अनुमति जरूरी है

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

शनिवार, 18 अगस्त 2012

तुम पहले और आखिरी सम्पुट हो मेरी मोहब्बत के

चाँद
तुम पहले और आखिरी
सम्पुट हो मेरी मोहब्बत के
जानत हो क्यों ?
मोहब्बत ने जब मोहब्बत को
पहला सलाम भेजा था
तुम ही तो गवाह बने थे
शरद की पूर्णमासी पर
रास - महोत्सव मे
याद है ना ............
और देखना
इस कायनात के आखिरी छोर पर भी
तुम ही गवाह बनोगे
मोहब्बत की अदालत में
मोहब्बत के जुर्म पर
मोहब्बत के फसानों पर
लिखी मोहब्बती तहरीरों के
क्योंकि
एक तुम ही तो हो
जो मोहब्बत की आखिरी विदाई के साक्षी बनोगे
यूँ ही थोड़े ही तुम्हें मोहब्बत का खुदा कहा जाता है
यूँ ही थोड़े ही तुम्हारा नाम हर प्रेमी के लबों पर आता है
यूँ ही थोड़े ही तुममे अपना प्रेमी नज़र आता है
कोई तो कारण होगा ना
यूँ ही थोड़े ही तुम भी
शुक्ल और कृष्ण पक्ष मे घटते -बढ़ते हो
चेनाबी मोहब्बत के बहाव की तरह
वरना देखने वाले तो तुममे भी दाग देख लेते हैं
कोई तो कारण होगा
गुनाहों के देवता से मोहब्बत का देवता बनने का ................
वरना शर्मीली ,लजाती  मोहब्बत की दुल्हन का घूंघट हटाना सबके बस की बात कहाँ है ......है ना कलानिधि!!!!

37 टिप्‍पणियां:

Maheshwari kaneri ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर..मोहब्बत में चाँद से बड़ा और कोई गवाह नहीं होता..

surenderpal vaidya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना .....।
पर चाँद को क्या मालूम ...!

dheerendra ने कहा…

बहुत बेहतरीन लाजबाब अभिव्यक्ति,,,,
RECENT POST...: शहीदों की याद में,,

कुश्वंश ने कहा…

रचना के मर्म को चाँद ने समझा य न समझा हो , मगर बेहतरीन तरीके से बुनी गयी कविता जरूर बनी बधाई

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

यूँ ही थोड़े ही तुम्हें मोहब्बत का खुदा कहा जाता है
यूँ ही थोड़े ही तुम्हारा नाम हर प्रेमी के लबों पर आता है
यूँ ही थोड़े ही तुममे अपना प्रेमी नजर आता है ....
आपके जज्बात के बुलंदी तक पहुँचना ,
मेरे बूते के बाहर हो जाता है ....
बस नमन करने को जी चाहता है ..... !!

alka sarwat ने कहा…

हाँ कलानिधि !!!!!!!!!!!!!!!
कहाँ है सबके बस की बात

kshama ने कहा…

Badee nafees rachana hai!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

चाँद और प्रेम .... बहुत ही बढ़िया

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

हमारा भी सलाम काबुल करें वंदना जी ....:))

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (19-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Reena Maurya ने कहा…

वाह.....
बहुत- बहुत सुन्दर...
बहुत - बहुत प्यारी रचना....
शब्द शब्द मन को छु लेनेवाले है...
मनभावन.....
:-)

संध्या शर्मा ने कहा…

चाँद... मोहब्बत का पहला और आखिरी गवाह. बहुत खूबसूरत भाव...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

क्या बात....बेहतरीन अभिव्यक्ति

***Punam*** ने कहा…

चेनाबी सा बहाव है पूरी रचना में....
सुन्दर अभिव्यक्ति...!

ऋता शेखर मधु ने कहा…

बहुत सुंदर रचना...चाँद जैसा ही खूबसूरत !!!

वाणी गीत ने कहा…

चाँद में दाग देखे हो कितने , मगर मुहब्बत की गवाही इसने बार बार दी .
बेहतरीन !

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति !

मनोज कुमार ने कहा…

इस दिल से निकली आवाज़ के स्वर से मन मोहित हुआ।

sushila ने कहा…

लाजवाब ! उद्‍गारों को प्रभावशाली अभिव्यक्‍ति दी है आपने।

Shanti Garg ने कहा…

very good thoughts.....
मेरे ब्लॉग

जीवन विचार
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

sushila ने कहा…

लाजवाब ! ह्रदय के उद्‍गाओं को सुंदर अभिव्यक्‍ति दी है आपने।

pran sharma ने कहा…

CHAND AUR AASHIQON KAA NAATAA SANAATAN HAI . MEHBOOB KO CHAND
MEIN MEHBOOBAA NAZAR AATEE HAI
AUR MEHBOOBA KO CHAND MEIN MEHBOOB
NAZAR AATAA HAI . KABHEE SHAKEEL NE
KYAA KHOOBSOORAT KAHAA THA -
CHAUDVIN KAA CHAND HO
YAA AAFTAAB HO
JO BHEE HO TUM KHUDAA
KEE KASAM LAAJAWAAB HO

AAPKEE KAVITA ACHCHHEE LAGEE HAI .
BADHAAEE .

pran sharma ने कहा…

CHAND AUR AASHIQON KAA NAATAA SANAATAN HAI . MEHBOOB KO CHAND
MEIN MEHBOOBAA NAZAR AATEE HAI
AUR MEHBOOBA KO CHAND MEIN MEHBOOB
NAZAR AATAA HAI . KABHEE SHAKEEL NE
KYAA KHOOBSOORAT KAHAA THA -
CHAUDVIN KAA CHAND HO
YAA AAFTAAB HO
JO BHEE HO TUM KHUDAA
KEE KASAM LAAJAWAAB HO

AAPKEE KAVITA ACHCHHEE LAGEE HAI .
BADHAAEE .

Rajesh Kumari ने कहा…

बहुत प्यारी सुन्दर अभिव्यक्ति चाँद और मुहब्बत ,दुबारा पढने पर भी उतनी ही अच्छी लगी

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

बेहद खूबसूरत भाव

Ankur jain ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना...
मोहब्बत होने पर सबसे पहले चांद को देखने की नज़र बदल जाती है...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना..

boletobindas ने कहा…

सही में चांद ऐसे ही तो मोहब्बत का गवाह नहीं बना हुआ। दाग हैं तो क्या ....मोहब्बत दाग नहीं देखती सिर्फ मोहब्बत देखती है औऱ चांद को अपना गवाह बनाती है। हर आंसू का.हर खुशी का गवाह ये भगवान का दूत हमेशा बनता आया है औऱ बनता रहेगा।

Udan Tashtari ने कहा…

सम्पुट शब्द का बेहतरीन प्रयोग...वाह!!

सुन्दर!

Onkar ने कहा…

बहुत कोमल सी रचना

प्रेम सरोवर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति। मरे पोस्ट पर आपका आमंत्रण है। धन्यवाद।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

चाड से जुड़ा बहुत पढ़ा है .. आपने कुछ अलग अंदाज़ से उसको लिखा है ... बहुत ही प्रभावी ... लाजवाब ...

rafat ने कहा…

आपकी भावपूर्ण कविता अच्छी लगी, आभार

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

चाँद के माध्यम से मन की बात , वाह !!!!!! बहुत बढ़िया अंदाज़

इमरान अंसारी ने कहा…

khubsurat

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत कविता |आभार

mridula pradhan ने कहा…

behad khoobsurat kavita......