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गुरुवार, 18 अगस्त 2011

आज तुम फिर धडकी हो

आज तुम फिर धडकी हो
क्या हुआ है जो आज
धडकनों  ने फिर करवट ली है
क्या फिर से कोई सरगोशी हुई है
किसी याद ने फिर आँगन
बुहारा है
ये तो  बियाबान जंगल में
एक उजाड़ मंदिर है
जहाँ अब कोई घंटा नहीं बजता
फिर कैसे आज टंकार हुई है
यहाँ तो देवी की मूरत भी
खंडित हो चुकी है
सिर्फ अवशेष ही बिखरे पड़े हैं
फिर कैसे यहाँ आज आहट हुई है
मैंने तो सुना है उजड़े दयारों में
चराग रौशन नहीं होते
फिर कैसे आज लौ टिमटिमा रही है
वैसे भी सब सावन हरे नहीं होते
फिर कैसे यहाँ कोंपल फूट रही है
क्या वक्त तुम्हारे आँगन में हवा दे रहा है
या कोई उड़ता तिनका मेरी आस का
आज तुम्हें भी चुभा है
जो तुमने मुझे इस कदर याद किया है
कि मेरी धडकनों ने फिर से जीना सीख लिया है
या फिर कोई बादल आज तुम्हारे
पाँव को फिर से छू गया है
और तुम्हें वो गुजरा लम्हा
याद आ गया है
जिसमे बरसात भी सूख गयी थी
और मोहब्बत भीग रही थी
कोई तो कारण है
यूँ ही तुम आज फिर से मुझमे नहीं धडकी हो

31 टिप्‍पणियां:

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति !
संदर्भो के मायने तलाशती कविता !
आभार !

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत ही अच्‍छी शब्‍द रचना ...।

Unknown ने कहा…

कविता क्या खुद के भावों की अभिव्यक्ति है? या उसे परे कुछ और भी, इस कविता को पढ़ महसूस हुआ कि कविता एक दिल से भले ही निकले लेकिन कई जिंदगियों की कहानी होती है.
जख्मों को यूं कुरेदती हो कि लगता है जख्म ताजा है और खून रिस रहा है, कहाँ से ले आती हो ये सब? आखों के आसुओं से सलाम लेती हो, जो लिख रही हो खूबसूरत तो है ही, और कहीं ना कहीं इंसान को सपनों की दुनिया से धरातल पर ले आता है.

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

बादलों का पैर को छूना अच्छा लगा... बेहतरीन कविता...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आशा जगी है .. फिर से जीवंत हुई धडकन .. उजाड़ बियाबान में फिर से गूंजेगी टंकार मंदिर के घंटों की ... फिर से हरियाली आएगी ... बस आहट सुनो ... और सहेजो इन परिवर्तन को .. अच्छी प्रस्तुति

Neelkamal Vaishnaw ने कहा…

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

2- BINDAAS_BAATEN: रक्तदान ...... नीलकमल वैष्णव

3- http://neelkamal5545.blogspot.com

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

क्या वक्त तुम्हारे आंगन में हवा दे रहा है ...
वाह क्या बात है ... बहुत सुन्दर रचना !

mridula pradhan ने कहा…

yoon hi tum aaj fir se mujhmen nahin dhadki ho.....wah behad khoobsurat......

sushmaa kumarri ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत धडकी जिन्दगी....

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

bahut gahan vicharon ko prastut kiya hai. isake liye kuchh likhoon shabd baune ho gaye.

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..आभार

संध्या शर्मा ने कहा…

क्या वक्त तुम्हारे आँगन में हवा दे रहा है
या कोई उड़ता तिनका मेरी आस का
आज तुम्हें भी चुभा है
जो तुमने मुझे इस कदर याद किया है
कि मेरी धडकनों ने फिर से जीना सीख लिया है...

गहन अभिव्यक्ति... कमाल का शब्द संयोजन.... लाजवाब रचना...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

किसी के होने से कुछ होता है ... या अपने आप ... कुछ होता है पर क्यों ... बहुत कुछ तलाशती हुयी रचना है ...

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत लाजवाब रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

वाणी गीत ने कहा…

याद आया वो लम्हा जब बरसात सूख गयी थी , और मुहब्बत भीग रही थी ...
वाह ...शब्द जैसे अनदेखे चित्र साकार कर रहे हैं ...
बहुत सुन्दर !

बेनामी ने कहा…

shabd nahi hai kehne ko mere pass

बेनामी ने कहा…

Your comment has been saved and will be visible after blog owner approval.

ye aata hai ,aapko mere comment mil to rahe hai naa

Shikha Kaushik ने कहा…

भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति .आभार
blog paheli no.1

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अत्यन्त आत्मीय उद्गार।

सागर ने कहा…

bhaut hi sundar shabo se rachi jindgi ki rachna....

Dorothy ने कहा…

गहन भावों की खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

jabardastttttttt hai aaj to.

soch rahi hun maine kyu na chura li aaj aapki kalam ?

is baat ka afsos rahega.

bahut sunder prastuti.

abhi ने कहा…

खूबसूरत!!

प्रेम सरोवर ने कहा…

गहन चिंतन मनन के बाद प्रस्तुत की गयी कविता अच्छी लगी। धन्यवाद।

ज्योति सिंह ने कहा…

आज तुम्हें भी चुभा है
जो तुमने मुझे इस कदर याद किया है
कि मेरी धडकनों ने फिर से जीना सीख लिया है
या फिर कोई बादल आज तुम्हारे
पाँव को फिर से छू गया है
anchhuye ahsaas hai jiski aahat kano se jane anjaane takrati hai ,ati uttam

बेनामी ने कहा…

very nice .......keep it up.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

गहन भावों की खूबसूरत अभिव्यक्ति.

Unknown ने कहा…

आज तुम्हें भी चुभा है
जो तुमने मुझे इस कदर याद किया है
कि मेरी धडकनों ने फिर से जीना सीख लिया है
या फिर कोई बादल आज तुम्हारे
पाँव को फिर से छू गया है

बहुत सुन्दर रचना

ZEAL ने कहा…

Beautifully expressed. Loving the creation .

कुमार राधारमण ने कहा…

इक बारिश वो थी
सूखी-सी
इक बारिश ये है
भीगी-सी
कहूं कैसे स्मृति हो आई
मेरे जीवन-धन
ऐसे ही!

prerna argal ने कहा…

आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (६) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आयें और अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ /आप हिंदी के सेवा इसी तरह करते रहें ,यही कामना हैं /आज सोमबार को आपब्लोगर्स मीट वीकली
के मंच पर आप सादर आमंत्रित हैं /आभार /