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गुरुवार, 8 नवंबर 2012

निष्ठुर आशा का निर्णायक मोड़ होगा वो

निष्ठुर आशा का निर्णायक मोड़ होगा वो
जब भभकती चिताओं में ना शोर होगा वो
एक चील ने छीना होगा बाज के मुँह से निवाला
तब जरूर कोई नया उदबोध  होगा वो

यूँ ही नहीं बनती हैं शिलाएं वक्त की

यूँ ही नहीं गढ़ती हैं कहानियां शक्ल की
एक ज़र्रे ने जब किया होगा रोशन जहान
तीखी फिजा बदला मोजूं कुछ और होगा वो 

सिमटती कायनात की खुमारी होगी

एक जुनूनी आतिशी वो पारी होगी
जब किसी चाह की ना कोई जवाबदारी होगी
तब इंकलाबी लहर की तैयारी कुछ और होगी वो

टूटा पत्ता जब शाख से जुड़ जायेगा

रुत का नया रुख तब नज़र आएगा
यूँ ही नहीं आशियानों के ख्वाहिशमंद रहे
बदलते आसमाँ के तेवर कुछ और होंगे वो

फतवों की मीनारों पर ना बुर्ज होंगे

तालिबानी अमलों के ना हुजूम होंगे
हर आँख में जब एक कोहिनूर होगा
तब मंज़र बदलता एक सुनहरा दौर होगा वो

18 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

रचना के सभी मुक्तक बहुत बढ़िया हैं!
--
फतवों की मीनारों पर ना बुर्ज होंगे
तालिबानी अमलों के ना हुजूम होंगे
हर आँख में जब एक कोहिनूर होगा
तब मंज़र बदलता एक सुनहरा दौर होगा वो
--
मगर यह अन्तिम तो बहुत ही उम्दा है!

pran sharma ने कहा…

IS KAVITAA KA SWAR HAR DISHA MEIN
GOONJNA CHAHIYE .

रविकर ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

kshama ने कहा…

Deewalee kee anek shubh kamnayen!

मनोज कुमार ने कहा…

आशावादी स्वर में कुछ परिवर्तन की चाह भी है।

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह बढ़ि‍या है जी

Kailash Sharma ने कहा…

फतवों की मीनारों पर ना बुर्ज होंगे
तालिबानी अमलों के ना हुजूम होंगे
हर आँख में जब एक कोहिनूर होगा
तब मंज़र बदलता एक सुनहरा दौर होगा वो

....आमीन! सकारात्मक संदेश देती बहुत सार्थक और सशक्त अभिव्यक्ति..

Ramakant Singh ने कहा…

so nice and beautiful

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…

बेहद प्रभावशाली रचना ....अंतिम पंक्तियाँ लाजवाब ...

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…

बेहद प्रभावशाली रचना ....अंतिम पंक्तियाँ लाजवाब ...

ऋता शेखर मधु ने कहा…

उत्कृष्ट अभिव्यक्ति!!

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

सुंदर स्वप्न दिखती सुंदर रचना | काश ये सब हो जाए |

मेरी नई पोस्ट-बोलती आँखें

इमरान अंसारी ने कहा…

बहुत सुन्दर ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यह मंजर देखना कब नसीब होगा ? सुंदर प्रस्तुति

रश्मि प्रभा... ने कहा…

टूटा पत्ता जब शाख से जुड़ जायेगा
रुत का नया रुख तब नज़र आएगा
यूँ ही नहीं आशियानों के ख्वाहिशमंद रहे
बदलते आसमाँ के तेवर कुछ और होंगे वो ...beshak

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

निष्ठुर आशा का निर्णायक मोड़ - बहुत सुन्दर कथन।

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

आशा जोगळेकर ने कहा…

बहुत आशा भरी सुंदर प्रस्तुति ।