अनुमति जरूरी है

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

गुरुवार, 7 जुलाई 2011

तभी आज इतने वर्षों बाद यादों ने दस्तक दी है

 
पूरा चाँद था उस दिन
जिस दिन हम मिले थे
याद है ना तुम्हें
और आसमाँ में
बदली छाई थी
जिसने चाँद को
अपने आगोश में
धीरे धीरे समेट लिया था
और चाँद भी
बेफिक्र सा उसके
आगोश में सो गया था
जाने कब की थकान थी
जो एक ही रात में
उतार देना चाहता था
और उस सारी रात
हमने भी एक सफ़र
तय किया था
दिलों से दिलों तक का
रूह से रूह तक का
जहाँ जिस्म से परे
सिर्फ आँखें  ही बोल रही थीं
और शब्द खामोश थे
पता नहीं क्या था उस रात में
ना बात हुई ना वादा हुआ
मगर फिर भी कुछ था ऐसा
कि जिसने मुझे आज तक
तुमसे जोड़ा हुआ है
शायद .........तुम भूल गए हों
मगर वो प्लेटफ़ॉर्म पर
सुबह के इंतज़ार में
गुजरती रात आज भी
मेरे वजूद में ज़िन्दा है
सुबह तो सिर्फ जिस्म
वापस आया था
रूह तो वहीँ तुम्हारी
खामोश आँखों में ठहर गयी थी
कभी कभी अहसास
शब्दों के मोहताज़ नहीं होते
और कम से कम
पहली और आखिरी मुलाक़ात
तो उम्र भर की जमा पूँजी होती है
शायद कहीं तुम भी आज
उस मुलाकात को याद कर रहे होंगे
तभी आज इतने वर्षों बाद
यादों ने दस्तक दी है

34 टिप्‍पणियां:

सदा ने कहा…

यादों ने दस्‍तक दी है ..

बहुत ही बढि़या प्रस्‍तुति ।

Dr Varsha Singh ने कहा…

पहली और आखिरी मुलाक़ात
तो उम्र भर की जमा पूँजी होती है
शायद कहीं तुम भी आज
उस मुलाकात को याद कर रहे होंगे
तभी आज इतने वर्षों बाद
यादों ने दस्तक दी है.

खूबसूरत कविता....

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

कविता नहीं एक यात्रा है यह...

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

बहुत ही बढि़या प्रस्‍तुति ।

Sawai SIingh Rajpurohit ने कहा…

पूरा चाँद था उस दिन
जिस दिन हम मिले थे
याद है ना तुम्हें
और आसमाँ में
बदली छाई थी
जिसने चाँद को
अपने आगोश में
धीरे धीरे समेट लिया था
बहुत अच्छी रचना पढ़ाने के लिए आपका आभार
कभी मेरे ब्लॉग पर आये!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
____________________________________

वाणी गीत ने कहा…

इतनी खूबसूरत यादें कोई भला भूलेगा कैसे...किया होगा उसें भी इसी तरह याद !
खूबसूरत एहसास !

Anupam karn ने कहा…

एक टीस छोडती .....
बढ़िया कविता !!

shikha varshney ने कहा…

ये प्लेटफार्म भी न:):) ...
बहुत प्यारी सी रचना है कोमल एहसासों की.

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी.....हैट्स ऑफ.....इस पोस्ट के लिए.........एक रूहानी सा अहसास हुआ जो दिल को अन्दर तक भिगो गया है........बहुत खूब, शानदार, लाजवाब|

: केवल राम : ने कहा…

कभी कभी अहसास
शब्दों के मोहताज़ नहीं होते
और कम से कम
पहली और आखिरी मुलाक़ात
तो उम्र भर की जमा पूँजी होती है

भावनाओं को बहुत सुन्दरता से सामने रखा है और अहसासों को शब्द देने का अच्छा प्रयास किया है ....आपका आभार

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ऐसी मुलाकातें जीवन भर स्मृतियों में बस जाती हैं।

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

पहली और आखिरी मुलाक़ात
तो उम्र भर की जमा पूँजी होती है
शायद कहीं तुम भी आज
उस मुलाकात को याद कर रहे होंगे
तभी आज इतने वर्षों बाद
यादों ने दस्तक दी है.
पहली और आखिरी मुलाक़ात
तो उम्र भर की जमा पूँजी होती है
शायद कहीं तुम भी आज
उस मुलाकात को याद कर रहे होंगे
तभी आज इतने वर्षों बाद
यादों ने दस्तक दी है."

