पृष्ठ

अनुमति जरूरी है

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

रविवार, 15 जनवरी 2012

तुम्हारा हर दिन जन्मदिन सा गुजरता रहे






चिड़ियाएं तो चिड़ियाएं ही होती हैं
आँगन में फुदकती हैं
कभी मुंडेर पर 
तो कभी छज्जे पर
कभी पानी की बाल्टी पर
तो कभी आँगन में पड़े दानों पर
फुदकती हैं , चहचहाती हैं 
बेफिक्री से कैसे बतियाती हैं
ना डर ना खौफ ना कोई चाहत
बस एक पुरसुकून सी ज़िन्दगी 
उड़ने की चाह
परवाज़ भरने को आतुर
आँगन की शोभा बनी रहती हैं......जब तक रहती हैं 
जैसे ना जाने कितने कमल खिलखिला गए हों
जैसे सारा जहान उन्होंने अपनी
चहचहाट में ही संजो रखा हो 
हाँ .........तुम ऐसी ही तो 
मेरे आँगन की चिड़िया हो 
मेरी बिटिया .......
तुम्हारे  होने से मुझे 
घर - घर दिखता है
जिस दिन तुम नहीं होतीं
सारा दिन बोझिल सा गुजरता है
और तुम्हारे आते ही 
जैसे मन मधुबन खिल उठता है
सारे घर में बहार आ जाती है
सिर्फ तुम्हारे बोलने से
तुम्हारी बातों से
मेरे मन की कली- कली खिल जाती है 
और उस पल डर भी जाती हूँ
कुछ देर के लिए सहम भी जाती हूँ
ये सोच कर कि 
बस कुछ दिन और ........उसके बाद
फिर तुम दूसरे आँगन में रोंपी जाओगी 
वहाँ नए कँवल खिलाओगी
एक नया मधुबन बनाओगी
तब यहाँ मेरे आँगन की हर शय
तुम्हारा रास्ता निहारा करेगी
तुम्हारी चहचहाट को बहुत मिस करेगी
हाँ ..........जानती हूँ रीतियाँ तो निभानी होंगी
और तुम्हें भी एक नयी दुनिया बसानी होगी
मगर जब तक तुम हो मेरे पास
समेट लेना चाहती हूँ ......तुम्हारी हर बात को
हर चाह को , हर आहट को 
संजोना चाहती हूँ हर खुशबू को
आज तुमने २१ वसंत पूरे किये हैं 
चाहती हूँ तुम्हारा संपूर्ण जीवन 
वसंत सा खिलता रहे 
हर सुमन तुम्हारी बगिया की 
शोभा बनता रहे 
आसमाँ भी तुमसे रश्क करता रहे
यूँ हर पल तुम्हारा खुशियों से लरजता रहे
जो मुस्कान खिली है होठों पर
यूँ ही ता-उम्र कायम रहे 
मेरी बिटिया अब यही है कामना 
तुम्हारा हर दिन जन्मदिन सा गुजरता रहे 




दोस्तों 
आज मेरी बेटी का जन्मदिन है और उसे आप सबके आशीर्वाद और दुआओं की भी जरूरत है .......आखिर इतना तो उसका हक़ बनता ही है अपने सभी अंकल आंटी पर :)))

उसी वक्त पर पब्लिश रही हूँ जिस वक्त उसका जन्म हुआ था ...........बस कुछ भी कहने को बचा नहीं है सिर्फ भाव विभोर हूँ शायद एक माँ के लिए कुछ कहना आसान भी नहीं होता .........

