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बुधवार, 3 जुलाई 2013

ओ मेरे !……………8

दर्द कभी हुआ ही नहीं ..............हा हा हा ............सोच रहे होंगे फिर ये समंदर कैसे बना ............अरे जानां !!! कुछ फसलों को उगाने के लिए प्रेम का बीज रोंपा जाता है जिसमे से हरी हरी  कोंपलें जब फूटा करती हैं विरह की तब जाकर दर्द का जन्म हुआ करता है और दर्द को पैदा करने के लिए मौत से इश्क किया करती हूँ .............इसलिए दर्द होता नहीं है पैदा किया जाता है ........खुद की आहुति देकर , अपनी रूह को नोंच खसोट कर बीजना पड़ता है उसमे इश्क का कीला ........उम्र भर के लिए , एक जन्म के लिए नहीं ..............इस कायनात के आखिरी छोर तक के लिए ...............तब जाकर दर्द की खिलखिलाती , लहलहाती पैदावार होती है जो उम्र की चाशनी में डूबा डूबा कर , तीखी लहर बन लहू में दौड़ा करती है और इश्क की कहानी मुकम्मल होती है ..........जानां !!!

किसान हूँ ना किसना फिर भी बिना खेती के उपकरणों के पैदावार करना और बिना अधरों पर वंशी धरे खुद को सम्मोहित करने का हुनर जान गयी हूँ ........... रिस रिस कर तपती पटरी पर ज़िन्दगी की रेल धडधडाती गुजर रही है बिना आंच ताप को महसूस किये और मोहब्बत के जश्न भी मना रही है सिगार सी सुलग सुलग कर ...........क्या कभी मेरे साथ एक कश तुम भी लेने आओगे ........क्या कभी तुम कटौथी में गंगाजल भर एक घूँट भरोगे और करोगे इश्क का समंदर पार .............मेरी तरह !!!!!ये एक सवाल है तुमसे ..........क्या दे सकोगे कभी " मुझसा जवाब " ............ओ मेरे !

12 टिप्‍पणियां:

Dr. Shorya ने कहा…

बेजोड़ , सुंदर रचना, शब्दों का चयन अतिसुंदर , आपकी लेखनी को बहुत शुभकामनाये,

यहाँ भी पधारे

http://shoryamalik.blogspot.in/2013/06/blog-post_8682.html

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपका गद्य भी काव्य का आनन्द देता है!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

एक ही सांस में पढ़ गया ...
शब्दों का खेल या भावों का झंझावात ...

ashokkhachar56@gmail.com ने कहा…

हमेशा की तरह बहुत सुंदर

HARE RAM MISHRA ने कहा…

किशना .. भी किसान ही है ... अद्भुत

sushmaa kumarri ने कहा…

bejod abhivaykti..

Kailash Sharma ने कहा…

भावों में अपने साथ बहा ले जाती बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

सुंदर सृजन,बहुत उम्दा प्रस्तुति,,,

RECENT POST: जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें.

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुंदर रचना,

Akhil ने कहा…

uttam..dhaarpravaah gartimaan kriti..bahut sundar.

रचना दीक्षित ने कहा…

मनोभावों को बड़े मनोयोग से संजोया है. काव्य की अनुभूति देता सुंदर गद्य प्रस्तुति.

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना