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गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

मेरी आस का मौसम नहीं बदला…………सिर्फ़ तुम्हारे लिये


एक उम्र बीती
मेरे यहाँ
पतझड को ठहरे
यूँ तो मौसम बदलते हैं
साल दर साल
मगर
कुछ शाखों पर
कभी कोई मौसम ठहरता ही नहीं
शायद
उन मे अवशोषित करने के गुण
बचते ही नहीं किसी भी मिनरल को
देखो तो
ना ठूँठ होती हैं
ना ही फ़लती फ़ूलती हैं
सिर्फ़ एक ही रंग मे
रंगी रहती हैं
जोगिया रंग धारण करने के
सबके अपने कारण होते हैं
कोई श्याम के लिये करता है
तो कोई ध्यान के लिये
तो कोई अपनी चाहत को परवान चढाने के लिये
जोग यूँ ही तो नही लिया जाता ना
क्योंकि
पतझड के बाद चाहे कितना ही कोशिश करो
ॠतु को तो बदलना ही होता है
और जानते हो
मेरी ॠतु उसी दिन बदलेगी
जिस दिन हेमंत का आगमन होगा मेरे जीवन में ………सदा के लिये
ए ………आओगे ना हेमंत का नर्म अहसास बनकर
प्यार की मीठी प्यास बनकर
शीत का मखमली उजास बनकर
देखो ………इंतज़ार की दहलीजें किसी मौसम की मोहताज़ नहीं होतीं
तभी तो युग परिवर्तन के बाद भी
मेरी आस का मौसम नहीं बदला…………सिर्फ़ तुम्हारे लिये
क्योंकि
मैं नही बदलना चाहती 

अपनी मोहब्बत के मौसम को किसी भी जन्म तक
क्या दे सकोगे साथ मेरा ……अनन्त से अनन्त तक हेमंत बनकर
जानते हो ना………मोहब्बत तो पूर्णता में ही समाहित होती है

8 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (01-11-2013) ना तुम, ना हम-(चर्चा मंचः अंक -1416) "मयंक का कोना" पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
धनतेरस (धन्वन्तरी महाराज की जयन्ती) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Yashwant Yash ने कहा…

बहुत ही बढ़िया ।

दीप पर्व आपको सपरिवार शुभ हो !



सादर

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सुंदर रचना.

दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं.

रामराम.

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

मैं नही बदलना चाहती
अपनी मोहब्बत के मौसम को किसी भी जन्म तक

बहुत सुंदर ....!!

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बहुत सुन्दर.. आप को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मौसन जरूर ठहरेगा हेमंत का ... प्रेम का मौसम भी आता है एक बार ...
दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

PoeticRebellion ने कहा…

लफ्ज ऐसे हैं , कि कुछ कह नहीं सकता....
तेरी तारीफ़ किये बिना .... रह नहीं सकता ....