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शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

मेरे मन की मधुशाला


१ )
मेरे मन की मधुशाला का 
जो एक घूँट तुम भर लेते 
फिर चाहे उम्र भर होश में ना आते 
इक जीवन तो हम जी लेते ..........प्रिये !

२ )
मेरे तन के घाट पर 
जो तुमने शाहकार गढ़ा 
जीवन की मधुशाला में 
उसे अंतिम पड़ाव मिला ...............प्रिये!

३ )
नैनों के द्वारे से कभी 
जो उतरे होते निर्जन मन में 
वीराने भी गुलज़ार होते 
जो हाथ में हमारे हाथ होते ..........प्रिये ! 

४ )
देह की प्यास पर तुमने गर 
तरजीह जो ह्रदय को दी होती 
रूह की मधुशाला तुम्हारी 
लबालब भर गयी होती ...........प्रिये !

५ )
फिर न लफ़्ज़ों के मोहताज होते 
जो ककहरा प्रेम का पढ़ लेते 
फिर मधुशाला की एक ही घूँट में 
मौन की भाषा भी तुम गुन लेते ........प्रिये !

६ )
अधूरी अबूझी प्यास से 
न कदम तुम्हारे बोझिल होते 
जो मेरे मन की मधुशाला के 
तुम सजग प्रहरी होते ................प्रिये !

७ )
दो तन दो मन दो प्राण का 
जो एक एक घूँट हम भर लेते 
फिर न द्वी  के परदे में 
जीवन हमारे ढके होते ............प्रिये !

८ )
अपने एकांतवास से तुम 
जो बाहर  निकले होते 
हम की निर्झर मधुशाला में 
जीवन हमारे संवर गए होते ...........प्रिये !

९ )
गर अहम् की मीनारों के 
जो बुर्ज न इतने ऊंचे होते 
फिर तो मधुशाला के रस में 
मन रसायन हो गए होते ......प्रिये ! 

१ ० )
भोर की उजली धूप  में 
जो कुछ देर ठहरे होते 
तुम और मैं के बोझ तले दबे 
समीकरण सारे बदल गए होते ..........प्रिये ! 

१ १ )
घट भर भर कर पीया होता 
जो जाम न तेरा छलका होता 
फिर तो मधुशाला के मधु से तर 
तेरा रोम रोम हुआ होता ............प्रिये ! 

१ २ )
गर एक कोशिश की होती 
जो अपना सर्वस्व माना होता 
फिर मेरे मन की मधुशाला तक 
आना न था कठिन ......... प्रिये !

१ ३ )
खुद को न्योछावर करने की 
जो दलीलें थोपी थीं कल तुमने 
गर उन पर खुद भी चले होते 
फिर डगर कठिन न थी मधुशाला की .........प्रिये !

१ ४ )
इक बार सिर्फ मेरे हो गए होते 
जो दो घडी संग जी गए होते 
प्रेम की मधुशाला पर कुर्बान 
फिर मेरे मन की मधुशाला हो गयी होती ..........प्रिये ! 

१ ५ )
तुम न फिर तुम रहे होते 
मैं न फिर मैं रही होती 
इक दूजे में समायी हमारे 
मनों की मधुशाला होती ........प्रिये ! 

8 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार को (09-11-2013) गंगे ! : चर्चामंच : चर्चा अंक : 1424 "मयंक का कोना" पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Yashwant Yash ने कहा…

कल 10/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

Digamber Naswa ने कहा…

प्रेम का गहरा एहसास लिए ... सुन्दर मन की मधुशाला ..

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह जी सुंदर

Reena Maurya ने कहा…

बहुत सुन्दर ...
मन कि सुन्दर मधुशाला...
:-)

Rachana ने कहा…

bahut sunder madhushala
badhai
rachana

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर!

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना