'आय ऍम नॉट मजदूर '
स्वीकार रही हैं कुछ स्त्रियाँ
हाँ , आज मजदूर दिवस है
और गर्व है मुझे
अपने मजदूर होने पर
ये किस सोच को जन्म दिया
स्त्री होकर स्त्री को मजदूर का दर्जा दिला
कौन सा महान कृत्य किया
समझ से परे नज़र आया
आज की आधुनिक पढ़ी लिखी स्त्री भी
गर खुद को मजदूर की श्रेणी में रखेगी
तो अनपढ़ पिछड़ी तो कभी
अपने होने के अर्थ को न समझ सकेगी
ये कैसे मापदंड हम बना रहे
ये कौन सी आग जला रहे
जो स्त्री को स्त्री की समुचित पहचान न करवा
उसे खुद ही दोजख की आग में झोंक रहे
नहीं , नहीं स्वीकारती मैं ये तमगा
मेरे लिए सबसे पहले है मेरा अस्तित्व
मेरा होना , मेरी पहचान
जो नहीं गुजरती किसी भी तंग गली से
नहीं , नहीं हूँ मैं मजदूर
और मैं ही क्या
नहीं है कोई मेरी नज़र में मजदूर
क्योंकि
जीवनयापन हेतु किया कार्य
नहीं बनाता किसी को मजदूर
मैं हूँ एक ऐसा व्यक्तित्व
जो देश समाज और घर में देकर अपना योगदान
करती है भविष्य निर्माण
हाँ , निर्मात्री हूँ मैं भविष्य की
मगर नहीं हूँ मजदूर
इसलिए कह सकती हूँ गर्व से
'आय ऍम नॉट मजदूर '