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शनिवार, 15 जून 2013

हसरतों के लकड़बग्गे ..........

मेरी नीम बेहोशी में 
बडबडाती आवाज़ का 
शब्द बने तुम 
और उतर गए 
ग्लूकोज की बोतल में 
चेतना को जागृत करते हुये
बूँद बूँद शिराओं में 
गूंजता तुम्हारा संगीत 
आत्मा को जिला रहा था 
सांसों को ठहरा रहा था 
एक अदृश्य हाथ 
चमत्कृत सा 
माथे को सहला रहा था 
जीवन तंतु बिखराव से 
जुड़ाव की ओर जा रहा था 
सम्मोहन का 
विष बाण  तारी  था 
और एक ही झटके में 
सांस की माला बिखर गयी 
सम्मोहन टूट गया 
जब धारा  का प्रवाह उल्टा हो गया 
जब ग्लूकोज की खाली बोतल 
लहू के कतरे कतरे से भर गयी 
सिर्फ सूईं गड़ी रह गयी जिस्म में 
और मेरी बेहोशी टूट गयी 

अब जीने को या कहो हंसने को 
मजबूर हैं 
हसरतों के लकड़बग्गे ..........

15 टिप्‍पणियां:

subhash Bhadauria ने कहा…

कैसे कह दूँ मुझे छोड़ दिया है उसने, बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की. बहुत दिनो के बाद आपके ब्लाग पर आया. हुकूमत के कामों ने सब कुढ छुडा़ दिया

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही प्रभावशाली रचना.

रामराम.

Rajendra kumar ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और सुन्दर प्रस्तुती ,धन्यबाद।

इमरान अंसारी ने कहा…

वाह.......अति सुन्दर ......

अरुन अनन्त ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (16-06-2013) के चर्चा मंच 1277 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

ashokkhachar56@gmail.com ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और सुन्दर प्रस्तुती

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

आज की ब्लॉग बुलेटिन तार आया है... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत खूब

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

.बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
latest post पिता
LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

रचना दीक्षित ने कहा…

हसरतें तो मुँह फैलाए बैठी ही रहती है.

बेहतरीन और सुन्दर प्रस्तुति.

के. सी. मईड़ा ने कहा…

बहुत बेहतरीन अभिव्यक्ति वन्दना जी..
आभार

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ये सब उल्टा पुलटा कैसे हुआ ??? हसरतों के लकड्बग्गे सोचने पर विवश कर रहे हैं

Tamasha-E-Zindagi ने कहा…

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - एकला चलो पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

एकदम से यह क्या हो गया?नहीं, लकड़बग्घों को दूर ही रहने दीजिये,यह जगह उनके लिए नहीं!