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सोमवार, 31 मई 2010

यूँ आवाज़ ना दिया करो

सुनो
यूँ आवाज़ ना दिया करो 
दिल की बढती धड़कन 
आँखों की शोखियाँ 
कपोलों पर उभरती 
हया की लाली
कंपकंपाते अधर 
तेरे प्यार की 
चुगली कर जाते हैं 
कभी ख्वाब तेरे
रातों में जगा जाते हैं
और चंदा की बेबसी से
सामना करा जाते हैं
तारे गिनते- गिनते 
कटती तनहा  रात 
भोर की लाली से
सहम- सहम जाती है 
मद्धम मद्धम बहती बयार
तेरी साँसों की 
सरगोशियाँ कर जाती है
तेरी इक आवाज़ पर
मोहब्बत का हर रंग
बसंत सा खिल जाता है 
बता अब कैसे 
मुट्ठी में क़ैद करूँ 
इस बिखरती खुशबू को 
बस तुम 
यूँ आवाज़ ना दिया करो 

32 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

सुनो
यूँ आवाज़ ना दिया करो
दिल की बढती धड़कन
आँखों की शोखियाँ
कपोलों पर उभरती
हया की लाली
कंपकंपाते अधर
तेरे प्यार की
चुगली कर जाते हैं
आवाज दे कोई या न दे फिर भी चुगली से कब तक बचेगा कोई.
कितना करीबी रचना है एहसास और भाव के शिखर को छूती हुई

vedvyathit ने कहा…

tumhe aavaj de kr mil gya dil ko skoon
tum ne suna ta n suna
ya sun kr bhi ansuna kr diya
pr aavaj hi to hoon mai
jo phunch gya shbd ke madhym se tumhare pass
aur mil gya ek skoon shbd ke sprsh se
ved vyathit

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

बहुत सुन्दर, प्रेम के सुन्दर भाव समेटे अच्छी रचना !

kshama ने कहा…

Oh Vandna! Kitna sundar likhti ho..jis kisine jeevan me pyar kiya hoga,inheen ahsaason se guzari hogi!

दिलीप ने कहा…

waah ishq ha har ehsaas lihk diya mam...bahut sundar jajbaat liye rachna

रश्मि प्रभा... ने कहा…

yun n likha karo
dil kee dhakanon ko yun n badhaya karo....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वाह...कितनी खूबसूरती से उतारे हैं ये कोमल से एहसास.....बहुत सुन्दर...

सुनो
यूँ आवाज़ ना दिया करो

माधव( Madhav) ने कहा…

बहुत सुन्दर, प्रेम के सुन्दर भाव समेटे अच्छी

sanu shukla ने कहा…

bahut sundar...
yu awaj na diya karo..

arvind ने कहा…

मुट्ठी में क़ैद करूँ
इस बिखरती खुशबू को
बस तुम
यूँ आवाज़ ना दिया करो ....vaah dil ko chu lenevaali sundar rachna.

Ra ने कहा…

एहसास और प्रेम समेटे ,,,,बहुत सुन्दर रचना !!!

pawan dhiman ने कहा…

Bahut sunder rachna.

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

बहुत सुंदर ...एहसासों से परिपूर्ण ..... शानदार कविता.....

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्दर! आनन्द आ गया.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

तेरी इक आवाज़ पर
मोहब्बत का हर रंग
बसंत सा खिल जाता है
बता अब कैसे
मुट्ठी में क़ैद करूँ
इस बिखरती खुशबू को
बस तुम
यूँ आवाज़ ना दिया करो


मनोभावों का बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है आपने इस रचना में!

Shekhar Kumawat ने कहा…

बहुत सुन्दर, प्रेम के सुन्दर भाव

badhai aap ko is ke liye

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी पोस्ट ...चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर मंगलवार १.०६.२०१० के लिए ली गयी है ..
http://charchamanch.blogspot.com/

Shekhar Kumawat ने कहा…

बहुत सुन्दर, प्रेम के सुन्दर भाव समेटे अच्छी

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच मच आसान नही है किसी की खुश्बू और यादों को क़ैद करना ... उसे तो महसूस ही किया जा सकता है ... अच्छी रचना ...

बेनामी ने कहा…

achhi rachna ke liye badhai...

shikha varshney ने कहा…

komal ahsason ko khubsurat shabd diye hain aapne vandna ji ! shubhkamnaye

आचार्य उदय ने कहा…

आईये, मन की शांति का उपाय धारण करें!
आचार्य जी

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

Yun awaj na diya karo........:)

romantic rachna.....
dil ko chhune walee......

bahut khubsurat!!

hamara blog aapka wait kar raha hai:)

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आपका आना और सराहना अच्छा लगा . उम्मीद है आप आगे भी आकर हौसला बढाती रहेंगी . एक रचना आपकी खिदमत में पेश है .



एक किरदारे-बेकसी है मां


ज़िन्दगी भर मगर हंसी है मां


दिल है ख़ुश्बू है रौशनी है मां


अपने बच्चों की ज़िन्दगी है मां


ख़ाक जन्नत है इसके क़दमों की


सोच फिर कितनी क़ीमती है मां


इसकी क़ीमत वही बताएगा


दोस्तो ! जिसकी मर गई है मां


रात आए तो ऐसा लगता है


चांद से जैसे झांकती है मां


सारे बच्चों से मां नहीं पलती


सारे बच्चों को पालती है मां


कौन अहसां तेरा उतारेगा


एक दिन तेरा एक सदी है मां


आओ ‘क़ासिम‘ मेरा क़लम चूमो


इन दिनों मेरी शायरी है मां
http://vedquran.blogspot.com/2010/05/mother.html

Himanshu Mohan ने कहा…

नाज़ुक रूमान

बेनामी ने कहा…

आपकी रचनाधर्मिता से ब्लॉग जगत प्रभावित है. आपकी रचनाएँ भिन्न-भिन्न विधाओं में नित नए आयाम दिखाती हैं. 'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग एक ऐसा मंच है, जहाँ हम प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं. रचनाएँ किसी भी विधा और शैली में हो सकती हैं. आप भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 2 मौलिक रचनाएँ, जीवन वृत्त, फोटोग्राफ भेज सकते हैं. रचनाएँ व जीवन वृत्त यूनिकोड फॉण्ट में ही हों. रचनाएँ भेजने के लिए मेल- hindi.literature@yahoo.com

सादर,
अभिलाषा
http://saptrangiprem.blogspot.com/

V.P. Singh Rajput ने कहा…

यूँ आवाज़ ना दिया करो
दिल की बढती धड़कन
आँखों की शोखियाँ .............
बहुत सुन्दर,
www.sometimesinmyheart.blogspot.com

आचार्य उदय ने कहा…

आईये जाने .... प्रतिभाएं ही ईश्वर हैं !

आचार्य जी

Urmi ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना! बेहद पसंद आया!

राजन ने कहा…

bahut khubsurat.

राजन ने कहा…

bahut khubsurat.

राजन ने कहा…

bahut khubsurat.