अनुमति जरूरी है

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

रविवार, 15 मई 2011

अब मोहब्बत के चिनार नही खिलते

जब तुम
अपने मन के
कैनवस पर
प्रीत के
रंग भरते हो
सच कहती हूं
मैं जीवन्त
हो जाती हूं
मगर जब तुम
उसी कैनवस पर
कुछ आडी तिरछी
रेखायें खींचते हो
मेरा वजूद उनमे
नेस्तनाबूद
हो जाता है
क्यों ऐसा करते हो?
जब जानते हो
मेरा वजूद
सिर्फ़ तुम्हारे
रंगों मे ही
सांस लेता है
तुम्हारा एक भी
गलत कदम
मुझसे मेरी
धडकन और
मेरी सांसे
छीन लेता है
और मै एक
निर्जीव ,
स्पन्दनहीन
तुम्हारे रंगों से
सजी बेहद
भयावह तस्वीर
बन जाती हूँ
जहाँ रंग भी
बिखर जाते हैं
मेरे वजूद की तरह
जबकि सुना था
रंग तो कभी
बेरंग नही होते
या तुम्हारे मन के
कैनवस पर अब
मोहब्बत के
चिनार नही खिलते

43 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

मेरा वजूद
सिर्फ़ तुम्हारे
रंगों मे ही
सांस लेता है
तुम्हारा एक भी
गलत कदम
मुझसे मेरी
धडकन और
मेरी सांसे
छीन लेता है
और मै एक
निर्जीव ,
स्पन्दनहीन
तुम्हारे रंगों से
सजी बेहद
भयावह तस्वीर
बन जाती हूँ

बेहतरीन रचना ..... सुंदर भावाभिव्यक्ति

Sunil Kumar ने कहा…

कैनवास पर आड़ी तिरछी रेखाएं ..........क्या बात है वंदना जी आपकी सोंच को नमन ,बधाई

बेनामी ने कहा…

अति सुंदर

बेनामी ने कहा…

बहुत खूब

बेनामी ने कहा…

बहुत खूब

Rajesh Kumari ने कहा…

ab mahabbat ke chinaar nahi khilte...bahut catchy sheershak hai par poori kavita hi lajabaab hai.mano bhaavon ko kis khoobsurti se kenvas par utara hai.badhaai Vandana ji.

Pranay ने कहा…

वंदना जी आपकी सोंच को नमन ,बधाई

akhtar khan akela ने कहा…

kenvaas ki bnti bigdti zindgi kaa khubsurat chitran bhtrin or jivant hai mubark ho .......akhtar khan akela kota rajsthan

रचना दीक्षित ने कहा…

मेरे वजूद की तरह
जबकि सुना था
रंग तो कभी
बेरंग नही होते
या तुम्हारे मन के
कैनवस पर अब
मोहब्बत के
चिनार नही खिलते.

वजूद को पहचानने की सुंदर कोशिश.

डॉ टी एस दराल ने कहा…

रंग तो कभी बेरंग नहीं होते । क्या बात कही है । बहुत बढ़िया ।

mridula pradhan ने कहा…

तुम्हारा एक भी
गलत कदम
मुझसे मेरी
धडकन और
मेरी सांसे
छीन लेता है......yahi to pyar hai jiske saath ham bandhe hote hain.

Rakesh Kumar ने कहा…

वंदना जी ,बहुत दार्शनिक अभिव्यक्ति है.
मेरी तो समझ से बाहर है.
अब आप ही समझा दीजियेगा कि
'मोहब्बत के चिनार' क्या होतें हैं ?

Ravi Rajbhar ने कहा…

Bahut khoob ,
shabd nahi he mere pass tarif ke liye.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यह रचना शायद FB पर पढ़ी है ...

बिखरे रंगों में वजूद को समेटने की तलाश ... अच्छी प्रस्तुति

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

मुझे भी यह रचना पहले पढ़ी हुई लगी।

संध्या शर्मा ने कहा…

क्यों ऐसा करते हो?
जब जानते हो
मेरा वजूद
सिर्फ़ तुम्हारे
रंगों मे ही
सांस लेता है..

सुंदर...नाजुक सी......... भावपूर्ण रचना...

