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रविवार, 17 अगस्त 2014

दिलदार यार प्यारे



काश बना लेता अपनी बावरिया 
मैं तो नाचती फिर बिन पैजनिया


धर अधरन पर प्यारी मुरलिया 
तिरछी चितवन तीर चलाकर 
सुध  हर लेते बाँके बिहारिया 
तो ले लेती श्याम तोरी बलैयाँ 

काश बना लेता अपनी बावरिया 
मैं तो नाचती फिर बिन पैजनिया

जो बन जाते रंगरेजिया साँवरिया 
श्याम रंग में रंग कर चुनरिया 
नख से शिख तक जोगन बनकर 
प्रीत भी चढ़ती तेरी अटरिया 

काश बना लेता अपनी बावरिया 
मैं तो नाचती फिर बिन पैजनिया


4 टिप्‍पणियां:

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

श्याम रंग के आगे और कोई रंग नहीं टिकता !

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

वाह ... मनमोहक भाव
शुभकामनाएं

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह सुंदर

Smita Singh ने कहा…

सबसे सलोना रंग श्याम तेरा है।
बहुत सु दर