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गुरुवार, 8 मार्च 2018

मुँह फाड़ हँसती लड़की

मुँह फाड़ हँसती लड़की
आज बन चुकी है
आश्चर्य का प्रतीक

हँसी का फूटता फव्वारा
जब गुजरता है कानों के बीहड़ से गुजरकर
ह्रदय की संकुचता तक
मुड़कर ठहरकर देखी जाती है
कभी ईर्ष्या से
तो कभी अचम्भे से

कल बेशक अशोभनीय था
उसका मुँह फाड़ हँसना

तो क्या हुआ
बदली है सभ्यता
मगर सोच तो नहीं

खटकती है वो आज भी
आँख में किरकिरी सी

पहले उपदेशों से होती थी ग्रस्त
और आज तमगों से
कितनी बेहया है
चालू दिखती है
तेज तर्रार  होगी
घाट घाट का पानी पीये दिखती है 

मगर छोड़ चुकी है वो परवाह करना तमगों की
क्योंकि
उसके हवा में उड़ते बाल
आँखों में ख़्वाबों का संसार
और मुँह फाड़ कर हँसने से खिली उसकी सुन्दरता
आज किसी पर्याय की मोहताज नहीं

उन्मुक्तता का भी अपना दर्शन होता है...

3 टिप्‍पणियां:

Arun Roy ने कहा…

achchi kavita hamesha ki tarah

sadhana pal ने कहा…

बहुत उम्दा पक्तियां.

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Pavitra Kumar ने कहा…

बहुत ही aachi तरीके से कविता को प्रस्तुत किया hai aapne.. Best Quotes in Hindi
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