बुधवार, 11 जनवरी 2012

इंतज़ार की सिलाई नही होती



तुम मुझे बातो के बताशे खिलाते हो 
अभी आऊँगा थोडी देर मे
तुम से ढेर सी बातें करूंगा
कह जाते हो और मै
आस की ऊँगली थामे
खडी रहती हूँ चौखट पर
एकटक दरवाज़े पर
निगाह टिकाये
जेठ की तपती दोपहर मे
जानते हो इतनी देर मे
एक इंतज़ार की चादर बुन लेती हूँ
कभी देखा है
इंतज़ार के धागो को चीरकर
देखना कभी
हर धागे मे
तुम और तुम्हारा इंतज़ार
ही नज़र आयेगा
जानती हूँ तुम नही आओगे
पता होता है मगर फिर भी
आस का दीपक
जलाये रखती हूँ
कभी करना तुम भी कोशिश
कभी करना तुम भी इंतज़ार
देखना पोर पोर मे
सुईयाँ गुबी मिलेंगी
क्योंकि
इंतज़ार  की सिलाई नही होती
सिर्फ़ गुदाई होती है………

शनिवार, 7 जनवरी 2012

सोचा था वर्णित हो जाऊँगी

सोचा था वर्णित हो जाऊँगी
मौन मुखरित हो जायेगा
वेदना पुलकित हो जायेगी
सुना था………………
एक अरसे के बाद 
मौसम फिर पलटता है
ज्वार फिर उठते हैं
ज़िन्दगी फिर मचलती है
मगर ऐसा नही होता
जिस तरह ………
सफ़र मे साथ छूटने के बाद
दोबारा मुसाफ़िर नही मिला करते
उसी तरह ………
सूखी हुई डालियाँ दोबारा अभिसिंचित नही होतीं
शायद तभी
 बंद कालकोठरियाँ के नसीब मे 
रौशनी के कतरे नहीं लिखे होते हैं……………

सोमवार, 2 जनवरी 2012

आपकी पसंद आपकी नज़र......गागर में सागर हैं साझे ब्लोग्स

लीजिये फिर आ गयी आपकी पसंद आपकी नज़र.........जी हाँ इस बार के जनवरी अंक में गर्भनाल पत्रिका में आपके साझा ब्लोग्स की चर्चा है जो इस प्रकार है .......


ये रहा गर्भनाल पत्रिका का लिंक ---------पेज २२ -२३ पर आप पढ़ सकते हैं ब्लॉग चर्चा 
http://www.garbhanal.com/Garbhanal%2062.pdf

 www.garbhanal.com 


जो भी लिंक खुले उसे ओपन करके पढ़ सकते हैं और यदि न खुले तो यहाँ मैंने लगा ही दी है पूरी चर्चा 
https://mail-attachment.googleusercontent.com/attachment?ui=2&ik=83ac09a125&view=att&th=134a21aacb6d9748&attid=0.1&disp=inline&safe=1&zw&saduie=AG9B_P-sqdOOtE1oq5h2pgM3cTYR&sadet=1325569955678&sads=E_jr8uaVNC7pnS84HRp-2IRkNdc&sadssc=1


या 


https://mail-attachment.googleusercontent.com/attachment?ui=2&ik=83ac09a125&view=att&th=1341778c99fea601&attid=0.1&disp=inline&realattid=f_gvw14tmo0&safe=1&zw&saduie=AG9B_P-sqdOOtE1oq5h2pgM3cTYR&sadet=1325500616235&sads=DZ_LoYkuoMFYqIX0_WIJEZ150tc&sadssc=1

पत्रिका में जगह की कमी की वजह से सभी साझे ब्लोग्स को जगह नहीं दी जा सकी उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ 


गागर में सागर हैं साझे ब्लोग्स 





आज हम कुछ साझा ब्लोग्स की चर्चा करेंगे जिन्होंने अपना एक खास मुकाम बनाया है क्यूँकि इनके माध्यम से काफी नए रचनाकारों को एक प्लेटफ़ॉर्म मिल गया जहाँ वो अपने विचारों को सबसे साझा कर सकते हैं और साथ ही बाकी ब्लोगर्स को भी काफी नए नए ब्लोगर्स की रचनायें एक ही जगह पढने को मिल जाती  हैं . आइये चलते हैं आज के पहले साझा ब्लॉग की तरफ ..........


