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बुधवार, 15 अगस्त 2012

सच बोलने की सजा


स्वतंत्रता दिवस पर टीचर ने निबंध लिखने को दिया . सभी बच्चों ने निबंध लिखा और पास हो गए सिर्फ एक बच्चा फेल हो गया क्योंकि उसने लिखा था --------

स्वतंत्रता दिवस पर हमारे प्रधानमंत्री लालकिले पर तिरंगा फहराते हैं और भाषण देते हैं जिसमे वो देश से भ्रष्टाचार , बेरोजगारी, मंहगाई आदि को भागने के बड़े-बड़े वादे करते हैं मगर अमल एक पर भी ना करते हैं ये सिर्फ कोरे आश्वासन होते हैं क्योंकि वो तो खुद एक कठपुतली प्रधानमंत्री होते हैं जिन्हें सिर्फ एक दिन बोलने का अधिकार होता है उसके बाद तो वो मौन धारण करते हैं . इस प्रकार हम स्वतंत्रता दिवस की औपचारिकता निभाते हैं और स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं.


बच्चा सोचने पर विवश हो गया कि आखिर उसने क्या गुनाह किया जो सिर्फ वो ही फेल हो गया . क्या सच बोलने की यही सजा होती है ? 


पार्श्व मे संगीत बज रहा था …
इंसाफ़ की डगर पर बच्चों दिखाओ चलकर 
ये देश है तुम्हारा नेता तुम्ही हो कल के  

26 टिप्‍पणियां:

Shah Nawaz ने कहा…

यह एक बच्चे के बोल नहीं लगते, यह तो राजनैतिक भाषा है...

Rajesh Kumari ने कहा…

आज के दौर में तो मीडिया को भी सच बोलने की स्वतंत्रता नहीं है

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

सच हमेशा कड़वा होता है और जो नहीं पचा सकते हें वे उसको सजा देकर ही नवाजा करते हें. शायद औरों की तरह से इतिहास को दुहराने की अपेक्षा की जा रही होगी और शेष वही कर रहे होंगे.

Shah Nawaz ने कहा…

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

जय हिंद!

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

क्या कहा जाए!सच बोलना...!यह भी दुर्भाग्य है .

आजादी की वर्षगांठ पर बहुत- बहुत शुभकामनाएं.

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…


सच कड़वा होता है ,नहीं लिखना चाहिए था ........... :'(
इस प्रकार हम स्वतंत्रता दिवस की औपचारिकता निभाते हैं और स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं...
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ .... !

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सच सुनने की हिम्मत सब में कहाँ होती है .
एक सच्चा और कड़वा सच .

jai hind .

Shanti Garg ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रभावपूर्ण रचना....
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
मेरे ब्लॉग

जीवन विचार
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

:):) आज कल .... सच क्या होता है ?

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

एक पुरानी कहानी में 'राजा नंगा है' ये आवाज सबसे पहले एक बच्चे ने ही लगाई थी, बड़े तो साम, दाम, दंड, भेद के हाथों गिरवी हो चुके होते हैं| बहुत खूब लिखा है वन्दना जी|

संध्या शर्मा ने कहा…

सच कडवा ही होता है... स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

व्यंगात्मक अंदाज़ में लिखी कड़वी सच्चाई ...
१५ अगस्त की शुभकामनायें ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

वृजेश सिंह ने कहा…

पास औऱ फेल का सवाल तो बाद का है...पहले तो सवाल भाषा सिखाने का आता है। ताकि बच्चा संवाद करना सीख ले। अपने विचार रखना सीख ले। लिखने के लिए उसमें एक तड़फ आ जाए। लिखने को वह बातचीत के रूप में ग्रहण करे। ऐसी बातचीत जिसमें शब्दों के सहारे उसे अपनी बात सामने वाले तक पहुंचानी है।

सामाजिक विषय का प्रश्न है आजादी के बारे में विचार व्यक्त करना, बच्चे को आजादी के मायने बता दीजिए, अगर हो सके तो कोई उदाहरण दीजिए या अपने जीवन व्यवहार से स्कूल की किसी गतिविधि में उनको बाल संसद के माध्यम से अपनी बात रखने का, आसपास के सवालों पर बात करने का मौका दिया जाय। वे बेहतर तरीके से वर्तमान स्थितियों को समझ पाएंगे और उसका सामना कर पाएंगे।

संगीता जी ने काबिल-ए-गौर बात कही कि आज के दौर में सच क्या है ? जब देश की परिभाषा संकरी होने लगे। देशी-विदेशी को एक दूसरे से अलग करना कठिन हो गया हो। देशद्रोही और देशद्रोही को पहचानना कठिन हो गया हो ऐसे दौर में नए सवालों का हमारे सामने आना सहज औऱ स्वाभाविक है।

शहनवाज जी ने भी सुंदर बात कही कि बच्चे की भाषा नहीं किसी और की राजनीतिक भाषा है। बच्चे इतना उलझा हुआ नहीं सोचते।

शुक्रिया...लेख के बहाने आपने एक सार्थक बहस छेड़ी।

expression ने कहा…

आज़ाद हैं...सच बोलने की आज़ादी कहाँ...
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

अनु

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

:)

kshama ने कहा…

Kitna sahee kah rahee ho...swatantrata diwas kee hardik shubh kamnayen.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

मास्‍टर बदमाश रहा होगा

Dev K Jha ने कहा…


पूरी ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
जय हिन्द !!
इस अवसर पर आपकी पोस्ट से सजी बुलेटिन पर आईए

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

nadeem ने कहा…

Bas ek wahi to bachcha pass hua hai warna sabne to waha likha jo rataya gaya hai. jeevan mein use sach bolne aur likhne adat ise umra se hi to padegi.

ana ने कहा…

bahut hi badhiya....dil ko chhoo gayi....pata nahi kab tak is sarkar ko jhelna padega?????

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत कठिन है डगर अब सच की..

राजेश उत्‍साही ने कहा…

आपको जो कहना हो खुलकर कहिए। बच्‍चों की ओट लेकर नहीं।

शाह नवाज और बृजेशसिंह की बात से मैं भी इत्‍तफाक रखता हूं।

bkaskar bhumi ने कहा…

वंदना जी नमस्कार...
आपके ब्लॉग 'जिंदगी एक खमोश सफर' से कविता भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 17 अगस्त को 'सच बोलने की सजा' शीर्षक के कविता को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
धन्यवाद
फीचर प्रभारी
नीति श्रीवास्तव

Rakesh Kumar ने कहा…

आपने बच्चे के माध्यम से सच्ची बात कही है,वन्दना जी.उसकी टीचर का अपोइंटमेंट जरूर सत्ता पक्ष
ने किया होगा.अपोजिट पार्टी द्वारा नियुक्त टीचर उसे १०१% नंबर दे देती.