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शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

सिद्धांत लागू हो रहा है हम पर

तुम ---
खामोश मोहब्बत हो कोई
और मैं ---
जैसे विराम कोई मिल जाये

तुम ----
दहकती ख्वाहिश हो कोई
और मैं---
जैसे बहकता सावन कोई बरस जाये

सिद्धांत लागू हो रहा है हम पर
विपरीत ध्रुवों के आकर्षण का ………है ना !!!!!!!

12 टिप्‍पणियां:

Akhil ने कहा…

वाह ....नायाब खयाल ...बेहद सुन्दर ...कम शब्दों बड़ी बात ...बहुत बहुत बधाई।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

जब तक विपरीत रहें तब तक ही आकर्षण है .... बहुत सुंदर

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

:) Bahut Sunder

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वाह ! क्या बात कही है। बहुत खूब।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रकृति रही है अपने मन में..आकर्षण स्वाभाविक है।

रचना दीक्षित ने कहा…

प्रकृति के सिधांतों के विपरीत जाना स्वाभाविक नहीं.

सुंदर प्रस्तुति.

Shalini kaushik ने कहा…

kya bat hai vandna ji .bahut khoob .बहुत भावनात्मक अभिव्यक्ति नसीब सभ्रवाल से प्रेरणा लें भारत से पलायन करने वाले
आप भी जाने मानवाधिकार व् कानून :क्या अपराधियों के लिए ही बने हैं ?

Rajendra kumar ने कहा…

प्रकृति का नियम ही है बिपरीत धुर्वो के तरफ आकर्षण का,बहुत ही सुन्दर रचना।

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

:)

Jyoti khare ने कहा…

जीवन के सही रूप को दर्शाती
बहुत कहीं गहरे तक उतरती कविता ------बधाई

Ramakant Singh ने कहा…

एक सत्य आपकी बातों से सहमत

sushila ने कहा…

विपरीत लिंगीय आकर्षण प्रकृति का नियम है ! सुंदर अभिव्यक्‍ति।