http://www.sahityapremisangh.com/साहित्य प्रेमी संघ ब्लॉग के संचालक हैं सत्यम शिवम् . इतने कम समय में उन्होंने इस साझा मंच की एक विशेष पहचान  बनाई है उनके द्वारा लिखे आलेख और कवितायेँ विभिन्न अख़बारों में समय- समय पर प्रकाशित हो रहे हैं. नए रचनाकारों को ये मंच प्रदान करके सत्यम जी ने उन्हें तो एक पहचान ही दी है साथ ही आज उनके इस मंच से 52 रचनाकार जुड़ गए हैं और इतने कम समय में इतनी पहचान बनाना किसी उपलब्धि से कम नहीं.

http://www.rachanakar.org/ रचनाकार ......रवि रतलामी जी द्वारा संचालित एक ऐसी ई पत्रिका है जो यूनिकोड  पर आधारित पहली ई -पत्रिका है जिसके ५०००० से ज्यादा नियमित पाठक हैं और १००० से ज्यादा ग्राहक . अब तक हर विधा में ३२०० से ज्यादा रचनायें प्रकाशित हो चुकी हैं . रचनाकार में अपने सस्वर विडिओ भी भेजे जा सकते हैं जो उसी रूप में प्रकाशित भी होते हैं . हर विधा के माहिर यहाँ अपने विचार प्रस्तुत करते हैं फिर चाहे पुस्तकों की समीक्षा हो या साहित्यिक गतिविधियाँ , व्यंग्य , संस्मरण, नाटक, कविता, आलेख, कहानियां , लघुकथाएं , ग़ज़ल चुटकुले, बाल - कथाएँ,उपन्यास, निबंध सबको यहाँ स्थान मिला है और एक ही जगह सबको स्थान मिलने पर पाठक के लिए सबको पढना आसान हो जाता है और यही इसकी लोकप्रियता की कुंजी है. 




http://www.nukkadh.com/ नुक्कड़ ......अविनाश वाचस्पति जी द्वारा संचालित ब्लॉग है जिसमे हर तरह की गतिविधि का अवलोकन किया जा सकता है फिर चाहे वो साहित्यिक हो, राजनितिक को, सूचनार्थ हो , या ब्लोगिंग से सम्बंधित . जैसे गली के नुक्कड़ पर जाकर सारे जहान की जानकारियां मिल जाती हैं उसी तरह इस नुक्कड़ पर आकर कहाँ क्या हो रहा है , कहाँ कौन सा आयोजन हो रहा है, किसे पुरस्कार मिला इत्यादि सारी जानकारियां उपलब्ध रहती हैं . ब्लॉगजगत की हर छोटी- बड़ी गतिविधि की यहाँ जानकारी प्राप्त कर सकते हैं .


http://bhadas.blogspot.com/ भड़ास .........जैसा नाम वैसे गुण .........इसी को चरितार्थ करता है ये यशवंत सिंह जी द्वारा संचालित ब्लॉग .........जो आप कहीं नहीं कह पाते यहाँ आकर कह दीजिये.........इनका कहना है यदि आपके गले में कुछ अटक गया है तो उगल दीजिये मन हल्का हो जायेगा.........

भड़ास उन आम हिंदी मीडियाकर्मियों की आवाज है जो आनलाइन माध्यम से जुड़े हैं या आफलाइन, मसलन अखबार, टीवी और मैग्जीन आदि से संबद्ध हैं। ये उनकी भी आवाज है जो दिल में एक हिंदी मीडियाकर्मी बनने की हसरत रखे हैं लेकिन उन्हें अभी ठोकरें खानी पड़ रही हैं। ये उनकी भी आवाज है जो हिंदी वाले हैं, दिल वाले हैं लेकिन शहर के खेल-तमाशे में आकर खुद को तनहा पाते हैं। ऐसे सभी लोगों के दिल की धड़कन है भड़ास




