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गुरुवार, 19 अगस्त 2010

ब्लॉग गुरु की पाठशाला ...............

आइये साथियों ब्लॉग गुरु की पाठशाला में और हर समस्या का समाधान पाइए ................हा हा हा 
ब्लॉगिंग गुरु ने स्कूल खोला
विज्ञापन लगाया ---------
ब्लॉगिंग के गुर सीखिए ------
फायदा ना होने पर 
बेनामी के रूप में 
सबको धमका दीजिये 

विज्ञापन देख दुनिया का मारा
एक चँगुल में फँस गया
और गुरु के दरबार में 
पहुँच गया
बोला -----गुरु जी 
मेरी कोई सुनता नहीं 
घर में पत्नी और बच्चो 
की ही राजनीति गरमाई है 
वहाँ मेरी अक्ल  चकराई है
ऑफिस में बॉस की फटकार 
खाई है पर बात की 
वहाँ भी नहीं सुनवाई है 
यार दोस्त अपनी- अपनी सुनाते  हैं
और मेरी बारी आते ही 
अपने घर चले जाते हैं 
कोई ऐसा चमत्कार कीजिये 
मेरा भी उद्धार हो जाये 
और जो अन्दर ही अन्दर 
उबल रहा है उसके बाहर 
आने का उपाय कीजिये 

गुरु बोले ------बेटा 
क्यूँ घबराता है
बिलकुल सही जगह तू आया है
आजकल जिसकी कोई नहीं सुनता
उसके लिए ही ये मंच बनाया है
हम तुझे ब्लॉगिंग के 
ऐसे -ऐसे गुर सिखायेंगे
कि बड़े- बड़े सूरमा 
मैदान छोड़कर भाग जायेंगे 
सबसे पहले तू 
किसी नामी- गिरामी संगठन का
सदस्य बन जाना 
और फिर बिना बात किसी 
से भी भिड जाना
आपत्तिजनक टिप्पणियां करना
बस फिर देखना 
पूरा संगठन तेरे समर्थन में
उतर आएगा और ब्लॉगजगत में
तुझे ख्याति दिला जायेगा 
बस पहली बाधा पार की जिसने
वो तो सिकंदर बन ही जाता है
फिर तू जो भी कहना चाहे
कह देना , अपनी हर भड़ास
निकाल लेना 
कोई न तुझसे पंगा लेगा
और ब्लॉगजगत में 
नाम तेरा रोशन होगा
महशूर होने का सबसे 
सुगम तरीका है 

अब बस इतना काम 
और कर लेना 
ब्लॉगजगत के अपने 
संगठन के हर सदस्य के
ब्लॉग पर उनकी पोस्ट के
कसीदे पढ़ देना 
चाहे लिखा उसमें 
कुछ भी काम का ना हो
मगर टिपण्णी ऐसी कर देना
जैसे उसकी भाषा को 
समझने का हुनर
सिर्फ खुदा ने तुम्हें 
ही बख्शा है 
फिर देखना कैसे 
ब्लॉगजगत तुम्हें 
आँखों पर बिठाता है
और अच्छी -अच्छी पोस्टों के
कैसे तोते उडाता है
और तुम्हारी पोस्ट को 
कैसे सबसे ऊपर पहुँचाता है
अगर फिर भी किसी कारणवश
कभी टिप्पणियां कम आने लगें
कोई और धुरंधर
अपना सिक्का ज़माने लगे
बस तू इतना कर देना
ब्लॉगजगत को छोड़ने की
धमकी दे देना 
फिर देखना सारा 
ब्लॉगजगत तुझे 
मनाने आ जायेगा 
और एक बार फिर 
तेरा सिक्का जम जायेगा

अब अच्छी पोस्टों का 
दीवाला निकालने का गुर 
सिखलाता हूँ
चाहे तुझे लिखना भी आता हो
कविता के भाव भी जानता हो
लेख की भाषा का भी ज्ञान हो
मगर तब भी इतना करते रहना
सिर्फ अपने संगठन के 
सदस्यों को छोड़कर
बाकी ब्लोगरों की पोस्टों पर
सिर्फ "अच्छी है" , "उम्दा भाव हैं " 
"गहरी बात कही" , "सुन्दर लेखन"
ऐसी छोटी -छोटी टिप्पणियाँ 
ही करना ताकी 
लिखने वाला भी समझ जाये
उसका होंसला भी 
पस्त हो जाये
और वो घबराकर
मैदान छोड़कर भाग जाये
बस इतना सब तू करते रहना
तब देखना एक दिन
ब्लॉगिंग में नाम तेरा भी
चमक जायेगा और 
अख़बारों के पन्नों पर
"बिग बी "की तरह 
तू भी छा जायेगा

बेटा आज के लिए 
बस इतना काफी है
तब तक तुम इसका अभ्यास करना

वरना पढने वालों के तोते उड़ जायेंगे
ज्यादा बड़े पाठ से घबराएंगे
इनको और पोस्टों पर भी जाना है
इतना ध्यान भी रखना होगा
फिर भी  कोई समस्या आये 
तो ब्लोगगुरु के पास आ जाना
                                   हर समाधान पा और जाना

45 टिप्‍पणियां:

Rajeev Bharol ने कहा…

हा हा. पते की बात बताई है.

Ravi Kant Sharma ने कहा…

"अच्छी है" , "उम्दा भाव हैं " "गहरी बात कही"

vandan gupta ने कहा…

@रवि कान्त शर्मा जी
हा हा हा……………पाठ बडी जल्दी समझ आ गया।

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

achchha hai.........:P

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

upar wale commment sirf isliye kiya ki aap ye samjho ki aap mere group me nahi ho..........ha ha ha ha!!

Vandana jee jaan daar rachna......chha gayee aap!!

dhanyawaad blog guru nahi blog gurain........:)

vandan gupta ने कहा…

@मुकेश कुमार सिन्हा जी,

कोई बात नही जल्दी से संगठन बना लीजिये और हमें भी शामिल कर लीजिये शायद हमारा भी भला हो जाये…………………हा हा हा।

shikha varshney ने कहा…

हा हा हा ..मस्त लिखा है .

रानीविशाल ने कहा…

Blog guru to bahut jordaar hai ji,
aise aise gur batae hai....ki famous blogger banana tay ho gaya sabka :D
Mazedaar rachana

वाणी गीत ने कहा…

आ रहे हैं आपको गुरु बनाने ...
एक साल हो गया हमको मगज खपाते ...
ये टिप्स पहले नहीं दे सकते थी क्या ...?

बेनामी ने कहा…

सुभानाल्लाह....वंदना जी मज़ा आ गया...एक गाना याद आ रहा है ....."बात मेरे दिल वाली आप ही ने कह डाली "

मुझे सबसे बढ़िया लगा :-

"यार -दोस्त अपनी अपनी सुनाते है
और मेरी आते ही, अपने घर चले जाते हैं"

हा..हा ...हा ..हा.....(ठहाका)

vandan gupta ने कहा…

@वाणी गीत जी,
चलिये देर आयद दुरुस्त आयद्……………अब शुरु हो जाइये…………………हा हा हा …………………क्या करें इससे पहले ब्लोग गुरु के पास कोई आया ही नही।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

हा हा ...वाह गुरु जी ( गुरुआयिन जी ) मान गए ...अब तो खूबसूरत अभिव्यक्ति लिखते हुए सोचना पड़ेगा ... :):)

Ravi Kant Sharma ने कहा…

जय श्री कृष्णा....
कैसे न आता समझ में,
समझाया ही इस प्रकार से है!

rashmi ravija ने कहा…

हा हा हा ...बहुत ही बढ़िया...किस बारीकी से बखिये उधेड़े हैं....मजा आ गया...क्या नज़र पायी है...कुछ भी नहीं छूटा....बहुत खूब

कविता रावत ने कहा…

है इतना ध्यान भी रखना होगा
फिर भी कोई समस्या आये तो ब्लोगगुरु के पास आ ना
हर समाधान पा और जाना
Blog ka apna hi ek alag andaaj hai...
Achhi charcha lagi... kabhi kabhi aisa bhi hona hi chahiye...

Majaal ने कहा…

रस्मे बाज़ार की आदायगी के बाद,
'मजाल' भी देखो कितना मशहूर हो गया!

समयचक्र ने कहा…

आपने कविता के माध्यम से सौ टके की बात कह दी .... आभार वंदना जी

sonal ने कहा…

are kaam ki tips hai...aaj se hee shuru ho jaati hoon

Satish Saxena ने कहा…

हा... हा.... हा.....हा.......
बिलकुल सही लिखा है पाठशाला खोल लेने में फायदा है विचार अवश्य करें !

