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रविवार, 16 मई 2010

ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ...........

तेरा मेरा यूँ मिलना
जैसे आकाश का 
धरती को तकना
पूजन , अर्चन,वंदन बन 
आई हो मेरे जीवन में
जब से दीदार किया तेरी
रिमझिम सी  इठलाती ,
मुस्काती चितवन का
 होशोहवास सब गुम हो गए
तुम्हारे ही ख्यालों में
ना जाने कहाँ खो  गए
ये कैसी मदहोशी छाई है 
तुम्हें पाने की चाह
दिल  में समायी है
जानता हूँ छू नहीं सकता
फिर भी आस की लौ 
जलाई है 
 ख्वाबों को तुम्हारे प्रेम की
पैरहन पहनाई है
तुम पैरों में महावर लगाये
आओगी इक दिन जीवन में 
इसी आस की रंगोली रोज
दिल की चौखट पर सजाता हूँ 
तुम्हारी चूड़ियों की खनक
जब  दरवाज़ा मेरा खड्काएगी 
तब कैसे दिल को सम्हालूँगा
ये सोच -सोच घबराता हूँ
जब भी तस्वीर निहारा करता हूँ
अधरामृत पान की
लालसा मुखर हो जाती है
जब सामने तुम्हारा वजूद होगा 
तब कैसे खुद को सम्हालूँगा
ये सोच -सोच शरमाता हूँ
मगर फिर भी प्रेम का
प्रतिकार तुम ही से चाहता हूँ
ख्वाब में ही सही मगर 
अपने इंतज़ार के मंदिर में
तुझे अपने ख्वाब की देवी बना 
तेरी वंदना कर
विजय रथ पर सवार हो
ख्वाब के प्रेम क्षितिज पर
मिलना चाहता हूँ
जानता हूँ तुम हकीकत नहीं
ख्वाब हो मेरा फिर भी
ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ...........

34 टिप्‍पणियां:

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ने कहा…

पता है ये मेरे ख्वाब कभी प्राप्त नहीं होगे
पूर्णता को ,,,,,
मै जी रहा हूँ नितांत भ्रामकता में ,,,
पर तेरे अहसासों की हर रौ,,,
नहीं दूर होने देती स्म्रतियो का ये भ्रमजाल ,,,,
काल्पनिक सुखद ही सही पर
सुख कर तो है ही ,,,,,,
सादर
प्रवीण पथिक
९९७१९६९०८४

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

जानता हूँ तुम हकीकत नहीं
ख्वाब हो मेरा फिर भी
ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ

बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ ... बधाई !

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत रूमानी सी रचना...ख्वाब कब हकीकत हुए हैं...फिर भी ख्वाब देखने में आखिर बुरा क्या है? :):)

बहुत कोमल से एहसास से लिखी प्यारी कविता

अखिलेश शुक्ल ने कहा…

apnai bahot hi satik likha hai vandana ji.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

बहुत सुंदर.

Kirti Vardhan ने कहा…

ख्वाब ही हैं जो जिंदगी को जीना सिखा देते हैं
ख्वाब ही है जो मौत से भी लड़ना सिखा देते हैं.......
dr a kirtivardhan
09911323732

Kirti Vardhan ने कहा…

ख्वाब ही हैं जो जिंदगी को जीना सिखा देते हैं
ख्वाब ही है जो मौत से भी लड़ना सिखा देते हैं.......

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

"जानता हूँ छू नहीं सकता
फिर भी आस की लौ
जलाई है
ख्वाबों को तुम्हारे प्रेम की
पैरहन पहनाई है"

गहन भावों का संचार करती इस अभिनव रचना के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

मनोज कुमार ने कहा…

कविता बहुत अच्छी लगी।
मन में कोमल भावना जगी
पढने के बाद दो गीत गुनगुनाए
फिर टिप्पणी करने आए
१. छुपा लो दिल में यूं प्यार मेरा
कि जैसे मंदिर में लौ दिए के
२. ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त कौन हो तुम बतलाओ।
देर से कितनी दूर खड़ी हो और क़रीब आ जाओ

माणिक ने कहा…

वन्दना जी पहली बार आपके ब्लॉग पर आया. देर से आने का दुःख है.खैर देर आयद दुरुस्त आयद दिल खुश हुआ.ये कविता तो बहुत ही अच्छे ;लगी. भाव भरा लेखन.
सादर,

माणिक
आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से जुड़ाव अपनी माटी
माणिकनामा

AlbelaKhatri.com ने कहा…

सुन्दर शब्दावली..........

सुन्दर भाव........

अनुपम कविता .........

वाणी गीत ने कहा…

ख्वाबों के आसमान को छूने की ख्वाहिश यह जानते हुए भी की सच नहीं होते सपने कभी ...कविता में ढलकर हकीकत हो गयी है ....!!

kshama ने कहा…

जानता हूँ तुम हकीकत नहीं
ख्वाब हो मेरा फिर भी
ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ

Ham sabhi khwab pakadna chahte hain..kisee ke pakad me aate hain,kisee ke nahi!

