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सोमवार, 3 मई 2010

मौन मुखर हो जाये

अश्कों का बहना
कोई बड़ी बात नहीं 
मज़ा तब है जब
अश्क बहें भी और
 नज़र भी ना आयें
और  जहाँ मौन भी
नज़रों में मुखर हो जाये 

19 टिप्‍पणियां:

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

...और जहां मौन भी
नजरों में मुखर हो जाए !
वाह ,

ktheLeo ने कहा…

एक गहरे अहसास की बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति!वाह!

'उदय' ने कहा…

...bahut sundar ... behatreen !!!

kunwarji's ने कहा…

वाह!क्या बात है जी,

असम्भव में सम्भावनाये तलाशती आपकी ये रचना जो सफल भी हो रही है!

कुंवर जी,

ललित शर्मा ने कहा…

वाह,बहुत सुंदर भावाअभिव्यक्ति

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

अश्क बहें भी और
नज़र भी ना आयें

kitni badi baat kah di aapne......bahut khubsurat........:)
kabhi hamare jindagi ke kainvess ko dekhen
www.jindagikeerahen.blogspot.com

Renu Sharma ने कहा…

bahut khoob likha hai

shikha varshney ने कहा…

waah kya baat kahi hai...

M VERMA ने कहा…

और जहाँ मौन भी
नज़रों में मुखर हो जाये

मौन जब मुखरित होगा, शब्द और स्वर ठिठके खड़े रहेंगे

महफूज़ अली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना........

Amit Sharma ने कहा…

मज़ा तब है जब
अश्क बहें भी और
नज़र भी ना आयें

एक गहरे अहसास की बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति!बहुत सुंदर

Apanatva ने कहा…

ati sunder.

सुमन'मीत' ने कहा…

जहाँ मौन भी
नज़रों में मुखर हो जाये
बहुत सुन्दर...........

sangeeta swarup ने कहा…

वाह....बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ने कहा…

waah vandna ji bhut khub behtreen rachna
मज़ा तब है जब
अश्क बहें भी और
नज़र भी ना आयें
sadar
praveen pathik
9971969084

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत ही सुन्दर !
अश्क बहें भी और
नज़र भी ना आयें
और जहाँ मौन भी
नज़रों में मुखर हो जाये

बहुत ही सशक्त अभिव्यक्ति !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह ... क्या बात है.. अश्क बहे पर नज़र न आएँ ...

Deepak Tiruwa ने कहा…

naye dhang se baat kahi hai ... bhav bhi abhinav ...."wah"