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सोमवार, 6 सितंबर 2010

चाहे हस्ती ही मेरी मिट जाये

कोई ऐसी शय खोजो यारों
दिल को मेरे सुकूँ आ जाये


धडकनों को गज़ल बनाओ यारों
शायद गुलाब कोई खिल जाये


उनके  चौबारे को ऐसे सजा दो यारों
शायद्  फिर कोई शहीद हो जाये


उसके लबों पर मुस्कुराहट सजा दो यारों

चाहे लहू मेरा बह जाये

दर्द के बिस्तर पर सुला दो मुझको
बस एक बार वो हँस जाये


कोई अहले -करम फ़रमाओ यारों
वो जी जाये और मैं  मर जाऊँ


कुछ उसके भरम तोड दो यारों
चाहे मै शहर--ए-बदर हो जाऊँ


कुछ तो उसको सुकून मिलेगा यारों
चाहे हस्ती ही मेरी  मिट जाये

 

31 टिप्‍पणियां:

shikha varshney ने कहा…

वाह क्या बात है ..दिल को छूती हुई रचना.

shikha varshney ने कहा…

वाह क्या बात है ..दिल को छूती हुई रचना.

इमरान अंसारी ने कहा…

शाबाश वंदना जी,

आख़िरकार आपने ग़ज़ल लिखने की कोशिश की है, कुछ शेर उम्दा बन पड़े है.........उम्मीद है और निखार आएगा ......शुभकामनाये |

रश्मि प्रभा... ने कहा…

कोई ऐसा शय खोजो....सुकून आए , कोई बात बने , नींद आ जाये

Ashish (Ashu) ने कहा…

बेहद संवेदनापूर्ण रचना। पढ़कर आनंद आ गया।

rashmi ravija ने कहा…

कुछ तो उसको सुकून मिलेगा यारों
चाहे हस्ती ही मेरी मिट जाये
बहुत ही भावाकूल रचना...अति सुन्दर

मनोज कुमार ने कहा…

धडकनों को गज़ल बनाओ यारों
शायद गुलाब कोई खिल जाये
अद्भुत! धड़कन जब ग़ज़ल बनती है तो सारा जग गुनगुना उठता है।

गीली मिट्टी पर पैरों के निशान!!, “मनोज” पर, ... देखिए ...ना!

arvind ने कहा…

कोई ऐसी शय खोजो यारों
दिल को मेरे सुकूँ आ जाये.....वाह क्या बात है

arun c roy ने कहा…

अंतिम शेर तो रुला दी. खुद को फ़ना करके और को खुश रखने का जज्बा प्रेम में ही होता है. बहुत खूब.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

गहरे उतरती रचना।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

धडकनों को गज़ल बनाओ यारों
शायद गुलाब कोई खिल जाये


गज़ल पढ़ कर गुलाब खिल ही जायेगा ...

जितना मैं जानती हूँ इसे गज़ल नहीं कह सकते ...दो शेर में लास्ट में जाऊं कर दिया है ..यहाँ भी जाये होता तो कुछ गज़ल जैसा हो जाता शायद ...
नज़्म कहूँगी...खूबसूरत नज़्म ..:):)

डॉ. नूतन " अमृता " ने कहा…

aapne to bahut hee sundar tareeke se baat kahi.dil ko choo gayi vandana ji......aur aapka hardik abhinandan aur dhanyvaad....aap mere blog me aa kar mujhey kritaarth kar gayin..dhanyvaad..

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

कोई इसी शय खोजो ... की हस्ती मेरी... बहुत बढ़िया प्रस्तुति हमेशा की तरह ...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

अच्छा प्रयास है । सुन्दर अभिव्यक्ति ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (ਦਰ. ਰੂਪ ਚੰਦ੍ਰ ਸ਼ਾਸਤਰੀ “ਮਯੰਕ”) ने कहा…

कोई ऐसी शय खोजो यारों
दिल को मेरे सुकूँ आ जाये

धडकनों को गज़ल बनाओ यारों
शायद गुलाब कोई खिल जाये
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बिटिया की महिमा अन्नत है।
बिटिया से घर में बसन्त है।।
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बहुत ही प्यारी अभिव्यक्ति प्रकट की है आज तो!

दीपक 'मशाल' ने कहा…

आँय!!!!! मिट के दिल ही ना रहेगा तो दिल को सुकून कैसा???? :P जज्बातों को सुन्दर शब्दों का पहनावा दिया मैम..

kshama ने कहा…

Phir ek bahut,bahut khoobsoorat rachana!

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सशक्त रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

महफूज़ अली ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति........दिल को छूती हुई रचना..............

ZEAL ने कहा…

.
wow ..awesome !
.

Udan Tashtari ने कहा…

वाह वाह! बहुत खूब कहा.

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

दिल को छूती हुई संवेदनापूर्ण रचना.......बेहद सुन्दर

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी ग़ज़ल।
हिन्दी का प्रचार राष्ट्रीयता का प्रचार है।

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राजभाषा हिंदी ने कहा…

उम्दा भाव। अच्छी ग़ज़ल।

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Shah Nawaz ने कहा…

अच्छी कविता है..... बहुत खूब!

love ने कहा…

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शोभना चौरे ने कहा…

वाह वंदनाजी
बहुत खूबसूरत अहसास |
आपकी गजल पढ़कर मुकेशजी का गया गीत यद् आ गया
किसी की मुस्कुराहतो पे हो निसार
किसी का दर्द ले सके तो ले उधार
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार
जीना इसी का नाम है ....

अशोक बजाज ने कहा…

लाजवाब .


पोला की बधाई भी स्वीकार करें .

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) ने कहा…

आपके परवाज़ ए तखय्युल की दाद देता हूँ|
हां ग़ज़ल शिल्प के धरातल पर थोड़ी हलकी ज़रूर है|

ali ने कहा…

बहुत खूब ! सुन्दर !

ओशो रजनीश ने कहा…

अच्छी पंक्तिया है .....

यहाँ भी अपने विचार प्रकट करे ---
( कौन हो भारतीय स्त्री का आदर्श - द्रौपदी या सीता.. )
http://oshotheone.blogspot.com