चिड़ियाएं तो चिड़ियाएं ही होती हैं
आँगन में फुदकती हैं
कभी मुंडेर पर
तो कभी छज्जे पर
कभी पानी की बाल्टी पर
तो कभी आँगन में पड़े दानों पर
फुदकती हैं , चहचहाती हैं
बेफिक्री से कैसे बतियाती हैं
ना डर ना खौफ ना कोई चाहत
बस एक पुरसुकून सी ज़िन्दगी
उड़ने की चाह
परवाज़ भरने को आतुर
आँगन की शोभा बनी रहती हैं......जब तक रहती हैं
जैसे ना जाने कितने कमल खिलखिला गए हों
जैसे सारा जहान उन्होंने अपनी
चहचहाट में ही संजो रखा हो
हाँ .........तुम ऐसी ही तो
मेरे आँगन की चिड़िया हो
मेरी बिटिया .......
तुम्हारे होने से मुझे
घर - घर दिखता है
जिस दिन तुम नहीं होतीं
सारा दिन बोझिल सा गुजरता है
और तुम्हारे आते ही
जैसे मन मधुबन खिल उठता है
सारे घर में बहार आ जाती है
सिर्फ तुम्हारे बोलने से
तुम्हारी बातों से
मेरे मन की कली- कली खिल जाती है
और उस पल डर भी जाती हूँ
कुछ देर के लिए सहम भी जाती हूँ
ये सोच कर कि
बस कुछ दिन और ........उसके बाद
फिर तुम दूसरे आँगन में रोंपी जाओगी
वहाँ नए कँवल खिलाओगी
एक नया मधुबन बनाओगी
तब यहाँ मेरे आँगन की हर शय
तुम्हारा रास्ता निहारा करेगी
तुम्हारी चहचहाट को बहुत मिस करेगी
हाँ ..........जानती हूँ रीतियाँ तो निभानी होंगी
और तुम्हें भी एक नयी दुनिया बसानी होगी
मगर जब तक तुम हो मेरे पास
समेट लेना चाहती हूँ ......तुम्हारी हर बात को
हर चाह को , हर आहट को
संजोना चाहती हूँ हर खुशबू को
आज तुमने २१ वसंत पूरे किये हैं
चाहती हूँ तुम्हारा संपूर्ण जीवन
वसंत सा खिलता रहे
हर सुमन तुम्हारी बगिया की
शोभा बनता रहे
आसमाँ भी तुमसे रश्क करता रहे
यूँ हर पल तुम्हारा खुशियों से लरजता रहे
जो मुस्कान खिली है होठों पर
यूँ ही ता-उम्र कायम रहे
मेरी बिटिया अब यही है कामना
तुम्हारा हर दिन जन्मदिन सा गुजरता रहे
दोस्तों
आज मेरी बेटी का जन्मदिन है और उसे आप सबके आशीर्वाद और दुआओं की भी जरूरत है .......आखिर इतना तो उसका हक़ बनता ही है अपने सभी अंकल आंटी पर :)))
उसी वक्त पर पब्लिश रही हूँ जिस वक्त उसका जन्म हुआ था ...........बस कुछ भी कहने को बचा नहीं है सिर्फ भाव विभोर हूँ शायद एक माँ के लिए कुछ कहना आसान भी नहीं होता .........
