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

ये भ्रम जिन्दगी में अगर पाल लिया तो टूटता नहीं है, फिर चाहे पत्थर से ही क्यों न सिर फोड़ते रहें. उसमें ही सुख मिलता है उनको. वो भ्रम उनके जीने का एक सहारा होता है की शायद कभी...................
बहुत सुंदर शब्दों में भावों को सजाया है.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

संवेदनाओं में डूब कर लिखी ... दिल की तड़प को गहरे से महसूस किया ही जैसे ... बहुत ही लाजवाब .

अरविन्द जांगिड ने कहा…

"मुझे याद
करना छोड़ दे
शायद
मोहब्बत का
भरम टूट जाए"

सुन्दर अभिव्यक्ति.....लेकिन ये भरम टूटता भी तो नहीं है.
साधुवाद.

राजकुमार सोनी ने कहा…

जब तक भ्रम है शायद तब तक हम है
रचना बहुत शानदार बन पड़ी है

Anupriya ने कहा…

vandna jee, bahot achchi panktiyan hai...itna dard kyo dikhta hai aapki rachnao me?

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बस तू
इतना कर
मुझे याद
करना छोड़ दे
शायद
मोहब्बत का
भरम टूट जाए

खूबसूरत अभिव्यक्ति ...कल ही तो लिखा था कि हकीकत में जीती हो फिर भ्रम क्यों ..:):):)

ज़मीर ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना. मेरे ने ब्लाग में आप सभी का स्वागत है.

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना, वंदना जी !

shikha varshney ने कहा…

क्या बात है आज तड़प झलक रही है कविता में.भावपूर्ण कविता.

ZEAL ने कहा…

.

कभी कभी भ्रमों से छुटकारा मिलना ही चाहिए।

.

sada ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दरता से व्‍यक्‍त बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

रंजना ने कहा…

भावुक अभिव्यक्ति...

राजेश उत्‍साही ने कहा…

मोहब्‍बत का भरम कभी नहीं टूटता।

"अभियान भारतीय" ने कहा…

लाजवाब.......

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

kavita ki sahajta ne ,kavita ko bahut hi manbhaavan bana diya hai , abhivyakti , khul kar aa gayi hai aur shabd jaise praan se bhare hue hai ....meri dil se abdhayi kabul kare ji

प्रेम सरोवर ने कहा…

Meri apni manyata hai ki jindagi mein kabhi bhi aisa prayas nahi karana chahiye jis se bilkul nirashavadi dristkon viksit ho jaye.Bhav pradhan post. Dhanyavad.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना....
जीने के लिए भ्रम पालना भी बहुत जरूरी है, वर्ना जीना दुश्वार हो जाए..

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι ने कहा…

जाने क्यूं तोड़ नहीं पाती मर्यादा के पिन्जर को, क्या बात है।

क्षितिजा .... ने कहा…

आपकी इस रचना ने निशब्द कर दिया ... उम्दा वंदना जी ..

ankit the fame ने कहा…

भ्रम में ज़ीना ही तो मौहब्बत का नाम है

ankit the fame ने कहा…

भ्रम में ज़ीना ही तो मौहब्बत का नाम है

dev ने कहा…

मुझे याद
करना छोड़ दे
शायद
मोहब्बत का
भरम टूट जाए"

Shabdon ki kami hai meray paas.

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

भरम के सहारे ज़िंदगी काट जाती है. कभी कभी भरम ही यथार्थ होता है

--

POOJA... ने कहा…

speechless... बहुत सुन्दर रचना...

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

आजकल प्रेम से समन्धित विषयों पर बड़ी अच्छी रचनाएँ लिख रही हैं, कुछ ऊँचे ताल पर है ये रचना.....शुभकामनायें |

Minakshi Pant ने कहा…

इतना प्यार दिखाती हो
उस पर लुट जाना चाहती हो
फिर बार क्या सोच कर तुम
उससे खुद को यु बचाती हो
क्या तेरे दिल मै प्यार नहीं ?
फिर क्यु उसका अच्छा चाहती हो
अपने को यु पत्थर दिल कह कर
क्यु उसका दिल दुखती हो ?

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

प्रेम की तड़प को सुनाती सुन्दर कविता!

सुमन'मीत' ने कहा…

बहुत सुन्दर......गहरी अभिव्यक्ति..........

GAJANAN RATHOD ने कहा…

शायद
मोहब्बत का
भरम टूट जाए

Very nice.......Badhai...

वाणी गीत ने कहा…

कशमकश सी है ...
भ्रम में जीना अच्छा या इसका टूट जाना !

sumit das ने कहा…

bahut aachha likhte hai aap itna dard kaha se leaati hai aap. bahut gahrai hai bhetarin

sumit das ने कहा…

bahut aachha likhte hai aap itna dard kaha se leaati hai aap. bahut gahrai hai bhetarin