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सोमवार, 24 जून 2013

ओ मेरे !............6

साहेबा ! इश्क की डली मूंह में रखी है मैंने ............ और कुनैन से कुल्ला किया है ...........खालिस मोहब्बत यूं ही नहीं हुआ करती ...........एक डोरी सूरज की तपिश की लेनी पड़ती है और एक डोरी रूह की सुलगती लकड़ी की ...फिर गूंथती हूँ चोटी अपने बालों के साथ लपेटकर ...........लपटें रोम रोम से फूटा करती हैं और देख आज तक जली ही नहीं मेरी ख्वाहिशें , तुझे चाहते रहने की कोशिशें , तुझ पर जाँ निसार करने की चाहतें ..........एक एक मनका प्रीत का पिरोया है ना मैंने जो सूत काता था कच्चे तारों का और कंठी बना गले में बाँध लिया है ........... सुना है इस कंठी को देख फ़रिश्ते भी सजदे किया करते है , सजायाफ्ता  रूहें भी सुकून पाया करती हैं ...........जानते हो क्यों ? क्योंकि इसमें तेरा नाम लिखा है ..............जानां !!!

सिन्दूर , पाजेब , बिंदिया , मंगलसूत्र कुछ नहीं चाहिए मुझे ..........ये ढकोसलों भरे रिवाज़ मेरी रूह की थाती नहीं ..........तुम जानते हो ............बस प्रेम की कंठी जो मैंने बाँधी है ...........क्या किसी जन्म में , किसी पनघट के नीचे , किसी पीपल की छाँव में , किसी चाहत की मुंडेर पर ...........आओगे तुम मुझमे से खुद को ढूँढने .........मेरी आवाज़ को , मेरी इबादत को मुकम्मल करने ...............ये एक सवाल है तुमसे ..........क्या दे सकोगे कभी " मुझसा जवाब " ............ओ मेरे !

19 टिप्‍पणियां:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

नया अंदाज ! उम्दा प्रस्तुती !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

वन्दना जी!
बहुत अच्छी वर्जना प्रस्तुत की है आपने!

yashoda Agrawal ने कहा…

आपने लिखा....
हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए बुधवार 26/06/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है .
धन्यवाद!

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

वाह !

Unknown ने कहा…

Aprteem. Bhot pyari lines he. Itna acha parhke AATMA kush ho gai. Bhot acha. Thank You. Meri khushi ke liye

Unknown ने कहा…

Aprteem. Bhot pyari lines he. Itna acha parhke AATMA kush ho gai. Bhot acha. Thank You. Meri khushi ke liye

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


हैल्थ इज वैल्थ
पर पधारेँ।

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २५ /६ /१३ को चर्चा मंच में राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है ।

Kailash Sharma ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति...

ashokkhachar56@gmail.com ने कहा…

वाह बहुत ही अच्छा लगा, धन्यवाद.

Dr. Shorya ने कहा…

वाह , बहुत खूब अंदाज ए बयाँ , आभार

sushmaa kumarri ने कहा…

बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

Madan Mohan Saxena ने कहा…

उत्क्रुस्त , भावपूर्ण एवं सार्थक अभिव्यक्ति .

HARE RAM MISHRA ने कहा…

आपकी साहित्य में पहुँच काफी गहरी है ... सलाम दुआ ...

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…


बहुत उम्दा प्रस्तुति !
latest post जिज्ञासा ! जिज्ञासा !! जिज्ञासा !!!

pran sharma ने कहा…

DIL SE NIKLEE HOOK KEE GOONJ BAHUT
PYAAREE LAGEE HAI .

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' PBChaturvedi ने कहा…

रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत अच्छी रचना...बहुत-बहुत बधाई...

@मानवता अब तार-तार है

वाणी गीत ने कहा…

प्रेम को इन आडम्बरों की क्या आवश्यकता है !!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ...
जो चाहता है सच्चे दिल से वो जरूर आएगा ...