बेहद खुबसूरत रचना भीगी हुई ,बारिश की पहली फुहार जैसी ... क्या बात हैं ....

manu manju shukla ने कहा…

nice one

संध्या शर्मा ने कहा…

कभी कभी अहसास
शब्दों के मोहताज़ नहीं होते
और कम से कम
पहली और आखिरी मुलाक़ात
तो उम्र भर की जमा पूँजी होती है.....

बहुत खूबसूरत जज़्बात......

रविकर ने कहा…

बढि़या प्रस्‍तुति ।

शहरोज़ ने कहा…

जूझना कोई आपसे सीखे. आपको पढना हमेशा अच्छा लगा है.
समय हो तो युवतर कवयित्री संध्या की कवितायें. हमज़बान पर पढ़ें.अपनी राय देकर रचनाकार का उत्साह बढ़ाना हरगिज़ न भूलें.
http://hamzabaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_06.html

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वाह ! ऐसी कितनी ही मुलाकातें, यादें बनकर दिल बहलाती हैं .

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

Aur khubsurat dwar khol gaya.sundar rachana

Roshi ने कहा…

sunder bhav ki sunder prastuti

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

शायद कहीं तुम भी आज
उस मुलाकात को याद कर रहे होंगे
तभी आज इतने वर्षों बाद
यादों ने दस्तक दी है

अति सुन्दर...बहुत उम्दा रचना

संध्या शर्मा ने कहा…

कभी कभी अहसास
शब्दों के मोहताज़ नहीं होते
और कम से कम
पहली और आखिरी मुलाक़ात
तो उम्र भर की जमा पूँजी होती है.....

वाह कितनी भावपूर्ण पंक्तियाँ हैं.... बहुत सुन्दर... भावनाओं की लाजवाब अभिव्यक्ति.........

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) ने कहा…

अतिसुंदर प्रस्तुति.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यादों की दस्तक अच्छी लगी

मीनाक्षी ने कहा…

पहली और आख़िरी मुलाकात के बीच भी हज़ारों बार यादें दस्तक दे दे कर रुला जाती है... भावभीनी रचना..

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

कभी कभी एहसास शब्दों के मोहताज नही होते ...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

mridula pradhan ने कहा…

behad achchi hai ye yadon ki dastak.......

Rajesh Kumari ने कहा…

kabhi kabhi ehsaas shabdon ke mohtaaj nahi hote.....bahut sunder line bahut pyari kavita ehsaason aur khoobsurat yaadon ka anootha sambandh.vo afsana jise anjaam tak lana na ho mumkin use ek khoobsurat mod dekar chodna achcha....

सुमन'मीत' ने कहा…

yaad ki dastak ..bahut sundar...yaaden aisi hi hoti hain

Vivek Jain ने कहा…

खूबसूरत कविता,
आभार- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

चाँद को लेकर बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

Manish ने कहा…

बेहद खूबसूरत!! इस पूरे चाँद और याद के इस सिलसिले को महसूस करना बेहद अलग अनुभव होता है..

Renu Sharma ने कहा…

hindi blogs ke mahasagar ki ek boond vandanaji !!!!
bahut arse bad aapko padh rahi hoon , kah nahi sakti kitna achchha lag raha hai . yaaden to varson bad hi dastak deti hain chahe pahli mulakat ho ya aakhiri.
aapko garbhnaal main bhi padha hai, bahut hi mast likha hai, meri or se dher saari badhaiyan sveekar kariye, blogs ki duniyan main chhane ke liye.
or kitab ke liye bhi.behad khushi ho rahi hai aap sajh sakti hongi.
main theek hoon bas blog par aana kam ho pata hai, jaldi hi milungi.
renu sharma

Dorothy ने कहा…

कोमल अहसासों को पिरोती हुई खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.