http://allindiabloggersassociation.blogspot.com/ आल इंडिया ब्लोगर असोसिएशन  सलीम खान जी द्वारा संचालित इस ब्लॉग ने बहुत जल्द पाठकों में अपनी पैठ बनाई है . सर्व धर्म समभाव का दर्शन इनके ब्लॉग पर होता है और महिलाओं का विशेष आदर किया जाता है जिसका उदाहरण यही है कि इस ब्लॉग कि अध्यक्षा एक महिला ही हैं इसके अलावा इन्होने महान ममता मंडल बनाया है जहाँ महिलाओं को विशेषाधिकार प्राप्त हैं जिसके द्वारा ये सन्देश देना चाहते हैं कि सभी को महिलाओं को उचित मान सम्मान देना चाहिए जिसकी वो वास्तविक हक़दार हैं.


http://www.hindisahityamanch.com/ हिंदी साहित्य मंच हिंदी का एक विरवा लगाये जाने के उद्देश्य से , हिंदीभाषी राष्ट्र की कल्पना को साकार करने  के उद्देश्य से हिंदी साहित्य मंच का गठन  हुआ . हिंदी साहित्य मंच पर कौन सी ऐसी विधा है जिसका अलंकरण ना हुआ हो फिर चाहे गीत हों , अकविता हो ,साक्षात्कार हों या समीक्षा हो ,पुस्तक समीक्षा हो या संस्मरण हों, व्यंग्य हों या साहित्यिक हलचल, हर विधा पर यहाँ लिखा गया है जो इस बात को इंगित करता है कि हिंदी साहित्य मंच किस तरह जी जान से जुटा हुआ है हिंदी को उसका मुकाम दिलाने के लिए. और यही इसकी सफलता का द्योतक है .


आज वटवृक्ष ब्लॉगजगत में किसी परिचय का मोहताज नहीं. इतने अल्प समय में ऐसी ख्याति और ऐसी उपलब्धि शायद ही किसी को मिली हो .वटवृक्ष का सञ्चालन रश्मि प्रभा जी और रविन्द्र प्रभात जी के सम्मिलित प्रयासों द्वारा किया जाता है. यहाँ तक कि वटवृक्ष ने इतना अल्प समय में एक त्रैमासिक पत्रिका भी निकाली है जिसका विमोचन हिंदी भवन में अभी ३० अप्रैल को हुआ जो इसकी सफलता को इंगित करता है. आज हर लेखक , कवि और साहित्यकार अपने को वटवृक्ष से जुड़ा महसूस करके गौरान्वित महसूस करता है. हर लेखक का यहाँ स्वागत है उसकी लिखी रचनाएँ सब पाठकों तक जल्द से जल्द पहुँचती हैं ना केवल पहुँचती हैं बल्कि नए- नए लोगों से जुड़ने का भी मौका मिलता है साथ ही नए लेखकों को पढने का भी........जब इतनी खूबियाँ एक ही जगह उपलब्ध हों तो कौन नहीं चाहेगा ऐसे मंच से जुड़ना. 


http://bhartiynari.blogspot.com/ भारतीय नारी ब्लॉग अभी इसी जुलाई माह में बना है और जैसा कि नाम से पता चलता है ये ब्लॉग भारतीय नारियों की समस्याओं, उनकी उलझनों, उनके अधिकारों इत्यादि पर विचार विमर्श करता है . आज स्त्री विमर्श एक सबसे अहम् हिस्सा है किसी भी लेखक के लिए और शिखा कौशिक  द्वारा संचालित ये ब्लॉग स्त्रियों की दयनीय दशा , उन्हें व्यवहार , उनकी कैसे मदद की  जाये, शिक्षा के महत्त्व और भ्रूण हत्या को कैसे रोका जाये जैसे मुद्दों पर विचार विमर्श करती है यहाँ स्त्री हो या पुरुष हर कोई अपने विचार प्रस्तुत कर सकता है मगर उसकी भाषा मर्यादित होनी चाहिए . आज भारतीय नारी ब्लॉग ने भी अपनी एक विशिष्ठ पहचान बनानी शुरू कर दी है.




http://blogworld-rajeev.blogspot.com/ ब्लॉग वर्ल्ड एक ऐसा अग्रीगेटर  है जहाँ आपको सभी लेखकों की पोस्ट आसानी से पढने को मिल जाएँगी . जो भी इस ब्लॉग से जुड़ना चाहता है सिर्फ कमेन्ट बॉक्स में अपने ब्लॉग का url दे दे उसे जोड़ दिया जाता है और फिर आसानी से सब पाठकों तक उस ब्लॉग की पहुँच हो जाती है इसके अलावा ब्लॉग वर्ल्ड एक पोस्ट के माध्यम से अपने से जुड़े लेखकों का भी परिचय प्रस्तुत करता रहता है जिससे उस लेखक के विचार और उसके ब्लॉग की पहुँच भी सब पाठकों तक आसानी से हो जाती है. 


http://blogsinmedia.com/ ब्लोग्स इन मीडिया जैसा कि नाम से विदित हो रहा है मीडिया में जिन भी ब्लोग्स का जिक्र होता है उस खबर को सबसे पहले पाठकों तक पहुँचाने का काम ब्लोग्स इन मीडिया कर रहा है . अपनी तरह का अनोखा ब्लॉग है पूरे देश में कौन से अख़बार में किस ब्लॉग की चर्चा की गयी उसे खोजना और यहाँ उसकी जानकारी देना ये कोई कम बात नहीं है और अपने इस कार्य में ये ब्लॉग सफल हो रहा है. 


http://aakharkalash.blogspot.com/  आखर कलश हिंदी साहित्य को दिशा देता एक सृजनात्मक ब्लॉग है जो नरेन्द्र व्यास जी द्वारा संचालित हैं उनके अलावा पंकज त्रिवेदी , सुनील गज्जानी जी भी इसके संपादक मंडल में शामिल हैं. हिंदी के नए- नए कवियों को आमंत्रित करना और उनकी बहुमूल्य कृतियों से पाठकों को लाभान्वित करना ही इनके ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य है जिसे ये सब मिलकर बखूबी  अंजाम दे रहे हैं . जो अपने बारे में ये कहते हैं ----
आखर कलश का प्रकाशन पूणरूप से अवैतनिक किया जाता है। आखर कलश का उद्धेश्य हिन्दी साहित्य की सेवार्थ वरिष्ठ रचनाकारों और उभरते रचनाकारों को एक ही मंच पर उपस्थित कर हिन्दी को और अधिक सशक्त बनाना है। और आखर कलश के इस पुनीत प्रयास में समस्त हिन्दी प्रेमियोंसाहित्यकारों का मार्गदर्शन और सहयोग अपेक्षित है।





http://www.janokti.com/ जनोक्ति . कॉम के बारे में जयराम विप्लव जी कहते हैं -------------

गस्त 09 में ‘जनोक्ति वेब मीडिया’ अस्तित्व में आया और वेब पर


 हिंदी के पाठकों को स्तरीय मानसिक खुराक परोसने के लक्ष्य को


 लेकर  ” जनोक्ति.कॉम” JANOKTI.COM का शुभारम्भ किया | 


महज एक साल से भी कम समय में  इस लक्ष्य के सैकड़ों भागीदार 


बन गए | 600 से अधिक पंजीकृत लेखक सहभागी | रोजाना हजारों 


पाठक और उनकी सैकड़ों टिप्पणियाँ हमारे मनोबल को बढाती हैं |


एक दुनिया देखी हमने, जहां अभिव्यक्ति विकृति की संस्कृति में ढल रही है .हिंदी समाज की विडंबना हीं कहिये , सामाजिक सरोकारों पर मूत्र त्याग कर व्यक्तिगत स्वार्थों में लिप्त हो लेखन कर्म को वेश्यावृत्ति से भी बदतर बना दिया गया है . ऐसे समय में अंतरजाल में शीघ्रता से फ़ैल रहे हिंदी पाठक में वैकल्पिक मीडिया या यूँ कहें न्यू मीडिया के प्रति उत्साह बढ़ रहा है | जब विचारों को किसी वाद या विचारधारा का प्रश्रय लेकर ही समाज में स्वीकृति मिलने का प्रचलन बन जाए तब व्यक्तित्व का निर्माण संभव नही. इतिहास साक्षी है कि कलम और क्रांति में चोली दामन का साथ है. अब कलम को बाज़ार का सारथि बना दिया गया. ऐसे में किसी क्रांति की भूमिका कौन लिखेगा? तथाकथित कलम के वाहक बाज़ार की महफिलों में राते रंगीन कर रहे है.बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नही हो सकता.तो अब जबकि  ’न्यू मीडिया यानि वेब मीडिया’  के रूप में सामानांतर विकल्प  उभरा है तो हमारी जिम्मेदारी है कि छोटी लकीरों के बरक्स कई बड़ी रेखाए खिची जाएं. बाज़ारमुक्त और वादमुक्त हो समाजहित से राष्ट्रहित की ओर प्रवाहमान लेखन समय की मांग है. “जनोक्ति” परिवार ओज और धार से बनी हर एक लेखनी को आमंत्रित करता है ............
जनोक्ति अपना परिचय आप बन गया है .


http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/ राजभाषा हिंदी मनोज जी द्वारा संचालित ऐसा ब्लॉग है जहाँ हिंदी के बड़े बड़े कवियों की कवितायेँ तो प्रदर्शित होती ही हैं बल्कि साथ में उदीयमान और स्थापित कवियों की कविताओं को भी वैसा ही सम्मान मिलता है.हर तरह की विधा का यहाँ रसास्वादन  किया जा सकता है . 



http://yaadonkaaaina.blogspot.com/     हिन्दुस्तान का दर्द एक ऐसा ब्लॉग है जो अपने बारे में कहता है .............

अगर आप करते है सार्थक लेखन और आप उठा सकते है किसी भी मुद्दे पर अपनी आवाज़ को,तो यह मंच है आपके लिए, आप अपनी रचनाओं कोmr.sanjaysagar@gmail.comपर मेल करें उन्हें यहाँ प्रकाशित किया जायेगा..
देश की राजनीति को लग चुका है अभिशाप ,गुरु कर रहे है शिष्यों के साथ पाप,अस्पतालों मे हो रही है बच्चों की हेराफेरी,पुलिस को जीने के लिए जरुरी है घूसखोरी,खेलो मे खिलाडियों को रास आ रही है मैच फिक्सिंग , धार्मिक पत्रों के कलाकारों मे बढ रही है किसिंग !जनता से ख़रीदे जा रहे है वोट , संसद मे भी वोट के बदले नोट !देश के इसी तरह के गर्मागर्म मुद्दों पर आधारित ''हिन्दुस्तान का दर्द'' आपको मौका देता है अपनी बात कहने का! तो खामोश मत रहिये अपनी बात कहिये.....अगर आप भी इस ब्लॉग पर लिखना चाहते है तो अपना ईमेल अकाउंट आपके फ़ोन नंबर और पते के साथ हमें-mr.sanjaysagar@gmail.comपर भेजें और अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें-९९०७०४८४३८
यथा नाम तथा गुण को प्रतिपादित करता है ये ब्लॉग 


प्यारी माँhttp://pyarimaan.blogspot.com/ जैसा कि नाम से विदित है ...........पूर्ण रूप से माँ को समर्पित ये ब्लॉग अनवर जमाल जी द्वारा संचालित है जिसमे हर वो इंसान जिसके मन में संवेदनाएं हैं , जिसकी आत्मा अभी मृतप्राय नहीं हुई है और जो देख सकता है , महसूस कर सकता है दूसरे का दर्द और एक माँ की ज़िन्दगी में क्या अहमियत होती है वो यहाँ अपने विचारों को चाहे आलेख चाहे कविता किसी भी विधा में रख सकता है और सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस ब्लॉग से ज्यादातर नारी जाति ही जुडी है जो यहाँ समय - समय पर अपनी संवेदनाओं को उकेरती रहती है. 


http://www.apnimaati.co'अपनी माटी' वेबपत्रिका साहित्यिक गतिविधियों का एक जीता जागता उदाहरण है  'अपनी माटी' एक ऐसा वेब मंच हैं ,जहां गैर राजनैतिक और धर्म निरपेक्षता की विचारधारा को ध्यान में रखते हुए हम साझेदारी में रचनाओं का प्रकाशन करते हैं.एक पंक्ति में कहा जाए तो कला,साहित्य,रंगकर्म,सिनेमा,समाज,संगीत,पर्यावरण से जुड़े लेख,बातचीत,समाचार,फोटो,साहित्यिक रचनाएँ,रपट छपने और पढ़ने हेतु एक साझा मंच है .यहाँ उन सभी कार्यकर्ताओं और कलाधर्मियों का स्वागत रहता है जो अपने परिवेश के सार्थक विचारों,घटनाओं और चर्चाओं को यहाँ अपने लोगों तक पहुंचाने का मन रखते हैं.



इस प्रकार साझा ब्लोगों ने ब्लॉगजगत में अपनी एक पहचान कायम की है साथ ही सभी ब्लोगर्स को जुड़ने का मौका दिया है जो ये दर्शाता है कि हिंदी को प्रोत्साहित करने में हर इन्सान अपना सहयोग किसी भी रूप से दे सकता है .

रविवार, 1 जनवरी 2012

जो तुमने छुआ मन मेरा





१)

मैं बन के कली खिल गयी

बिन सिंगार संवर गयी

जो तुमने छुआ मन मेरा

मै मेघ मल्हार बन गयी

२)

कभी रंग मेरा निखर गया

कभी रूप मेरा बदल गया

जो तुमने छुआ मन मेरा

आईना भी सिहर उठा



ये धूप का रंग उड़ गया

जो रूप पर मेरे चढ़ गया

जो तुमने छुआ मन मेरा

इन्द्रधनुष बिखर गया 


३)

तब प्रीत का सिन्दूर लगा लिया

माँग में अपनी सजा लिया

जो तुमने छुआ मन मेरा

दुल्हन सा ये खिल उठा 




4)

कभी आधारशिला बन गया

कभी नव पल्लव सा खिल गया

जो तुमने छुआ मन मेरा

हरसिंगार सा खिल गया


5)


कभी ओस सा झर गया

कभी मुख प्रदीप्त कर गया

जो तुमने छुआ मन मेरा

सांझ को भी सुबह कर गया


6)


कभी बसंत कहीं खिल गया

कभी सावन कहीं बरस गया

जो तुमने छुआ मन मेरा

आस का हर बीज उपज गया 


7)


कभी सितार सा बज उठा

कभी गीत नया बन गया

जो तुमने छुआ मन मेरा

इक राग दरबारी बन गया


8)


कभी गीता  के श्लोकों सा 

कभी कुरान की आयतों सा 

जो तुमने छुआ मन मेरा

मानस की चौपाई सा सज गया 


9)


मैं वेगवती नदी बन गयी

जो सागर का  तट मिला 

जो तुमने छुआ मन मेरा

कश्ती को किनारा मिल गया 




10)

कभी बंसी सा बज गया

कभी राधा चरण सा लिपट गया

जो तुमने छुआ मन मेरा

माखन चोर सा बन गया 


11)

जो नज़र से छुआ तूने

चाँदनी भी छिटक गयी

जो तुमने छुआ मन मेरा

वो रास्ता भी भटक गयी 


12)

कभी दिल की किताब बन गयी

कभी नज़रों का ख्वाब बन गयी

जो तुमने छुआ मन मेरा

मैं आफ़ताब बन गयी 


13)






प्रेम का वो रंग चढ़ा

रोम - रोम में उतर गया

जो तुमने छुआ मन मेरा

राधा कृष्ण सा बन गया