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शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

विशालता के पैमाने नही होते

दे्खा है ना
दग्ध सूरज
रोज आस्माँ
के सीने को
जलाता है
अपनी आग
अपना आक्रोश
सब उँडेल देता है
मगर आस्माँ
आज भी वहीं
स्थिर अविचल
समाधिस्थ सा
ध्यानमग्न ख़डा है
जानता है ना
दर्द जब हद से गुजर जाये
तो दवा बन जाता है
और देखो ना
आस्माँ ने उसकी ज्वाला को
अपने मे समाहित कर
उसे सुकून और स्वंय को
कितना विस्तृत किया है
या विशालता और महानता को
किसी कसौटी की जरूरत नही होती
तभी हर दर्द को समाने का हुनर आता है
शायद तभी  विशालता के पैमाने नही होते

33 टिप्‍पणियां:

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

विशाल ह्रदय और भाव से लिखी गई कविता !

एस.एम.मासूम ने कहा…

अच्छी कविता है ...सही कहा है

सदा ने कहा…

भावमय करते शब्‍दों के साथ बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'दर्द जब हद से गुजर जाये

तो दवा बन जाता है '

.....................गहन भावों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सच कहा विशालता के पैमाने नहीं होते ..जो पमानों में नाप जाए वहाँ विशालता नहीं होती

सलीम ख़ान ने कहा…

behtar

पहले तो आपसे मज़े लेंगी फ़िर जब दुनियां को पता चलेगा तो बन जायेंगी अबला नारी

इमरान अंसारी ने कहा…

बहतरीन रूपकों का इस्तेमाल करते हुए आपने बहुत गहरी बात कही है.....बड़ा बाने के लिए सहनशक्ति का होना बहुत ज़रूरी है.....शानदार प्रस्तुति|

Patali-The-Village ने कहा…

गहन भावों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति|

अजय कुमार झा ने कहा…

एक खूबसूरत टुकडा , बहुत ही सुंदर

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (02.07.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

shikha varshney ने कहा…

क्या बात कही है ..विशालता को भला कैसे नापा तौला जा सकता है.

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

ऐसी विशालता मानवता को भी कायम रखती है

Rajesh Kumari ने कहा…

dard jab had se gujar jaaye to dava ban jaata hai.bahut achche bhaavon ko mahsoos karati hui kavita kaabile tareef hai.

कुश्वंश ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति, प्रभावशाली अभिव्यक्ति

kshama ने कहा…

Wah! Kaise itna sundar likh letee ho?

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सूर्य का उदाहरण विशालता का मानक है।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

कमाल के भाव संजोये हैं...... बहुत उम्दा रचना

Roshi ने कहा…

gehra bhav darshati kavita

: केवल राम : ने कहा…

विशालता के पैमाने नहीं होते


विशाल लोगों के लिए कोई बेगाने नहीं होते

वाणी गीत ने कहा…

विशालता के कोई पैमाने नहीं होते ...
फैले तो पूरा आसमान , सिकुड़े तो सिर्फ एक बूँद !

udaya veer singh ने कहा…

पैमाने तो होते हैं ,सामर्थ्य नहीं मापने की , अगर कोशिश की भी तो छुद्रता है , विचारों की .... उत्कृष्ट रचना जी / धन्यवाद /

अशोक बजाज ने कहा…

nice.

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' ने कहा…

सच कहा विशालता के पैमाने नहीं होते...बहुत सुन्दर प्रस्तुति

रविकर ने कहा…

बहुत अच्छा लगा ||

बधाई |

prerna argal ने कहा…

दर्द जब हद से गुजर जाये
तो दवा बन जाता है
और देखो ना
आस्माँ ने उसकी ज्वाला को
अपने मे समाहित कर
उसे सुकून और स्वंय को
कितना विस्तृत किया है bahut hi gahnbhav liye sunder abhibyakti,badhaai aapko.

mridula pradhan ने कहा…

theek to....vishalta ka kahan koi pamana hota hai.

ईं.प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

संध्या शर्मा ने कहा…

सच कहा है आपने विशालता के पैमाने नहीं होते.. जब पैमाने में नप सके तो विशालता कहाँ रह जाती है......... प्रभावशाली अभिव्यक्ति..........

Amrita Tanmay ने कहा…

शब्दो में बांध दिया.. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

'दर्द जब हद से गुजर जाऐ
तो दवा बन जाता है '

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है वन्दना जी ...आपका तो वैसे भी जबाब नही ...

Kunwar Kusumesh ने कहा…

विशालता के पैमाने नहीं होते---आपकी बात से सहमत.

मीनाक्षी ने कहा…

सरल सहज भाव से गहरी बात कह दी..

Udan Tashtari ने कहा…

आनन्द आया...बहुत बढ़िया.