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शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

जिसके नाम का गरल पी जाऊँ

प्रेम के पनघट पर सखी री
कभी गागर भरी ही नही


मन के मधुबन मे
कोई कृष्ण मिला ही नही


जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही


किस प्रीत की अलख जगाऊँ
ऐसा देवता मिला ही नही


किस नाम की रट्ना लगाऊँ
कोई जिह्वा पर चढा ही नही


कौन सी कालिन्दी मे डूब जाऊँ
ऐसा तट मिला ही नही


जिसके नाम का गरल पी जाऊँ
ऐसा प्रेम मिला ही नहीं


वो जोगी मिला ही नही
जिसकी मै जोगन बन जाऊँ


फिर कैसे पनघट पर सखी री
प्रीत की मै गागर भर लाऊँ


40 टिप्‍पणियां:

सदा ने कहा…

वाह ....बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द ।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

मन के मधुबन मे
कोई कृष्ण मिला ही नही

जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही
per main radha to hun
meera to hun ...

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

"preet ki gagar" :)
bahut khub.......adbhut:)

शिखा कौशिक ने कहा…

बहुत सार्थक भावाभिव्यक्ति.सराहनीय प्रस्तुति...

उस्ताद जी ने कहा…

जिसके नाम का गरल पी जाऊँ
ऐसा प्रेम मिला ही नहीं...

सुन्दर रचना है
पसंद आई

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

बहुत ही खुबसुरत प्रेम भावों में सनी प्रेममयी रचना.........

Atul Shrivastava ने कहा…

जिसके नाम का गरल पी जाऊं
ऐसा प्रेमी मिला ही नहीं।
वाह।
बेहतरीन प्रस्‍तुति।
सुंदर रचना।
बधाई हो आपको।
हमेशा की तरह आपकी एक और सुंदर रचना।
अध्‍यक्षा महोदया आपको बधाई।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वो जोगी मिला ही नही
जिसकी मै जोगन बन जाऊँ

फिर कैसे पनघट पर सखी री
प्रीत की मै गागर भर लाऊँ

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ।

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

सुन्दर प्रेम गीत !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

गोपियाँ तो प्रेम का गागर भर भरकर लाती थीं पनघट से।

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर रचना, धन्यवाद

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सार्थक भावाभिव्यक्ति| सराहनीय प्रस्तुति| धन्यवाद|

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

गागर भर जाती तो यह अनुभूति कैसे होती ...बहुत सुन्दर रचना

sandhya ने कहा…

मन के मधुबन मे
कोई कृष्ण मिला ही नही

जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही..
प्रेमरस में डूबी हुई सुन्दर भावाभिव्यक्ति...

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना.

मनोज कुमार ने कहा…

उचित पात्र मिला या नहीं वह ज़रूरी नहीं है, महत्वपूर्ण है उसकी खोज की चाहत। क्योंकि जहां चाह होती है, वहां राह होती है।

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर भावमय कविता। शुभकामनायें।

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..आभार

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

मन के मधुबन मे
कोई कृष्ण मिला ही नही

बहुत सुंदर .....

mridula pradhan ने कहा…

bahut hi sunder.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

अत्यंत भावपूर्ण रचना.

रामराम.

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर

OM KASHYAP ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर
प्रस्‍तुति बहुत पसन्द आई।

shikha varshney ने कहा…

gagar men preet bhari si sundar rachna.

अशोक जमनानी ने कहा…

sundar rachna
ashok

संतोष पाण्डेय ने कहा…

प्रेम के पनघट पर सखी री
कभी गागर भरी ही नही.
या तो अच्छा हुआ.
प्यास मेरी जो बुझ गई होती
जिंदगी फिर न ज़िन्दगी होती.
भावपूर्ण कविता के लिए बधाई.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

कृष्ण की भक्ति से ओत-प्रोत सुन्दर रचना!

रचना दीक्षित ने कहा…

मन के मधुबन मे
कोई कृष्ण मिला ही नही

जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही.

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति. इस खोज में ही जीवन व्यतीत होना है. बहुत खूब.

संजय भास्कर ने कहा…

जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही..
प्रेमरस में डूबी हुई सुन्दर भावाभिव्यक्ति...

mahendra verma ने कहा…

जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही

वाह, अति सुंदर।
इस कविता में भावों की मौलिकता अच्छी लगी।

ZEAL ने कहा…

.

जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही...

A bitter truth !

A woman submits herself only to a loving , caring and affectionate man . Unfortunately such lot is extinct.

.

Anupriya ने कहा…

जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही
sundar...

Rakesh Kumar ने कहा…

आपने तो गागर में सागर ही भर दिया भावों का दर्द उंडेलकर .मन के मधुबन में कृष्ण भी मिलेंगे और उनकी बंसी भी बजेगी.आपकी आस इतनी गहरी और मुखर है तो कृष्ण कैसे निराश कर सकते हैं.वही तो कहलवा रहे हैं आपसे .

kshama ने कहा…

Wah,Vandana wah! Kya gazab kaa likhtee ho!Bas,padhtehee rah jatee hun!

वाणी गीत ने कहा…

जिसके नाम का गरल पी जाऊं ,
ऐसा प्रेम मिला ही नहीं ...
मन के मधुबन में
कोई कृष्ण मिला ही नहीं ..

राधा और गोपियों को भी मिला कहाँ था , वह तो उनमे ही था !
सुन्दर गीत !

Dr Varsha Singh ने कहा…

हृदयस्पर्शी पंक्तियां हैं।
अच्छी कविता के लिये बधाई स्वीकारें।

amit-nivedita ने कहा…

उनमें ही तासीर ना थी जलाने को,
हम तो कबके तैयार थे मिट जाने को ।

ज्योति सिंह ने कहा…

मन के मधुबन मे
कोई कृष्ण मिला ही नही

जिसकी तान पर दौडी जाऊँ
ऐसी बंसी बजी ही नही
ati uttam ,krishn kahan milte hai sabko aur is yug me namumkin .phir bhi aas hai krishndhara bah chale to pawan ho jaye ....

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

समय के धरातल पर
कवितायें उगाना छोड़ो कवि
वक्त की नब्ज़ को ज़रा पहचानो
अब कहाँ फूल बागों में खिलते हैं
अब कहाँ आकाश में उन्मुक्त पंछी उड़ते हैं

Uttam baat kahee aapne.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

sirf sundar kahunga to theek nahi honga , is baar bahut hi accch prayog kiya hia bimbo ka .. kavita me praan foonkh diya hai tumhari imagination aur shabdo ke prayog ne ... mera salaam kabul karo ji