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत खूब ।

दीपक 'मशाल' ने कहा…

हास्य, कटाक्ष, व्यंग्य और सीख... सब एक साथ.. पहली बार आपकी हास्य रचना पढ़ी.. पर लगता नहीं कि पहली बार लिखी गई..

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" ने कहा…

सोच रहे हैं कि ऎसा एक संगठन खडा कर ही दिया जाए :)

राजेश उत्‍साही ने कहा…

बहुत सुंदर,सार्थक अभिव्‍यक्ति,गहरा व्‍यंग्‍य,उम्‍दा कविता,बहुत अच्‍छा लिखती हैं,पते की बात,
बस गुरुजी इतना ही सीख पाएं हैं अभी तक। अब आपकी टयूशन लेकर और सीख लेंगे। हमारा नाम सबसे पहले लिख लीजिए आपकी कक्षा में। दक्षिणा मे क्‍या देना होगा यह भी बता द‍ीजिए।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सार्वजनिक धुलाई।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

मैं भी इस पाठशाला में दाखिला लेना चाहता हूँ!
--
आपकी जितनी बढ़िया कविता
मैं भी लिखना शीखना चाहता हूँ!

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति....

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

गुरू को प्रणाम हो.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

पाठशाला खोलनी हो और प्रिंसीपल की जरुरत लगे तो याद किजियेगा.:)

रामराम.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

पाठशाला खोलनी हो और प्रिंसीपल की जरुरत लगे तो याद किजियेगा.:)

रामराम.

संगीता पुरी ने कहा…

क्‍या बात है !!

Arvind Mishra ने कहा…

वाह बढियां गुरु (गुरुआयिन ) मन्त्र हा हा

राजभाषा हिंदी ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति!
राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

kamaal likha hai.......steek sadha hua..... par ek meethi si goli

Urmi ने कहा…

हा हा हा हा ! बहुत खूब! वाह वंदना जी आपने तो कमाल का लिखा है ! शानदार, जानदार और ज़बरदस्त पोस्ट रहा! बधाई!

vandan gupta ने कहा…

@ताउ जी,
प्रिंसीपल तो हमेशा आप ही रहेंगे फिर पाठशाला कैसी भी हो और कहीं भी हो………………हा हा हा ।

वन्दना ने कहा…

@शास्त्री जी,
गुरू तो हमेशा आप ही रहेंगे ……………आप से ही सीख रहे हैं हम क्या सिखा सकते हैं ………………सब आपकी ही देन है बस अपना आशीष बनाये रखियेगा।

वन्दना ने कहा…

@ राजेश जी,
आपको क्या सिखाना है …………आपसे तो हमे सीखना है…………………बस यही दक्षिणा दे दीजिय्रे कि आप जैसा हम भी लिख सकें।

शारदा अरोरा ने कहा…

हमारी नहीं है ये काँटों की दुनिया
हमारी तो है दिल के दागों की दुनिया
जैसा कि आपने अपने ब्लॉग को नाम दिया है ..
ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र

एक बेहद साधारण पाठक ने कहा…

वंदना जी ये पोस्ट ... "अच्छी है" , "उम्दा भाव हैं " "गहरी बात कही" , "सुन्दर लेखन"

लीजिये हमने तो अमल करना भी शुरू कर दिया है अभी से
गुरु जी की जय हो ...
आज तो सच में आनंद आ गया .. ये पोस्ट पढ़ कर

manu ने कहा…

ऊँहूँ...

दूसरे संगठन पर तो कमेंट्स देने ही नहीं जी...!

कैसे भी नहीं...!
बस...कभी कुछ नया ताज़ा देखना हो तो देख लो..और चुपचाप ब्लॉग बंद कर के खिसक लो...

manu ने कहा…

ऊँहूँ...

दूसरे संगठन पर तो कमेंट्स देने ही नहीं जी...!

कैसे भी नहीं...!
बस...कभी कुछ नया ताज़ा देखना हो तो देख लो..और चुपचाप ब्लॉग बंद कर के खिसक लो...

जय शंकर ने कहा…

Bloggers ki pol khol kar rakh dee. bahut sundar.

दीपक बाबा ने कहा…

मुँह से निकला - वाह वाह !!!

सत्य कथन है.......

काश आपने पहले बताया होता तो २ साल यूँ न खराब किये होते........
आज अपना शुमार भी अच्छे ब्लोग्गर में होता........

Rajeysha ने कहा…

वाकई इसमें कुछ असलि‍यत है, यह कहानी समझ भी आयी है।