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गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

" कल "

कल
जब आई थी
मैं
क्यूँ नही बांधा
तुमने
प्रेमापाश में
क्यूँ नही
पकड़ा दामन
क्यूँ नही
डालीं पाँव में
जंजीरें
अपने इंतज़ार की
क्यूँ नही दी
दुहाई
अपने जज्बातों की
क्यूँ नही सुनाई
इक-इक पल में
सौ- सौ बार
मर- मर कर
जीने की दास्ताँ
अब कल
फिर आऊँगी
तब कह लेना
अनकही बातें
दिखा देना
अपनी धडकनों पर
लिखा मेरा नाम
हवाओं पर तैरता
मोहब्बत का पैगाम
सुना देना
सारे जहान को
अपने ख्वाबों की
दास्ताँ
मगर एक बात
याद रखना
कल आई थी
कल आऊँगी
पर ये भूल
ना जाना
कल कभी नही आता
कभी नही आता

28 टिप्‍पणियां:

महफूज़ अली ने कहा…

मैं क्या कहूँ अब? आपने तो निःशब्द कर दिया...

वाणी गीत ने कहा…

इतने प्यार से शिकायत करेंगी तो कौन ना कल को आज में बदल देगा ....
अच्छी रचना ...!!

हृदय पुष्प ने कहा…

बेमिशाल

विचारों का दर्पण ने कहा…

वाह !! आपकी रचना ने तो मंत्रमुग्ध कर दिया .........बहुत बढ़िया

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत खूबसूरत शब्द दिए हैं शिकायत को भी....और एक यथार्थ भी कि कल कभी नहीं आता....सुन्दर अभिव्यक्ति

लिमटी खरे ने कहा…

अद्भुत अकल्पनीय

Razi Shahab ने कहा…

waahhh...kya baat hai....badhiya

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है।सही लिखा है कल कभी नही आता।बधाई।

कल आई थी
कल आऊँगी
पर ये भूल
ना जाना
कल कभी नही आता
कभी नही आता

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बहुत खूब सुन्दर भाव , कल सचमुच कभी नहीं आता !

ktheLeo ने कहा…

कमाल की सुन्दर प्रेमाभिव्यक्ति!

रचना दीक्षित ने कहा…

सही कहा की कल नहीं आता सो आज ही टिपण्णी लिखे दे रही हूँ.अच्छा लगा पढ़ कर बस मज़ा आ गया

kshama ने कहा…

Kitna sach kaha..kal kabhi nahi aata..aur na jane kyon ham apne jazbaat chhupaye rakhte hain...?

रश्मि प्रभा... ने कहा…

waah......kitna kuch samet rakha hai

shikha varshney ने कहा…

kya khubsurat tareeka hai shikayat ka..behtareen abhivyakti vandna ji..babhut sunder

नरेन्द्र व्यास ने कहा…

na shab hai na vichaar koi,
laga jaise, kah gaya mujhese hee meri hee baat koi...wah!! ye virodhabhas ko bhee aapne kya andaaz diya hai...badhai!!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कल कभी नही आता .......... इसलिए तो कबीर दास जी कह गये हैं
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब .....
बहुत अच्छी रचना है ..........

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर अद्भुत बधाई आपको आज कल खूब लिख रही हैं शुभकामनायें

योगेश स्वप्न ने कहा…

magar ek baat..........kabhi nahin aata. sunder abhivyakti, dil ko chhoo gai.

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

.... बेहतरीन रचना !!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

इतनी गूढ़ बात भी आपने बहुत सरल शब्दों मे
प्रकट कर दी!
रचना बहुत सुन्दर है!

psingh ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना कमाल के
शब्दों का चयन किया है
आभार...................

दीपक 'मशाल' ने कहा…

किसी को मनाने के सबसे बेहतरीन तरीके में से एक... :) आभार..
जय हिंद.... जय बुंदेलखंड...

Prof. Prakash K. ने कहा…

क्या तुमने मूझे पागल समझ रखा है।
मैने तो सिर्फ तुम्हे,
मेरे प्यारमे फसाने के लिये
इस शहर की सबसे खूबसूरत लडकी कहा था।
तुम उसे सच समझ बैठी।
अब इंतजार क्या,
२४ घण्टा मेरे पीछे पडी रहती हो।
मै किसके ब्लॉग पढता हूं?
कौन कौन मेरी फॅन है?
मेरे सो जाने के बाद
ब्राउजर की हिस्ट्री देखती रहती हो।
मेरे थक जाने के बाद.
एक कप चाय
मेरे कंप्यूटर की मेज पर लाकर रख देती हो।
मैने सिर्फ एक दिन तुमसे ये कहा था।
मै तुझे प्यार करता हूं।
तुम्हे तो जिंदगी भर
मुझे प्यार करने के सिवा
और कुछ करना पसंद नही।
अरे ओ जालिम,
कहने को तो मै तेरे साथ हूं।
पर मेरा मन नेट पर
किसी और को ढूंढने के लिये भटकता रहता है।

बेनामी ने कहा…

Isiliye to hame vartman me jine ki aadat dalani chaiye. aaz yadi achha raha to kal to achha hoga hi.kal ke liye baithane se kuch na milane wala....

बेनामी ने कहा…

Hame isiliye vartman me jine ki kala sikhana chahiye. kal ke piche bhagane se kuch na milane wala. Aaz yadi sunahara din hai to kal to hoga hi sunahara...kal ka wait na keren please...

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

बेहद खूबसूरत रचना । रचना का वितान सुन्दर है । आभार ।

ritu raj ने कहा…

bahut achchi lagi yah rachna.
thanks.

M VERMA ने कहा…

क्यूँ नही बांधा
तुमने
प्रेमापाश में
शिकवा तो यही है कि ----
बहुत सुन्दर भाव