PRIYANKA RATHORE ने कहा…

बेहतरीन रचना ..... सुंदर भावाभिव्यक्ति....बधाई

shikha varshney ने कहा…

ये पहले भी कहीं पोस्ट की है क्या अपने .पढ़ी हुई लग रही है.
बहुत सुन्दर है.

वन्दना ने कहा…

@शिखा वार्श्नेय

हां शिखा ये पहले फ़ेसबुक पर लगाई थी।

Deepak Saini ने कहा…

बहुत सुंदर काव्य रचना ..... बेहतरीन भावाभिव्यक्ति

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कभी रंग कभी बेरंग, कभी कोई स्थान ही नहीं रहता है, जीपन है यह।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत बढ़िया.

सादर

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

प्रेम के कितने ही रंग और कितने ही विम्ब आपने दिए हैं अपनी कविता के माध्यम से .. यह कविता भी सुन्दर है.. दिल को छू गई...

ज्योति सिंह ने कहा…

मेरा वजूद
सिर्फ़ तुम्हारे
रंगों मे ही
सांस लेता है
तुम्हारा एक भी
गलत कदम
मुझसे मेरी
धडकन और
मेरी सांसे
छीन लेता है
और मै एक
निर्जीव ,
स्पन्दनहीन
तुम्हारे रंगों से
सजी बेहद
भयावह तस्वीर
बन जाती हूँ kya baat hai vandana ji ek alag hi rang ki rachna hai ,sundar lagi

Kajal Kumar ने कहा…

वाह बहुत सुंदर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

या तुम्हारे मन के
कैनवस पर अब
मोहब्बत के
चिनार नही खिलते
--
शायद मँहगाई से प्रभावित हो गये हैं!
रचना बहुत सशक्त है!

kshama ने कहा…

Aprateem rachana! Baar,baar padhee...

राज भाटिय़ा ने कहा…

बेहतरीन रचना ओर सुंदर भावाभिव्यक्ति

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

बहुत बढ़िया ।

मेरा वजूद
सिर्फ़ तुम्हारे
रंगों मे ही
सांस लेता है
तुम्हारा एक भी
गलत कदम
मुझसे मेरी
धडकन और
मेरी सांसे
छीन लेता है

सुमन'मीत' ने कहा…

कई रंगों को उजागर करती हुई रचना .....बहुत ही सुन्दर

ehsas ने कहा…

बेहद खुबसुरत भाव लिए एक सुदंर सी रचना।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया रचना...

अरूण साथी ने कहा…

बहुत खूब...

prerna argal ने कहा…

dil ke dard ko aapne poori rachanaa main samet diyaa hai bahut hi achchi rachanaa.badhaai aapko.aek aek shabdon ka chyan .aabhaar

Maheshwari kaneri ने कहा…

मन के भा्वों की सुन्दर अभिव्यक्ति है ।

सदा ने कहा…

बहुत खूब कहा है ... ।

इमरान अंसारी ने कहा…

बहुत खूबसूरत अहसास है....प्यार का एक अलग सा रंग ....सुन्दर|

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

हृदय के कोमल अहसासों से भरी बेहद खूबसूरत रचना !

कुश्वंश ने कहा…

मेरा वजूद
सिर्फ़ तुम्हारे
रंगों मे ही
सांस लेता है
तुम्हारा एक भी
गलत कदम
मुझसे मेरी
धडकन और
मेरी सांसे
छीन लेता है
और मै एक
निर्जीव ,
स्पन्दनहीन
तुम्हारे रंगों से
सजी बेहद
भयावह तस्वीर
बन जाती हूँ

क्या कहू वंदना जी , आपके इस काव्य ने बेहद प्रभावित किया , अतुकांत कविता की धरोहर बननी चाहिए इसे, बधाई, अच्छी कविताओ के संकलन का प्रयाश कर रहा हूँ, शीघ्र ही आपसे इज़ाज़त मांगूगा

वाणी गीत ने कहा…

मन के कैनवास पर मुहब्बत के चिनार नहीं खिलते अब ...
बहुत खूब !

ZEAL ने कहा…

कैनवस पर अब
मोहब्बत के
चिनार नही खिलते...

Great expression !

.

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना!

Amrita Tanmay ने कहा…

भावमय शब्‍दों के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति