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गुरुवार, 28 जनवरी 2010

मेरे हिस्से का आसमान

शाम के
धुंधलके में
एक टुकड़ा
आसमान
मेरे आँगन
में उतरा
मुझे पुकारा
मेरे हिस्से के
चाँद की
संगमरमरी
दुधिया रौशनी से
मेरे आँगन को
जगमगाया
तारों की
टिमटिमाती
मखमली
चादर पर
सुलाया
और ले गया
स्वप्नों के
जहान में
जहाँ बादलों
का एक टुकड़ा
लहलहाता सा
आया और
मेरे वजूद पर
इन्द्रधनुषी
रंगों सा
छा गया
मेरे स्वप्न को
हकीकत का
ताज पहना गया
मुझे मेरे
वजूद को
सरगम सा
सहला गया
मेरे बिखरे हुए
अहसासों को
महका गया
कुछ इस तरह
टुकड़ों में
बंटे अस्तित्व
को संपूर्ण
बना गया
और फिर
मेरे हिस्से का
आसमान
मुझे मिल गया

25 टिप्‍पणियां:

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... सुन्दर रचना !!!

shikha varshney ने कहा…

bahut khubsurat ....bahut hi khubsurat vandna ji

प्रीति टेलर ने कहा…

bahut khubsurat khyal...apne hisse ka aasman kisi khushnasib ko hi mil paata hai ....

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

sundar bhaavo se sazi hui rachna ... swapano ki bhaasha aur mahak chaayi hui hai rachna par ...

badhai

संगीता पुरी ने कहा…

आशावादी रचना .. भले ही देर सवेर हो .. अपने हिसे का आसमान हमें मिल ही जाता है !!

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बेहतरीन लिखा है आपने शुक्रिया

varsha ने कहा…

मेरे हिस्से का
आसमान
मुझे मिल गया
very posetive.......

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत सुन्दर शब्दों को चुन कर इन्द्रधनुष सजाया है और ख्वाब पुरे हो जाएँ तो फिर बात ही क्या....बहुत सुन्दर रचना...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हर किसी को अगर उसके हिस्से का आसमान मिल जाए तो फिर बात ही क्या ...... बहुत अच्छी रचना है .........

रंजना ने कहा…

WAAH!!! BAHUT HI KHOOBSOORTI SE AAPNE KOMAL BHAVON KO ABHIVYAKTI DI HAI.

आनन्द वर्धन ओझा ने कहा…

टुकड़े-टुकड़े बादलों के विस्तृत आकाश में अपना पूरा वजूद, पूरी शख्सियत की तलाश जीवन की चरम उपलब्धि है और यही तो जीवन की अभीप्सा भी है !
अनुभूतियों की सच्ची-सहज अभिव्यक्ति !
साभिवादन--आ.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी लेखनी में वास्तव में निखार आ गया है!
यह रचना इसका प्रमाण है!
शुभकामनाएँ!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

aapke hisse ka aasman behad lubhawna

VICHARO KA DARPAN ने कहा…

bahut hi badhiya .......

मनोज कुमार ने कहा…

कवयित्री का सत्य/प्रकृति से साक्षात्कार दिलचस्प है।

बालकृष्ण अय्य्रर ने कहा…

खुदा करे आपको आपके हिस्से का आसमान जरूर मिले. कविता अच्छी लगी.

योगेश स्वप्न ने कहा…

shukra hai, mil gaya. kahin sapna toot jata to,.................wah wah wah , behad khubsurat prastuti. vandana ji badhaai.

Devendra ने कहा…

खूबसूरत एहसास जगाती सुंदर कविता के लिए बधाई.

Babli ने कहा…

जहाँ बादलों
का एक टुकड़ा
लहलहाता सा
आया और
मेरे वजूद पर
इन्द्रधनुषी
रंगों सा
छा गया..
बहुत अच्छी लगी खासकर ये पंक्तियाँ! सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है!

संजय भास्कर ने कहा…

भावों को इतनी सुंदरता से शब्दों में पिरोया है
सुंदर रचना....

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

दीपक 'मशाल' ने कहा…

is kavita ki ravaiyat kabilegaur hai Vandana ji... bahut umda likha... der se aane ke liye sorry
Jai Hind...

singhsdm ने कहा…

सुन्दर रचना के लिए बधाई......!

नरेन्द्र व्यास ने कहा…

दिल को सुकून देने वाली बहंत सुन्दर रचना!!
बधाई!!!

किरण राजपुरोहित नितिला ने कहा…

हर मन की इक चाहत
एक मुठ्ठी आसमां!!

Apanatva ने कहा…

ati sunder rachana...