M VERMA ने कहा…

ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ...........
ख़्वाब को पकड़े बिना हकीकत गिरफ़्त में नहीं आ सकती.
मुबारक हो सुन्दर ख्वाब

aarya ने कहा…

सादर वन्दे !
सपने तो सपने होते हैं,
पर जो भी हो अपने होते हैं.
इसीलिए हकीकत से अच्छे
सपने होते हैं.
रत्नेश त्रिपाठी

हिमान्शु मोहन ने कहा…

सुन्दर, रूमानी रचना। अच्छी लगी।

राजेन्द्र मीणा ने कहा…

जानता हूँ तुम हकीकत नहीं
ख्वाब हो मेरा फिर भी
ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ

सुन्दर रचना ....मन के एहसास को कविता का रूप दिया

PKSingh ने कहा…

bahut badhiya likha aapne....achha laga yaha aakar

shikha varshney ने कहा…

khwaab ,haqiqat ke beech sundar si rachna.

दिलीप ने कहा…

waah bhaavon ko jagaate khwaab hai...kash khwaab bhi jiye ja sakte...bahut sundar rachna...

महफूज़ अली ने कहा…

मेरे पास शब्द नहीं है.... बहुत खूबसूरत कविता....

Kumar Jaljala ने कहा…

महिलाओं में श्रेष्ठ ब्लागर कौन- जीतिए 21 हजार के इनाम
पोस्ट लिखने वाले को भी मिलेगी 11 हजार की नगद राशि
आप सबने श्रेष्ठ महिला ब्लागर कौन है, जैसे विषय को लेकर गंभीरता दिखाई है. उसका शुक्रिया. आप सबको जलजला की तरफ से एक फिर आदाब. नमस्कार.
मैं अपने बारे में बता दूं कि मैं कुमार जलजला के नाम से लिखता-पढ़ता हूं. खुदा की इनायत है कि शायरी का शौक है. यह प्रतियोगिता इसलिए नहीं रखी जा रही है कि किसी की अवमानना हो. इसका मुख्य लक्ष्य ही यही है कि किसी भी श्रेष्ठ ब्लागर का चयन उसकी रचना के आधार पर ही हो. पुऱूषों की कैटेगिरी में यह चयन हो चुका है. आप सबने मिलकर समीरलाल समीर को श्रेष्ठ पुरूष ब्लागर घोषित कर दिया है. अब महिला ब्लागरों की बारी है. यदि आपको यह प्रतियोगिता ठीक नहीं लगती है तो किसी भी क्षण इसे बंद किया जा सकता है. और यदि आपमें से कुछ लोग इसमें रूचि दिखाते हैं तो यह प्रतियोगिता प्रारंभ रहेगी.
सुश्री शैल मंजूषा अदा जी ने इस प्रतियोगिता को लेकर एक पोस्ट लगाई है. उन्होंने कुछ नाम भी सुझाए हैं। वयोवृद्ध अवस्था की वजह से उन्होंने अपने आपको प्रतियोगिता से दूर रखना भी चाहा है. उनके आग्रह को मानते हुए सभी नाम शामिल कर लिए हैं। जो नाम शामिल किए गए हैं उनकी सूची नीचे दी गई है.
आपको सिर्फ इतना करना है कि अपने-अपने ब्लाग पर निम्नलिखित महिला ब्लागरों किसी एक पोस्ट पर लगभग ढाई सौ शब्दों में अपने विचार प्रकट करने हैं। रचना के गुण क्या है। रचना क्यों अच्छी लगी और उसकी शैली-कसावट कैसी है जैसा उल्लेख करें तो सोने में सुहागा.
नियम व शर्ते-
1 प्रतियोगिता में किसी भी महिला ब्लागर की कविता-कहानी, लेख, गीत, गजल पर संक्षिप्त विचार प्रकट किए जा सकते हैं
2- कोई भी विचार किसी की अवमानना के नजरिए से लिखा जाएगा तो उसे प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जाएगा
3- प्रतियोगिता में पुरूष एवं महिला ब्लागर सामान रूप से हिस्सा ले सकते हैं
4-किस महिला ब्लागर ने श्रेष्ठ लेखन किया है इसका आंकलन करने के लिए ब्लागरों की एक कमेटी का गठन किया जा चुका है. नियमों व शर्तों के कारण नाम फिलहाल गोपनीय रखा गया है.
5-जिस ब्लागर पर अच्छी पोस्ट लिखी जाएगी, पोस्ट लिखने वाले को 11 हजार रूपए का नगद इनाम दिया जाएगा
6-निर्णायकों की राय व पोस्ट लेखकों की राय को महत्व देने के बाद श्रेष्ठ महिला ब्लागर को 21 हजार का नगद इनाम व शाल श्रीफल दिया जाएगा.
7-निर्णायकों का निर्णय अंतिम होगा.
8-किसी भी विवाद की दशा में न्याय क्षेत्र कानपुर होगा.
9- सर्वश्रेष्ठ महिला ब्लागर एवं पोस्ट लेखक को आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए आने-जाने का मार्ग व्यय भी दिया जाएगा.
10-पोस्ट लेखकों को अपनी पोस्ट के ऊपर- मेरी नजर में सर्वश्रेष्ठ ब्लागर अनिवार्य रूप से लिखना होगा
ब्लागरों की सुविधा के लिए जिन महिला ब्लागरों का नाम शामिल किया गया है उनके नाम इस प्रकार है-
1-फिरदौस 2- रचना 3-वंदना 4-संगीता पुरी 5-अल्पना वर्मा- 6 –सुजाता चोखेर 7- पूर्णिमा बर्मन 8-कविता वाचक्वनी 9-रशिम प्रभा 10- घुघूती बासूती 11-कंचनबाला 12-शेफाली पांडेय 13- रंजना भाटिया 14 श्रद्धा जैन 15- रंजना 16- लावण्यम 17- पारूल 18- निर्मला कपिला 19 शोभना चौरे 20- सीमा गुप्ता 21-वाणी गीत 21- संगीता स्वरूप 22-शिखाजी 23 –रशिम रविजा 24- पारूल पुखराज 25- अर्चना 26- डिम्पल मल्होत्रा, 27-अजीत गुप्ता 28-श्रीमती कुमार.
तो फिर देर किस बात की. प्रतियोगिता में हिस्सेदारी दर्ज कीजिए और बता दीजिए नारी किसी से कम नहीं है। प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तारीख 30 मई तय की गई है.
और हां निर्णायकों की घोषणा आयोजन के एक दिन पहले कर दी जाएगी.
इसी दिन कुमार जलजला का नया ब्लाग भी प्रकट होगा. भाले की नोंक पर.
आप सबको शुभकामनाएं.
आशा है आप सब विषय को सकारात्मक रूप देते हुए अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएंगे.
सबका हमदर्द
कुमार जलजला

ktheLeo ने कहा…

वाह!सुन्दर भाव और सटीक शब्द चयन!
आज कल "सच में" के प्रति आपका स्नेह देखने को नहीं मिलता!

arvind ने कहा…

तेरी वंदना कर
विजय रथ पर सवार हो
ख्वाब के प्रेम क्षितिज पर
मिलना चाहता हूँ
जानता हूँ तुम हकीकत नहीं
ख्वाब हो मेरा फिर भी
ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ........... बहुत खूबसूरत .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जानता हूँ तुम हकीकत नहीं
ख्वाब हो मेरा फिर भी
ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ.........

सच कहा .. मन कुछ ऐसा ही हो जाता है ... ख्वाब पकड़ना चाहता है .. जानते हुवे भी की ये छलावा है .. बहुत खूब ...

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

behad khubsurat kavita vandna ji ....

rashmi ravija ने कहा…

जानता हूँ तुम हकीकत नहीं
ख्वाब हो मेरा फिर भी
ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ
कमाल की पंक्तियाँ हैं...सुन्दर रचना

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

vandana ji ,

namasakr
deri se aana hua kshama kar de..
kavita sirf kavita na hokar bhaavo ka ahsaas bhara hua gaagar hai .....jisme sagar ki gahraayiyo se bhi jyada bhaavnaaye shabd ban kar bhari hui hai ... antim paragraph ne to gajab kar diya hai ..
aakhri ki teen panktiyan , nisandeh roop se aapki likhi hui sabsi acchi panktiyo me se ek hai ..

kabhi kabhi kuch rachnaaye tareef se upar ho jaati hai .. ye unme se ek hai ..

abhaar
vijay

Mithilesh dubey ने कहा…

शायद इसी ख्वाब के सहारे बहुत से लोग अपनी जिदंगी जी रहे हैं , कविता बहुत ही बढ़िया लगी ,।

दीपक 'मशाल' ने कहा…

आपकी उपमाएं अनुपमेय हैं.. मेरा मतलब ऐसी उपमाएं ढूंढना आसान काम नहीं..

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

kab se apna rev.dhoondh rahi hu par...nahi mila...aisa laga tha ki rev.diya tha maine...par ho sakta he power cut kha gayi ho mere rev. ko.:)

bahut acchhi rachna likhi hai...aapki rachnao me adhiktam alankaro ka prayog hota he jo rachna ki saundarye saushthav ko badhata hai.

badhayi.

Razi Shahab ने कहा…

bahut khoob

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत रचना है !! बधाइयाँ !!

दिनेश पारीक ने कहा…

वो तो पूछते ही है हर रोज हाल चाल मेरा....
इक दिन ठीक बताया था, अब हर रोज ठीक बताता हूँ.