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सोमवार, 2 मार्च 2020

अधूरे सपनों की कसक

कल १ मार्च को रेखा श्रीवास्तव जी के संपादन में "ब्लॉगर्स के अधूरे सपनों की कसक" पुस्तक का मुखर्जी नगर में लोकार्पण हुआ। वहीं ब्लॉग और ब्लॉगिंग को लेकर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें अपने समय के सभी दिग्गज ब्लॉगर्स द्वारा चिंता व्यक्त करते हुए समाधान भी प्रस्तुत किया गया। एक सार्थक परिचर्चा की गयी। सबका फोकस पूरी तरह सब्जेक्ट पर रहा। वहीं रंजना यादव जी ने बहुत खूबसूरती से मंच संचालन किया जो रेडियो एंकर भी हैं। रेखा जी के पति, उनकी बेटियाँ तो थी हीं, उनके दामाद भी इस आयोजन में बहुत शिद्दत से शामिल थे। हमें भी अपनी बात रखने का मौका मिला। वहीं काफी ब्लॉगर्स उपस्थित थे तो उन्होंने भी इस आयोजन में अपनी बात कही। यूँ तो जीवन में सबके सब सपने पूरे नहीं होते लेकिन उनसे कोई नहीं पूछता तुम्हारा कौन सा सपना अधूरा रह गया। उस कार्य को अंजाम दिया रेखा श्रीवास्तव जी ने और दे दी सभी ब्लॉगर्स को एक जमीन। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कानपुर से दिल्ली आकर उसका ब्लॉगर्स के मध्य विमोचन करवाना कोई आसान काम नहीं था लेकिन यही रेखा जी की खासियत है वो आसान काम करतीं भी नहीं। रेखा जी और पुस्तक में शामिल सभी लेखकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।































































https://www.facebook.com/rosered8flower/posts/10215327996664679

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

सोच समझ तू कर व्यवहार

धर्म और जाति दो हथियार 
वो चलाएंगे बार बार 

उनका सिक्का यहाँ चलेगा 
ऐसे ही उनका शासन बढेगा 

क्यों मचाते तुम चीख पुकार 
करो अपना कर्म बारम्बार 

ऊँगली से उन्हें जिताते रहो 
खुद को मझधार में डुबाते रहो 

देश न आगे बढे, चलेगा 
मगर उनका दबदबा बना रहेगा 

कत्लोगारत उनकी पहचान 
बस उनसे ही है हिन्दुस्तान 

तुम कौन हो क्या हो नहीं जानते 
हुजूर सत्ताधारी तुम्हें नहीं पहचानते 

बस इक दिन ही तुम्हारा जोर चलेगा 
फिर तो बेटा तू ही कोल्हू में पिसेगा 

बस इतना ही है आचार विचार 
सोच समझ तू कर व्यवहार 






सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

मैंने चिंताओं को पकते देखा है 
वक्त की डाल पर 
किसी खराश सा 
जो परिवर्तित हो 
बन जाती है अंततः 
चिता की लकड़ी 
और 
धूं धूं कर जलना जिनकी नियति 

शनिवार, 4 जनवरी 2020

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शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

अजीब तानाशाही है जनाब

राजा ने आँख बंद कर ली है
राजा ने कान बंद कर लिए हैं
राजा ने मुंह भी बंद कर लिया है

राजा तभी बोलता है जब उसने बोलना होता है
राजा तभी देखता है जब उसने देखना होता है
राजा तभी सुनता है जब उसने सुनना होता है

उससे पहले या बाद में के प्रश्न फ़िज़ूल हैं

राजा अब बापू के बताये रास्ते पर चल रहा है
फिर भी उस पर सवाल उठ रहा है?

अजीब तानाशाही है जनाब
क्या वो अपने मनानुसार जीने का अधिकारी नहीं ?

उसे भी तो एक ही जीवन मिला है जीने को
कुछ मन की बात करने को

आखिर कब तक आहुति देता रहे शासक ही
राम के अनुयाइयों का जीवन भी राम सा ही क्यों चाहते हो जनाब ?

प्रजा के लिए त्याग कर्तव्य किसी और दौर के किस्से कहानी ठहरे...

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

नया हिन्दुस्तान

आजकल
न दुस्वप्न आते हैं न सुस्वप्न
बहुत सुकून की नींद आती है
अमन चैन के माहौल में

सारी चिंताएं सारी फिक्रें ताक पर रख
हमने चुने हैं कुछ छद्म कुसुम
लाजिमी है फिर
छद्म सुवास का होना
और हम बेहोश हैं इस मदहोशी में

स्वप्न तो उसे आयेंगे
जिसने खिलाने चाहे होंगे आसमान में फूल
गिरेंगे तो वही
जिसने की होगी चलने की कवायद
जागेंगे तो वही
जिन्होंने किया होगा सोने का उपक्रम
हमने तो बेच दिए हैं अपने सब हथियार
दीन ईमान, ज़मीर और इंसानियत भी

अब नया हिन्दुस्तान मेरी ख्वाबगाह है...



रविवार, 1 दिसंबर 2019

साहेब ने कहा


लडकियाँ आधी रात को भी अकेली बेधड़क कहीं भी जा सकेंगी . एक बार देश की डोर मेरे हाथ देकर तो देखो .मेरे गुजरात में रात को दो बजे भी लड़की स्कूटी पर अकेली कहीं भी जा सकती है .
कर लिया विश्वास , दे दी डोर . मगर क्या मिला ?
एक बार फिर जनता धोखा खा गयी . अब दिल्ली हो या उत्तर प्रदेश या हैदराबाद कोई भी अन्य प्रदेश स्त्रियाँ , लडकियाँ कल भी गैंग रेप की शिकार हो रही थीं और आज भी बल्कि दुगुनी तादाद से .
क्या ये अति नहीं हो रही अब ? आज बलात्कार के बाद उन्हें जलाया जा रहा है, मारा जा रहा है.
आपने स्लोगन दिया बेटी बचाओ बेटी पढाओ - जरा विचारिये जब बेटी बचेगी ही नहीं तो कैसे पढेगी और कैसे बढ़ेगी?
क्या आपको नहीं लगता आप उचित हस्तक्षेप करें. आप चाहें तो एक दिन में कानून बना लागू करवा सकते हैं क्योंकि अब आप पूर्ण बहुमत से हैं.
क्या आपका दिल नहीं दुखता? या फिर आप तक ऐसी ख़बरें पहुँचती ही नहीं?
आप तो सारे देश के प्रधानमंत्री हैं . आपसे ही उम्मीद थी आप स्त्रियों के लिए कुछ करेंगे लेकिन क्या हो रहा है साहेब . जरा यहाँ भी दृष्टि घुमाइए . सिर्फ प्रदेश में मत बांटिये देश को , स्त्रियों को . आप चाहें तो क्या नहीं हो सकता . कुछ देर राजनीति से ऊपर उठ जाइए इंसानियत के नाते ही सही .
आखिर कब तक फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के नाम पर स्त्रियों के सम्मान और भावनाओं से खिलवाड़ किया जाता रहेगा ?
क्या आप समझ सकते हैं किस पीड़ा से गुजरती होगी एक स्त्री ऐसी परिस्थिति में . जनाब आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते उसकी मानसिक और शारीरिक पीड़ा का .
आपसे अनुरोध है बाहर से बेहतर एक बार घर की तरफ भी दृष्टि कीजिये . यहाँ की सुध भी लीजिये . यकीन मानिए जिस दिन आप हर घर और बाहर में स्त्री को सुरक्षित कर देंगे आधी आबादी तो वैसे ही आपके पक्ष में खड़ी हो जायेगी . आपको फिर अलग अलग प्रदेश के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ेंगे .
एक बार हिम्मत कीजिये . अविलम्ब न्याय का प्रावधान कीजिये . आज देश की हर स्त्री की निगाह आप पर टिकी है साहेब . न्याय में इतनी देर मत कीजिये कि वो अन्याय की श्रेणी में आ जाए .
क्योंकि जनता जानती है यदि आप चाहें तो सब कुछ संभव है . इस बार सुन लीजिये जरा स्त्रियों के मन की बात भी , अपने मन की तो आपने बहुत कह ली और उन्होंने बहुत सुन ली .
कहते हैं वही राजा और उसका राज्य सुरक्षित रहता है जहाँ की प्रजा सुखी हो . क्या स्त्रियाँ आपकी प्रजा नहीं ? क्या उनका मान सम्मान आपका मान सम्मान नहीं .........जरा सोचिये !
एक बार फिर गुहार लगा रही हैं इस देश की माँ, बहन और बेटियाँ...सहम उठी हैं इस देश की हर माँ, बहन और बेटी .....कुछ तो आश्वासन दीजिये .......अंतिम विकल्प आप ही हैं
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