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मंगलवार, 21 जून 2011

हिचकी

सुना था
कोई याद करे
कोई बात करे
कोई बारिश में भीगे
कोई सपनो में देखे
कोई ख्यालो में संजोये
तो हिचकी आती है
मगर देखो ना
मैं तो इक पल को भी
कभी तुमको भूली ही नहीं
यादों से कभी तुमको
रुखसत ही नहीं किया

ख्यालों में …दिन में
सपनो में …रात में
भीगी भीगी बरसात में
फिर चाहे आसमानी हो
या रुहानी
तुम और तुम्हारी यादों को हमेशा भिगोये रखा

बताओ ज़रा ……
कभी एक सांस भी
ले पाये मेरी हिचकियों बिन
या ये मेरा कोरा भरम था
तुम्हें कभी हिचकी आयी ही नहीं

31 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपने इस रचना में अन्तर्मन के भावों का बहुत बढ़िया विश्लेषण किया है!
बहुत सुन्दर रचना!

shikha varshney ने कहा…

ओह हो हो ..क्या प्यार भरी घुडकी है...बहुत प्यारी रचना.

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति लिए हैं पंक्तियाँ ...सुंदर रचना

वीना श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत खूब....वंदना जी....

Roshi ने कहा…

shandar prastuti

मनोज कुमार ने कहा…

भ्रम टूटने में समय लगता है। भावुक कर देने वाली रचना।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

bahut sundar ..hichkiyon ke dwara aapne antarman me uttpan dwand ko bharose kee lakeer ko tarasa hai..umda

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

:):) बहुत प्रवाह मयी रचना ..अरे जब भूली ही नहीं तो याद कैसे करतीं ? और जब याद नहीं किया तो हिचकी कैसे आएगी .. :):) बहुत प्यारे भावों से संजोयी रचना

Vivek Jain ने कहा…

वंदना जी, आप ने बहुत सुंदर लिखा है,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

अजय कुमार ने कहा…

अच्छे भाव ,सुंदर रचना

Urmi ने कहा…

सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने! बेहतरीन प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

ZEAL ने कहा…

quite often i imagine in the same way..." koi yaad kare..."

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत सी सुन्दर अभिव्यक्ति, मन के भाव सहज ही शब्द पा जाते हैं आपकी कलम से।

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

achchi kavita hai vandna ji.......

अनाम ने कहा…

हाँ ऐसा सुना था.......पर विज्ञानं कुछ और ही कहता है........पोस्ट अच्छी है कुछ अलग सी....सुन्दर|

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल २३-६ २०११ को यहाँ भी है

आज की नयी पुरानी हल चल - चिट्ठाकारों के लिए गीता सार

abhi ने कहा…

:) :) बहुत ही खूबसूरत..

arvind ने कहा…

bahut sundar pyaari rachna.

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत प्रवाह मयी रचना|

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर भाव और सुन्दर अभिव्यक्ति....

***Punam*** ने कहा…

सुना है कि तुम्हें हिचकियाँ बहुत आती हैं...

मेरी यादों से तुम दूर गए ही कब ???

udaya veer singh ने कहा…

क्या बात है .!.. कितनी प्रशंसा करें आप ही बताएं ... बहुत खूब भाव-प्रवर , शिल्प .......लेखन न रुके क़यामत तक .. हम तो यही कहेंगे जी /
शुक्रिया /

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

राजेश उत्‍साही ने कहा…

हिचकियां हैं कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहीं। कोरा भरम नहीं है, सचमुच आपको याद करते हैं।
*

अच्‍छी कविता है।

रंजना ने कहा…

वाह...वाह....वाह....

क्या बात कही....

यह उपालंभ किसका न मन मोह ले...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

महेन्‍द्र वर्मा ने कहा…

हिचकी को लेकर लिखी गई एक नर्म और नाजुक सी रचना ।

कविता का कथ्य बिल्कुल नया है।

शुभकामनाएं।

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

bahut khoob vandna ji...

mridula pradhan ने कहा…

wah.bahut sunder.

संध्या शर्मा ने कहा…

गर देखो ना
मै तो इक पल को भी
कभी तुमको भूली ही नही
ये आपका "देखो ना कहना " मुझे बहुत ही अच्छा लगता है...
प्यार भरे भावों से सजी सुंदर रचना...... अनुभूतियों की सुन्दर अभिव्यक्ति ...
लाजवाब ........

Asha Joglekar ने कहा…

बहुत सुंदर भाव प्रवण कविता ।