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रविवार, 7 मार्च 2010

टूटे टुकड़े

१) सुनो
कुछ ख्वाब बोये थे
तुम्हारे साथ जीने के

बंजर ज़मीन में


२) वेदनाओं के ताबूत में
आखिरी कील जो
लगायी तुमने

रूह को सुकून आ गया


३) तेरी चाहत की
बैसाखियों ने
अपाहिज बनाया मुझे

बस लाश बनना बाकी है


४) कैसे समेटेगा
इन बिखरे टुकड़ों को
जिन्हें कभी
तू ने ही ....................


५) बिन बादल बरसती हूँ
बिन आंसू के रोती हूँ

कहीं सैलाब में बह ना जाऊं


६) दस्तक कोई देता ही नही
आवाज़ कोई आती ही नही

शायद हवाओं का रुख बदल रहा है

31 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत मार्मिक रचना.

Jangbir Goyat ने कहा…

wah vandna ji wah,dard ko sabdo me kitne achhe se mala ki terh piroya hai. Jangbir Goyat 09215202231

Jangbir Goyat ने कहा…

wah vandna ji wah,dard ko sabdo me kitne achhe se mala ki terh piroya hai. Jangbir Goyat 09215202231

rashmi ravija ने कहा…

२) वेदनाओं के ताबूत में
आखिरी कील जो
लगायी तुमने
रूह को सुकून आ गया
ओह!!! कितनी वेदना छुपी है,इन शब्दों में...कमाल की क्षणिकाएं बुनी हैं इस बार...रोम रोम झकझोर देने वाली...बहुत सुन्दर...

Amit ने कहा…

achchha likha hai lekin isme kuchh kami si lagi hai ki jaise kuchh or bhi hona chahiye tha.

Apanatva ने कहा…

dil ko choo jane walee rachana .

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

भावुक कर देने वाली अच्छी सुन्दर रचना ...आभार

राकेश कौशिक ने कहा…

"वेदनाओं के ताबूत में
आखिरी कील जो
लगायी तुमने
रूह को सुकून आ गया"
इनती शिद्दत से चाहत - गजब. अंतर्मन की वेदनाओं को दर्शाती मार्मिक एवं अति-संवेदनशील क्षणिकाएं.

Udan Tashtari ने कहा…

गहरे उतरते भाव...उम्दा अभिव्यक्ति!!

vikas ने कहा…

हिला कर रख दिया इस कविता ने,
बहुत ही अच्छी पक्तियां.

विकास पाण्डेय
www.विचारो का दर्पण.blogspot.com

रश्मि प्रभा... ने कहा…

khoobsurat tukde

महफूज़ अली ने कहा…

यह सारे कविता रुपी जुड़े हुए टुकड़े ...बहुत अच्छे लगे......

शरद कोकास ने कहा…

टूटे है लेकिन खूबसूरत टुकड़े है यह ।

योगेश स्वप्न ने कहा…

sabhi kshanikayen adbhut.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

दस्तक कोई देता ही नही
आवाज़ कोई आती ही नही

शायद हवाओं का रुख बदल रहा है

त्रिवेणी की शैली में लिखी लाजवाब क्षणिकाएँ ..... बहुत कुछ कह जाती हैं सब .....

लिमटी खरे ने कहा…

bahut kam shabdon main bahut gahre bat kah de, badhai, bahut aacha prayas

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव के साथ आपने बेहद ख़ूबसूरत रचना लिखा है! बहुत अच्छा लगा!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

vedanaon ke tabut me akhiri keel jo lagai tumne dil ko sukun aa gaya.....
ye ekdam sach hai...Insan ki zindagi me ek aisa samay ata hai...jab...thokor khate khate...dard bhi dard nahi reh jata hai.

arvind ने कहा…

वेदनाओं के ताबूत में
आखिरी कील जो
लगायी तुमने
रूह को सुकून आ गया.

बहुत मार्मिक .

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

शरद जी की जबान में .. टूटे हैं पर खूबसूरत टुकड़े हैं यह !
सुन्दर प्रविष्टि ! आभार ।

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत मार्मिक अभिवयक्ति है। वन्दना आज कल बहुत सुन्दर रचनायें आ रही हैं तुम्हारी। शुभकामनायें

शहरोज़ ने कहा…

दस्तक कोई देता ही नहीं
शायद हवाओं का रुख़ बदल गया....

हर पंक्ति....हर लहजा..बेमिसाल....

sangeeta swarup ने कहा…

सारी क्षणिकाएं बहुत मार्मिक...दिल को छू गयीं...ताबूत वाली बहुत अच्छी लगी....

महिला दिवस की शुभकामनायें

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत ही मार्मिक हैं आपके सभी शब्द-चित्र!
बिल्कुल सटीक हैं!

राकेश जैन ने कहा…

kya Baat hai..amazing!

Renu Sharma ने कहा…

hi, vandana ji
bahut khoob .

sada ने कहा…

२) वेदनाओं के ताबूत में
आखिरी कील जो
लगायी तुमने
रूह को सुकून आ गया

गहरे भावों के साथ बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

kunwarji's ने कहा…

good

प्रीति टेलर ने कहा…

mujhe aapki ye rachana behad pasand aayi ....

neera ने कहा…

टूटे टुकड़े हैं तभी शायद दिल को चुभते हैं .. बहुत खूब!

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

amazing ..jsut amazing vandana .. ek ek line kuch na kuch kah rahi hai ..this is one of your best posts...

badhayi

vijay