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गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

उड़ा क्यूँ है दुपट्टा मलमल का

आज क्यूँ है खड़ी, ये उदासी बड़ी
सुलगे क्यूँ हैंअरमान, बेबसी है कड़ी

ज़िन्दगी दुल्हन बनी, बेजारी की घडी
राख क्यूँ है पड़ी, मासूमियत है झड़ी

रूह क्यूँ है मरी, बेसाख्ताअट्टहास करी
लाश पे लाश पे लाश, आखिर क्यूँ है गिरी

कब्र में क्यूँ है दबी, वो खामोश सिसकी
अनारकली जब भी चिनी, क्यूँ है जिंदा चिनी

रात क्यूँ है खड़ी, इंतज़ार में हर पल मरी
सुबह आएगी बड़ी, क्यूँ ऐतबार में पड़ी

बेटी क्यूँ है जनी, सुन सुन माँ रो ही पड़ी
बलात्कार की शिकार, चक्रव्यूह में क्यूँ है फँसी

रात क्यूँ है आधी रही, रवायत जारी रही
बात आधी रही, राजनीति की मारी रही

शिकन क्यूँ है तारी रही, किस बात की खुमारी रही 
बेहयाई के दौर की, कैसी ये गैंगवारी रही

उड़ा क्यूँ है दुपट्टा मलमल का,आँखों में यही सुर्ख लाली रही
सोच में सारी खुद्दारी रही , घोड़े पे क्यूँ न लगाम लगाई गयी 

©वन्दना गुप्ता

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